The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • News
  • Uttar Pradesh government refuses to accept water sent by central government from Madhya pradesh

बुंदेलखंड में पानी आया तो सरकार ने लौटा दिया

बुंदेलखंड में सूखा पड़ा है. केंद्र सरकार ने पानी की ट्रेन भेजी. उत्तर प्रदेश सरकार ने लौटा दी.

Advertisement
pic
5 मई 2016 (अपडेटेड: 5 मई 2016, 09:05 AM IST)
Img The Lallantop
फोटो - thelallantop
Quick AI Highlights
Click here to view more
  • अविनाश विवेक
अक्सर बड़े हाथियों की लड़ाई में घास कुचली जाती है. ऐसा ही कुछ हाल हुआ है बुन्देलखंड का. बुंदेलखंड के भयंकर सूखे से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने एक प्लान बनाया. ये प्लान बहुत कुछ वैसा ही था जैसा लातूर के सूखे से निपटने के लिए बनाया गया था. यानी कि ट्रेनों में भर भर कर पानी भेजा जाना था. लातूर में अभी तक लगभग 4 करोड़ लीटर पानी भेजा जा चुका है. ट्रेनों के जाने का सिलसिला बदस्तूर जारी है. इसी क्रम में यूपी सरकार को केंद्र सरकार ने ट्रेन में भरकर पानी भेजने की कोशिश की. इसमें रतलाम, मध्य प्रदेश से ट्रेन में पानी लादकर बुंदेलखंड की ओर रवाना किया गया. मगर केंद्र की ये कोशिश अखिलेश यादव और उत्तर प्रदेश सरकार को नागवार गुज़री. यूपी सरकार ने उस पानी को लेने से मन कर दिया. अब आलम ये है कि ट्रेन रतलाम से चलकर झांसी पहुंच चुकी है और झांसी में ही खड़ी है. उस ट्रेन में पड़े पांच लाख लीटर पानी का क्या होगा, राम जाने. इस मामले में बतकही शुरू हो चुकी है. अखिलेश सरकार का कहना है कि बुंदेलखंड के हालात लातूर जैसे नहीं हैं. कानपुर में यूपी के वॉटर रिसोर्स मिनिस्टर शिवपाल यादव ने कहा, ''हमने पानी की व्यवस्था की है. ट्रेन से भेजे गए पानी को स्टोर करने की जगह हमारे पास नहीं है.'' शिवपाल यहां तक कह गए  कि बुंदेलखंड में पानी की समस्या है ही नहीं. ऐसा उनहोंने तब कहा जब लातूर की ओर पहली ट्रेन रवाना होने के वक़्त बुंदेलखंड की ओर से भी पानी की मांग उठाई गयी थी. Bundelkhand 2011 की जनगणना के मुताबिक, बुंदेलखंड इलाके की कुल आबादी 1.83 करोड़ है. यहां पिछले तीन साल से भरपूर बारिश नहीं हुई है. जिसकी वजह से बुंदेलखंड में ज्यादातर तालाब और कुएं सूख चुके हैं. वहीं नदियों में भी पानी की भारी कमी हो चुकी है. किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ा है. और इलाके की ज्यादातर आबादी रोजगार की तलाश में दिल्ली, मुंबई, और लखनऊ का रुख कर चुकी है. कई केसों में महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग घर में रहते हैं, लेकिन कमाने वाले सभी युवा बाहर काम करते हैं. वहां से करीब 25 लाख से अधिक किसान अपनादूसरे राज्य में जा कर बसने लगे हैं. इसी तरह का मामला कुछ दिन पहले हमें तब देखने को मिला था जब फ़िल्म डायरेक्टर नीरज घेवान ने अपने फेसबुक पोस्ट द्वारा हमें महाराष्ट्र के किसानों की हालत दिखाई थी. वहां भी किसान लातूर, नांदेड़ और आस पास की जगहों से अपना घर छोड़ मुंबई के ही आस पास टेम्परेरी तौर पर बस गए थे. यूपी के मुख्य सचिव आलोक रंजन ने कहा है कि फिलहाल वॉटर ट्रेन की जरूरत नहीं है. अगर होगी तो केंद्र से कहेंगे. उन्होंने कहा कि सरकार ने 400 टैंकर ख़रीदे हैं और वहां तालाबों में पानी भरकर सप्लाई की जा रही है. खाने का समान अप्रैल महीने में ही बांटा जा चुका है. इतना ही नहीं तीन साल से सूखे की वजह से जल स्तर काफी नीचे चला गया है जिसकी वजह से ट्यूबवेल दोबारा खुदवाए जा रहे हैं. एसपी के प्रवक्ता सीपी राय ने कहा, ''हमने खुद गांवों में पानी के इंतजाम किए हैं. वाटर ट्रेन भेजना सिर्फ केंद्र की नौटंकी है.'' bundlkhand सरकार ने सूखे से निपटने के लिए पर्याप्त इंतज़ाम कर रखे हैं. यूपी और मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड में आने वाले 13 जिले भयंकर सूखे की चपेट में हैं. सात मई को यूपी के सीएम दिल्ली में पीएम से मुलाकात करने वाले हैं. यूपी सरकार ने अपने बजट में बुंदेलखंड के विकास और सूखा राहत के लिए 1400 करोड़ का पैकेज दिया है.

Advertisement

Advertisement

()