44 साल के राम सिंह और उनकी 40 साल की पत्नी कनु की कई बेटियां हैं. 16 बेटियां, tobe exact. और एक बेटा है. लेकिन घर वाले एक और बेटा चाहते हैं. इसलिए 18वें बच्चेकी तैयारी में जुटे हुए हैं. राम सिंह का कहना है कि दो बेटे होंगे तो पहले बुढ़ापेमें उनका ध्यान रखेंगे. फिर उनकी मौत के बाद उनकी बेटियों का ध्यान रखेंगे. इसलिएदोनों मियां-बीवी 18वें बच्चे की कोशिश में लगे हुए हैं. और गांव वाले ये सोच-सोचकरपरेशान हैं कि ये खाएंगे क्या, बच्चों को खिलाएंगे क्या. टाइम्स ऑफ़ इंडिया केमुताबिक दाहोड़ डिस्ट्रिक्ट में बसे इस गांव के सभी लोगों ने मिलकर इन्हें कन्विंसकिया है कि 18वां बच्चा न करें. गांव वाले चाहते हैं कि राम अब अपने होने वालेबच्चों पर फुल स्टॉप लगा दें. क्योंकि राम सिंह के पास जो जमीन है, वो छोटी सी है.उनके लिए मुमकिन ही नहीं है कि 18 बच्चों को पालकर बड़ा करें. इतने सारे बच्चे पैदाकरना सुनने में बड़ा ही हास्यास्पद लगता है. हम सोचते हैं कि इन लोगों का सेक्स करनेका स्टैमिना तो देखो. और हंस पड़ते हैं. मगर असल में ये हमारे समाज की नंगी सच्चाईहै. कि लोग आज भी लड़की को बोझ समझते हैं. और उस बोझ को हल्का करने के लिए लड़कों कीचाह में दर्जन से ज्यादा बच्चे पैदा कर ले जाते हैं. इतना ही नहीं, कभी उन औरतों केबारे में सोचती हूं जो इतने सारे बच्चे डिलीवर करती हैं, तो रूह कांप उठती है. कबहोगा हमारा मानसिक विकास?