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वीडियो तो लीक हो गया, फिर ज्ञानवापी सर्वे की सीलबंद रिपोर्ट का अदालत में क्या हुआ?

आज चारों वादी महिलाएं, सीता साहू, रेखा पाठक, लक्ष्मी देवी और मंजू व्यास कथित तौर पर अपना सीलबंद लिफाफा कोर्ट में सरेंडर करने गईं.

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31 मई 2022 (अपडेटेड: 2 जून 2022, 11:29 PM IST)
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ज्ञानवापी सर्वे के कथित लीक्ड वीडियो का स्क्रीनशॉट. (आजतक)
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ज्ञानवापी मस्जिद में हुए सर्वे का कथित वीडियो अचानक सोमवार, 30 मई को टीवी चैनलों और सोशल मीडिया पर वायरल होने लगा. इसका असर मंगलवार 31 मई को हुई कोर्ट की कार्यवाही में भी देखने को मिला. इस मामले में मां श्रंगार गौरी की पूजा करने से जुड़ी याचिका दायर करने वाली चारों वादी महिलाएं वाराणसी कोर्ट पहुंचीं. ये महिलाएं सर्वे रिपोर्ट का सीलबंद लिफाफा कोर्ट में सरेंडर करने पहुंची थीं. लेकिन कोर्ट ने उसे लेने से इनकार कर दिया. कोर्ट ने ऐसा करते हुए कहा कि 4 जुलाई को वीडियो फोटो लीक केस की सुनवाई होगी. बता दें कि लिफाफा सरेंडर करने गए वकीलों ने ही वीडियो के लीक होने पर आपत्ति जताई थी और जांच की मांग की थी.

कोर्ट ने कल ही सौंपी थी सर्वे रिपोर्ट

19 मई, 2022 को कोर्ट कमीशन ने सर्वे रिपोर्ट वाराणसी कोर्ट को सौंप दी. उसके 12 दिन बाद यानी कल 30 मई को कोर्ट ने सर्वे रिपोर्ट की कॉपियां सीलबंद लिफाफे में सभी याचिकाकर्ताओं और दूसरे पक्ष को सौंप दीं. कोर्ट ने जब रिपोर्ट की कॉपियां दीं तो ये अंडरटेकिंग में लिखवा लिया था कि बिना कोर्ट की अनुमति लिए कोई भी वीडियो पब्लिक नहीं की जाएगी. लेकिन कोर्ट ने जैसे ही रिपोर्ट की कॉपी वादियों को सौंपी, कुछ देर बाद ही सर्वे के कथित वीडियो टीवी चैनलों पर चलने लगे.

आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक आज चारों वादी महिलाओं, सीता साहू, रेखा पाठक, लक्ष्मी देवी और मंजू व्यास कथित तौर पर अपना सीलबंद लिफाफा कोर्ट में सरेंडर करने गईं. लेकिन कोर्ट ने लिफाफा वापस लेने से इनकार कर दिया.

दी इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक याचिकाकर्ताओं के वकील सुधीर त्रिपाठी ने कहा, 

कोर्ट में अंडरटेकिंग दी गई कि बिना कोर्ट के आदेश के वीडियो को सार्वजनिक नहीं किया जाएगा. इसलिए, वीडियो के सीलबंद पैकेट कोर्ट में जमा किए जाएं. और जिन लोगों ने वीडियो लीक किया है उन पर कार्रवाई की जाए. पैकेट अभी भी सील हैं और हमने उन्हें नहीं खोला है.

अखबार ने सूत्रों के हवाले से बताया कि कोर्ट में 117 लोगों ने कमीशन की रिपोर्ट की कॉपी मांगी हैं.

बता दें कि ज्ञानवापी मस्जिद वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर से बिल्कुल सटी हुई है. दावा किया जा रहा है कि प्राचीन विश्वेश्वर मंदिर को तोड़कर उसके ऊपर ये मस्जिद बनाई गई थी. ये मामला 1991 से अदालत में है, लेकिन मां श्रृंगार गौरी का मामला महज 7-8 महीने पुराना है. 18 अगस्त, 2021 को 5 महिलाओं ने वाराणसी की एक अदालत में याचिका दायर कर मां श्रृंगार गौरी के मंदिर में पूजा-अर्चना की मांग की थी. इस याचिका को स्वीकार करते हुए अदालत ने श्रृंगार गौरी मंदिर की मौजूदा स्थिति को जानने के लिए एक कमीशन का गठन किया. इसी कड़ी में कोर्ट ने श्रृंगार गौरी की मूर्ति और ज्ञानवापी परिसर में वीडियोग्राफी कराकर सर्वे रिपोर्ट देने को कहा था.

वीडियो: ज्ञानवापी सर्वे के लीक हुए वीडियो में क्या दिखाई दिया?

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