जर्मनी से क्यों खिसियाए ट्रंप? 5 हजार अमेरिकी सैनिकों को वापस बुला लिया
जर्मनी के रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस ने इस खबर पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जर्मनी को US द्वारा सेना वापस बुलाए जाने की आशंका पहले से ही थी, और अब यूरोपीय देशों को अपनी सुरक्षा की जिम्मेदारी खुद उठानी चाहिए.

अमेरिका ने जर्मनी में मौजूद अपने 5 हजार सैनिकों को वापस बुलाने का फैसला किया है. ये फैसला ऐसे समय में आया है जब यूरोप और अमेरिका में ईरान जंग को लेकर विवाद बढ़ते जा रहे हैं. पेंटागन के इस फैसले की टाइमिंग भी गजब है. कुछ ही दिनों पहले जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने कहा था कि जंग को खत्म करने के लिए चल रही बातचीत में ईरान लगातार अमेरिका को जलील कर रहा है. पेंटागन ने इस फैसले पर जानकारी देते हुए बताया कि अगले एक साल के अंदर सैनिकों की वापसी की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी.
पेंटागन प्रवक्ता सीन पर्नेल ने एक बयान जारी कर कहा,
European Allies से खुश नहीं हैं Trump?हमें उम्मीद है कि सैनिकों की वापसी का काम अगले 6 से 12 महीनों के अंदर पूरा कर लिया जाएगा. अमेरिका के रक्षा विभाग ने यूरोप में सैनिकों की मौजूदगी की समीक्षा की थी. उसके बाद ये फैसला लिया गया है. यह फैसला क्षेत्र की जरूरतों और जमीनी हालात को ध्यान में रखते हुए लिया गया है.
राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप और यूरोप के बीच सब ठीक नहीं है. जब से ईरान की जंग शुरू हुई है, तब से यूरोपीय देश इस जंग के पक्ष में नहीं हैं. इस बीच ट्रंप ने यूरोपीय सहयोगियों पर ईरान के खिलाफ जंग में मदद न करने के लिए तीखी आलोचना भी की. ट्रंप ने कहा कि वह उन यूरोपीय देशों से अपनी सेना वापस बुलाने पर विचार कर रहे हैं, जिनके बारे में उन्हें लगता है कि उन्होंने ईरान की जंग में साथ नहीं दिया. अमेरिकी मीडिया आउटलेट 'पॉलिटिको' ने रिपोर्ट किया था कि यूरोपीय देशों से सेना वापस बुलाने की ट्रंप की धमकियों से सेना भी हैरान है.

वहीं रॉयटर्स के मुताबिक जर्मनी के रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस ने इस खबर पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जर्मनी को पहले से आशंका थी कि US सेना वापस बुलाएगा. ऐसे में यूरोपीय देशों को अब अपनी सुरक्षा की जिम्मेदारी खुद उठानी चाहिए. पिस्टोरियस ने कहा कि इस मामले में जर्मनी सही रास्ते पर है. उन्होंने अपनी सेना के विस्तार, बड़ी मात्रा में सेना के साजो-सामान की तेज खरीददारी और इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास पर जोर देने की बात कही. कुल जमा बात ये है कि ईरान की जंग से दुनिया भर में पावर बैलेंस शिफ्ट होता दिख रहा है. अमेरिका का साथ उसी के सहयोगी नहीं दे रहे.
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