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हनुमान नहीं, इस बार उत्तराखंड सरकार 25 करोड़ खर्च करके संजीवनी बूटी खोजेगी

तब हनुमान गए थे संजीवनी लाने. अब साइंटिस्ट जाएंगे.

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29 जुलाई 2016 (अपडेटेड: 28 जुलाई 2016, 05:05 AM IST)
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लाय सजीवन लखन जियाए श्री रघुबीर हरषि उर लाए
तुलसीदास रामचरित मानस में लिख गए हैं. बहुत साल पहिले. लक्ष्मण जब लड़ भिड़ के लंका में पड़े थे तो हनुमान संजीवनी बूटी लाए थे. हिमालय पर्वत से. वो कहानी फिर लिखी जाने वाली है. उत्तराखंड सरकार पूरे 25 करोड़ रुपए खर्च करेगी. साइंटिस्ट लोग 'द्रोणागिरि' पहाड़ पर बूटी खोजेंगे. और सुनो, ये काम इसी अगस्त से शुरू होना है. मीडिया को ये बात बताई है सुरेंद्र सिंह नेगी ने. नेगी उत्तराखंड के अल्टरनेटिव मेडिसिन हेल्थ मिनिस्टर हैं. दवाई वाला डिपार्टमेंट है ये भैया. बोले "भारत की पांच हजार साल पुरानी दवाई व्यवस्था है आयुर्वेद. पीएम नरेंद्र मोदी जिम्मा लिए हैं इसके उत्थान का. लेकिन इसके लिए चवन्नी देने से इंकार कर दिए. इसका पूरा खर्चा हमारी स्टेट वाली सरकार उठाएगी. हमको पूरा भरोसा है कि हम इसमें कामयाब होंगे. ढूंढना तो है ही. कोई झुट्ठई नहीं है." रामायण के हिसाब से द्रोणागिरि पर्वत और इसके आस पास का इलाका इस जादुई बूटी का हब है. ये चाइनीज बॉर्डर से लगा इलाका है. इसके आगे की कथा हम सुनाएंगे तो बतबढ़ हो जाएगी. खुद पढ़ लो लक्ष्मण मेघनाद युद्ध के बाद की दास्तान.

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