बीजेपी के लिए उत्तराखंड का दांव पिछली बार कांग्रेस के हाथों कमजोर पड़ गया था.पिछले साल 10 मई को हरीश रावत ने उत्तराखंड असेंबली में ट्रस्ट वोट जीत लिया था. औरराज्य में लगाए गया राष्ट्रपति शासन हटाना पड़ा था. जबकि उस समय बीजेपी अध्यक्ष अमितशाह ने कहा था कि "हम किसी भी कीमत पर उत्तराखंड को कांग्रेस मुक्त प्रदेशबनाएंगे." उस समय बीजेपी ने हरीश रावत पर विधायकों के खरीद फरोख्त का आरोप लगायाथा. पर इस समय हालात दूसरे हैं. इलेक्शन का वक्त है और बीजेपी का पूरा फोकस राज्यमें अपने आर्गेनाइजेशन को मजबूत करने का है. इसी के मद्देनजर पार्टी सभी 70विधानसभा की सीटों पर बूथ लेवल कमेटियां बना रही है.लेकिन एक समस्या है. विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी के पास वहां कोई चेहरा नहीं है,जिसके नाम पर पार्टी दांव खेल सके. वैसे तो पार्टी के पास चार ऐसे नेता हैं जोराज्य के मुख्यमंत्री रह चुके हैं. ये नाम हैं, बीसी खंडूरी, भगत सिंह कोश्यारी,रमेश पोखरियाल निशंक, विजय बहुगुणा. विजय बहुगुणा पिछले साल ही कांग्रेस छोड़करबीजेपी में शामिल हुए हैं. इनके अलावा भी नेता हैं बीजेपी में, जो मुख्यमंत्री पदके दावेदार हैं, जैसे अजय भट्ट, महारानी लक्ष्मी शाह, अजय टम्टा और सतपाल महाराज.कांग्रेस का क्या हाल है?कांग्रेस का सारा दारोमदार मौजूदा सीएम हरीश रावत पर है. दूसरे नंबर पर हैं प्रदेशकांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष किशोर उपाध्याय. अपने नेताओं के बागी तेवर कांग्रेस केलिए चिंता का विषय है. कांग्रेस के बड़े नेता यशपाल आर्य बीजेपी के संपर्क में हैं.यशपाल आर्य पार्टी से नाखुश चल रहे हैं. वो दो सीटों की मांग कर रहे थे. नैनीताल कीसीट अपने बेटे के लिए. और बाजपुर अपने लिए. कांग्रेस पार्टी के कद्दावर नेता औरउत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एन डी तिवारी भी बीजेपी के रडार पर हैं. अगर उनकेबेटे को लालकुआं या हल्द्वानी से टिकट मिल जाता है तो वो बीजेपी में शामिल हो सकतेहैं. मुख्यमंत्री पद के लिए किए गए इंडिया टुडे के सर्वे में बीसी खंडूरी 44% वोटके साथ सबसे ऊपर रहे. वहीं कांग्रेस के सबसे बड़े नेता और वर्तमान मुख्यमंत्री हरीशरावत 42% वोट के साथ दूसरे नंबर पर रहे.उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पद के लिए इंडिया टुडे का सर्वेउत्तराखंड दो क्षेत्रों में बंटा हुआ है, गढ़वाल और कुमाऊं. बीजेपी का मेन फोकसगढ़वाल क्षेत्र की 41 सीटों पर है. इसकी वजह ये भी है कि बीजेपी के ज्यादातर बड़ेनेता वहीं से आते हैं. पर सब कुछ इतना आसान भी नहीं है. क्योंकि इन नेताओं में सेज्यादातर नेता ऐसे हैं जो अपने रिश्तेदारों के लिए टिकट चाहते हैं. जबकि नरेंद्रमोदी की तरफ से "रिश्तेदारों को टिकट नहीं" का मंत्र दिया गया है. बीजेपी नेताकुंवर प्रणव सिंह 'चैंपियन' अपनी पत्नी के लिए टिकट मांग रहे हैं. बीजेपी केप्रवक्ता मुन्ना सिंह चौहान भी अपनी पत्नी के लिए टिकट की मांग कर रहे हैं. पूर्वविधानसभा स्पीकर हरवंश सिंह अपने बेटे के लिए देहरादून कैंट विधानसभा के लिएटिकट मांग चुके हैं. पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी के कद्दावर नेता बीसी खंडूरी भीअपनी अपनी बेटी रितु के लिए कर्णप्रयाग या यमकेश्वर से टिकट चाहते हैं.कुमाऊं में विधानसभा की 29 सीटें हैं. हरीश रावत की स्थिति यहां मजबूत है. पर वोगढ़वाल से भी इलेक्शन लड़ना चाहते हैं. जबकि कांग्रेस के बागी खेमे का हरीश रावत परशुरू से ही आरोप रहा है कि वो गढ़वाल क्षेत्र की अनदेखी कर रहे हैं. इस समय कांग्रेसका एक खास आधार है प्रदेश में. जिससे हरीश रावत अपने कद को मजबूत कर रहे हैं. राज्यके 50% से ज्यादा राजपूत कांग्रेस की तरफ हैं. मुसलमान और दलित जिनकी संख्या राज्यमें 32-35 फीसदी तक की है. परंपरागत तरीके से वो कांग्रेस को ही वोट करते आए हैं.बीजेपी का सारा ध्यान ब्राह्मण, वैश्य और पंजाबी वोटर्स को अपनी तरफ खींचने का है.इसके आलावा बीजेपी दलित वोटर्स को भी दलित-सम्मेलनों के द्वारा रिझाने में लगी है.दोनों ही खेमा चुनावी मैदान में उतरने को तैयार हैं. कांग्रेस ने अपने चुनावीरणनीतिकार प्रशांत किशोर को फिलहाल उत्तराखंड भेजा है. ताकि पार्टी वहां अपनीचुनावी रणनीति को आखिरी अंजाम तक पंहुचा सके. वहीं बीजेपी की तरफ से जेपी नड्डा औरधर्मेंद्र प्रधान को उत्तराखंड में पार्टी का इलेक्शन इंचार्ज बनाया गया है.-------------------------------------------------------------------------------- ये स्टोरी आदित्य प्रकाश ने की है--------------------------------------------------------------------------------ये भी पढ़ें:उत्तराखंड भाजपामय, लोग बोले नोटबंदी अच्छा फैसलाउत्तराखंड सर्वे: जहां सिर्फ बीजेपी-कांग्रेस की लड़ाई, देखिए वहां कौन जीत रहा