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इस राज्य में डेटिंग के चलते 20 लड़के जेल में, हाई कोर्ट में हुई बहस सबको जाननी चाहिए!

Uttarakhand Dating Jail: Uttarakhand High Court ने नोटिस जारी कर पूछा है कि जब नाबालिग लड़कों को उनकी महिला साथियों के साथ पाया गया, तो केवल उन्हें ही जेल में क्यों डाला गया?

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4 जुलाई 2024 (पब्लिश्ड: 12:03 PM IST)
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Uttarakhand HC ने Dating Jail मामलों को लेकर सवाल उठाए हैं. (फाइल फोटो: PTI)
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उत्तराखंड हाई कोर्ट (Uttarakhand High Court) ने नाबालिग लड़कों को जेल (Uttarakhand Dating Jail) में डाले जाने के मामले में केंद्र और राज्य सरकारों को नोटिस जारी किया है. हाई कोर्ट ने इस बात पर हैरानी जताई है कि 20 नाबालिग लड़के डेटिंग के लिए हल्द्वानी जेल में बंद हैं. इन नाबालिगों को उनकी फीमेल पार्टनर्स के साथ पाया गया था. इसके बाद पुलिस ने उन्हें जेल में डाल दिया. इस संबंध में वकील मनीष भंडारी ने एक जनहित याचिका डाली थी.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उत्तराखंड हाई कोर्ट की चीफ जस्टिस रितु बहारी और जस्टिस राकेश थापियाल की बेंच ने इस याचिका पर सुनवाई की. बेंच ने केंद्र और राज्य सरकारों से पूछा कि जब नाबालिग लड़कों को उनकी महिला साथियों के साथ पाया गया, तो केवल उन्हें ही जेल में क्यों डाला गया? वकील मनीष भंडारी ने भी अपनी याचिका में यही सवाल उठाया है कि आखिर सिर्फ लड़कों को ही क्यों जिम्मेदारा ठहराया गया है?

इस याचिका में कहा गया कि कई मामलों में जहां लड़कों की महिला साथी उनसे उम्र में बड़ी थीं, उन मामलों में भी लड़कों को ही हिरासत में लिया गया और फिर जेल में डाला गया. वकील मनीष भंडारी के मुताबिक, जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत लड़कों और उनके माता-पिता को काउंसलिंग के लिए भेजा जाना चाहिए था.

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याचिका में आगे कहा गया कि कानून के मुताबिक, लड़कों की मानसिक हालत के बारे में जानने के लिए एक बोर्ड का गठन होना चाहिए, ना कि उन्हें POCSO के तहत जेल में डाला जाना चाहिए. वकील मनीष भंडारी ने अनुरोध किया कि नाबालिग लड़कों को सीधे जेल भेजने की जगह उनकी काउंसलिंग होनी चाहिए.

इस संबंध में अंग्रेजी अखबार डेक्कन क्रॉनिकल ने एक संपादकीय लिखा है. इस संपादकीय में उत्तराखंड में पारित हो चुके समान नागरिक संहिता (UCC) का जिक्र किया गया है. संपादकीय में लिखा गया है कि UCC के तहत राज्य ने एक प्रावधान किया है कि लिव-इन पार्टनर्स को अपने रिलेशनशिप स्टेटस की जानकारी पुलिस को देनी होगी. अखबार लिखता है कि इस प्रावधान ने दो वयस्कों के बीच संबंधों को लगभग आपराधिक बना दिया है.

संपादकीय में आगे लिखा गया है कि जुवेनाइल जस्टिस एक्ट उन बच्चों के संरक्षण के लिए लाया गया था जो कानून के साथ टकराव में हो सकते हैं. अखबार आगे लिखता है कि नाबालिगों को उन कामों के लिए, जो बेहद ही मानवीय और सहज हैं, जेल में डालता मानव सभ्यता को अपमानित करना है. 

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