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जमीन के लिए कलेक्टर ऑफिस में लेटने वाले बुजुर्ग का मामला कुछ और ही निकला

वीडियो में एक बुजुर्ग कलेक्टर के दफ्तर में फर्श पर लेट-लेटकर चक्कर लगा रहा है. बुजुर्ग का नाम शंकरलाल पाटीदार है. 65 साल के हैं. शंकरलाल का कहना है कि वो साल 2010 से अपनी ज़मीन के लिए लड़ाई कर रहे हैं. कभी कलेक्टर ऑफिस जा रहे हैं तो कभी कहीं और लेकिन उनकी कोई सुन नहीं रहा है.

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17 जुलाई 2024 (अपडेटेड: 17 जुलाई 2024, 10:34 PM IST)
madhya pradesh old man video
बुजुर्ग का नाम शंकरलाल पाटीदार है. 65 साल के हैं. (फ़ोटो/सोशल मीडिया)
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अगर आप आज सोशल मीडिया चला रहे होंगे तो एक कार्यालय में लोटते हुए बुजुर्ग का वीडियो जरूर देखा होगा. वीडियो में बुजुर्ग कलेक्टर के दफ्तर में फर्श पर लेट-लेटकर चक्कर लगा रहा है. नाम है शंकरलाल पाटीदार है. 65 साल के हैं. शंकरलाल का कहना है कि वो साल 2010 से अपनी ज़मीन के लिए संघर्ष कर रहे हैं. कभी कलेक्टर ऑफिस जा रहे हैं तो कभी कहीं और, लेकिन उनकी कोई सुन नहीं रहा है. इसलिए अब वो यहां पर लेटकर अपनी लड़ाई लड़ रहे हैं. हालांकि इलाके के कलेक्टर ने बताया है कि शंकरलाल की जमीन को लेकर कोई विवाद नहीं है. उनकी जमीन पर उनका ही कब्जा है.

यह वीडियो मध्यप्रदेश के मंदसौर का है. आजतक से जुड़े आकाश चौहान ने शंकरलाल से बात की. उन्होंने बताया, "परेशान हो गया हूं. कर्मचारी कोई नहीं सुनता है. हमारी कोई नहीं सुनते हैं. क्या करेंगे हम… मर गए हम."

बुजुर्ग का कहना है कि वो 25 से ज्यादा बार कलेक्टर के ऑफिस आ चुके हैं. उनका आरोप है कि उनकी आधी ज़मीन को किसी ने धोखे से अपने नाम करवा लिया. इसी की शिकायत लेकर वो बार-बार कार्यालय आते हैं, लेकिन कोई उनकी नहीं सुन रहा है.

शंकरलाल साखतली के रहने वाले हैं. उनका वीडियो जब वायरल हुआ तो आजतक मन्दसौर कलेक्टर दिलीप यादव के पास पहुंचे. दिलीप यादव ने बताया कि असल में शंकरलाल ने किसी की ज़मीन पर कब्जा किया हुआ है. उन्होंने कहा,

"कल जनसुनवाई के दौरान शंकरलाल पाटीदार, पिता फुलचंद पाटीदार, के द्वारा आवेदन दिया गया था. जिसमें बताया गया था कि उनकी ज़मीन को किसी के द्वारा बेचा गया था. उस संबंध में उनकी एप्लीकेशन ली गई. संबंधित तहसीलदार और SDM से एप्लीकेशन ली गई. एप्लीकेशन में पता चला कि सर्वे नंबर 604 और 625 , जिसका टोटल रकबा 3.52 हेक्टर है. इसमें आधा हिस्सा शंकरलाल के पास है और आधा हिस्सा उनके किसी परिवार सदस्य के पास है. लेकिन परिवार के सदस्य ने अपनी आधी ज़मीन साल 2010 के अंदर किसी को बेच दी. बेचने के बाद उस ज़मीन की रजिस्ट्री हो गई थी, लेकिन पूरी ज़मीन पर अभी भी शंकरलाल ही खेती करते हैं. उस पर उनका ही कब्जा है."

कलेक्टर दिलीप यादव ने आगे यह भी बताया कि शंकरलाल को कई बार समझाया गया है, लेकिन वो माने नहीं हैं. अगर उन्हें रजिस्ट्री को चैलेंज करना है तो उन्हें सिविल कोर्ट जाना पड़ेगा, डीएम कार्यालय से जमीन के संबंध में कोई कार्यवाही पेंडिंग नहीं है.

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