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UP में अब पुलिस बुलाने के लिए नया नंबर मिलाना पड़ेगा

तब भी पुलिस आएगी कि नहीं कौन जाने!

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22 अक्तूबर 2019 (अपडेटेड: 22 अक्तूबर 2019, 02:03 PM IST)
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अब पुलिस बुलाने के लिए 100 नहीं बल्कि 112 फोन नंबर मिलाना पड़ेगा, हालांकि चलेगा 100 नंबर भी लेकिन कब तक? ये नहीं पता
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उत्तर प्रदेश में अब इमरजेंसी पुलिस मदद चाहिए तो 100 की जगह 112 नंबर डायल करना होगा. 26 अक्टूबर से उत्तर प्रदेश पुलिस के इमरजेंसी हेल्पलाइन 100 नंबर को 112 नंबर में बदल दिया जाएगा. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 20 सितंबर को देश की पहली एकीकृत आपातकालीन प्रतिक्रिया सहायता प्रणाली (ERSS) लॉन्च की थी. उन्होंने चंडीगढ़ में सबसे पहले ये इमरजेंसी सेवा लॉन्च की थी. एम्बुलेंस, फायर और पुलिस के अलग-अलग नंबर याद रखने की जगह अब सिर्फ एक ही नंबर 112 से सभी इमरजेंसी सेवाओं की मदद ली जा सकेगी.


इमर्जेंसी नंबर अपडेट होने की सूचना
इमर्जेंसी नंबर अपडेट होने की सूचना

इमरजेंसी रिस्पॉन्स सपोर्ट सिस्टम के तहत 112 कॉमन नंबर से डायल नंबर 100 (पुलिस), 101 (दमकल) और 108 (स्वास्थ्य) सेवाओं को जोड़ दिया गया है. अब तक इमरजेंसी मदद के लिए 20 से अधिक आपात नंबर चल रहे थे. सितंबर में दिल्ली पुलिस का डायल 100 भी बदलकर 112 नंबर हो गया था. दिल्ली में 25 सितंबर को 112 नंबर लागू हुआ था. सभी इमरजेंसी सेवाएं जैसे एम्बुलेंस, फायर और पुलिस की मदद के लिए 112 नंबर डायल करना होगा.


# अब आएंगे इमर्जेंसी ऐप

बताया जा रहा है कि 26 अक्टूबर को 112 इमरजेंसी सर्विस सेवा का ऐप भी जारी किया जाएगा. एंबुलेंस सेवा के 108, विमन पावर लाइन के 1090 और सीएम हेल्पलाइन को भी 112 के साथ जोड़ दिया जाएगा. 112 सेवा में संबंधित इलाके के प्रभारी निरीक्षक द्वारा कार्रवाई पूरी करने के बाद उनके द्वारा ही पीड़ित की कॉल क्लोज की जाएगी. अभी तक मौक़े पर मौजूद पुलिस वाले ही कॉल क्लोज कर देते थे.


यूपी में लोगों को 100 नंबर मिलाने की आदत हो गई थी
यूपी में लोगों को 100 नंबर मिलाने की आदत हो गई थी

# 112 ही क्यों?

भारत के अलावा दुनियाभर के तक़रीबन 80 देशों में आपात सेवा का नंबर 112 है. 1972 में यूरोपियन कॉन्फ्रेंस ऑफ पोस्टल ऐंड टेलिकम्युनिकेशन (सीईपीटी) ने 112 नंबर को आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर बनाया था. टेलिफोन में 112 नंबर डायल करने में सबसे कम समय लगता है.

जब यूरोपियन देशों में 112 को इमरजेंसी नंबर बनाया था तब चलते थे चकरघिन्नी वाले फोन. वही जिनमें उंगली फंसा के डायल करते थे. उस वक़्त इसे इसलिए इमरजेंसी नंबर बनाया गया था क्योंकि ये डायल स्ट्रोक में सबसे कम समय लेते थे. मतलब घूमने में सबसे कम समय.


तब जो टेलीफोन आते थे उनमें 3 नंबर के पास ताले जैसा सिअतम भी हुआ करता था
तब जो टेलीफोन आते थे उनमें 3 नंबर के पास ताले जैसा सिअतम भी हुआ करता था

भारत में कुछ मोबाइल पावर बटन पैनिक की सुविधा भी देते हैं. इसमें होता ये है कि मोबाइल का पावर बटन लगातार तीन बार जल्दी-जल्दी दबाने से पैनिक कॉल अपने आप एक्टिव हो जाती है. और इमरजेंसी रिस्पॉन्स सेंटर को सूचना मिल जाती है. सरकार अब जिन ऐप्स को लाने जा रही है उससे अब लोग मोबाइल के अलावा सोशल मीडिया, ई-मेल और एसएमएस के जरिए भी डिस्ट्रेस कॉल कर सकेंगे.

# तब तक 100 नंबर पर भी मिलेगी मदद

इन सबके इतर लोगों की सुविधा को देखते हुए बताया गया है कि लोगों को 112 नंबर से परिचित होने में समय लगेगा, जिसकी वजह से 100 नंबर डायल करने पर भी कॉल रिसीव होगी और जवाब मिलेगा. माने कि अभी तत्काल 100 नंबर बंद नहीं हो रहा है.

# सोशल मीडिया क्या बोल रहा है

सोशल मीडिया पर लोग आड़ी तिरछी बातें कर रहे हैं. कुछ लोग कह रहे हैं कि इस भाजपा सरकार के पास कोई काम वाम तो है नहीं. योगी जी बिना मतलब ये सब कर रहे हैं. पहले नाम बदले और अब नंबर बदल रहे हैं. कुछ लोग कुतर्क को दो कदम और आगे बढ़ा दे रहे हैं. लोग कह रहे हैं कि योगी सरकार हमेशा दो कदम आगे चलती है इसलिए 100 नंबर में 2 भी जोड़ दिया गया है. हालांकि इन सारी बातों का कहीं तुक है नहीं. फिर भी बोलने वाले हैं तो बोल रहे हैं.

# उत्तर प्रदेश सरकार का दावा

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आपातकालीन सेवाओं के लिए सिंगल नंबर 112 के लॉन्च होने के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस और दूसरी एजेंसियों के रिस्पॉन्स टाइम में काफी कमी आएगी और सेवाओं में बेहद सुधार आएगा. नया सिस्टम डिस्ट्रेस कॉल को पहले से तेज़ और पहले से कहीं अधिक तेज़ी से सम्बंधित विभाग तक पहुंचाएगा. लोग 112 नंबर पर डायल करने के अलावा मोबाइल ऐप के जरिए भी आपदा में फंसे होने का संदेश पुलिस तक पहुंचा सकेंगे.




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