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अमेरिका ने तेल ले जा रहे रूसी जहाज को बीच रास्ते जब्त कर लिया

जिस जहाज को जब्त किया गया, उसका पुराना नाम बेला-1 था और अब वह मारिनेरा के नाम से पंजीकृत है. अमेरिकी यूरोपीय कमांड के अनुसार, बुधवार को इस टैंकर को एक संघीय अदालत के वॉरंट के आधार पर अमेरिकी नियंत्रण में लिया गया. अदालत ने यह वॉरंट अमेरिकी प्रतिबंधों के उल्लंघन के आरोप में जारी किया था.

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अमेरिका पिछले महीने से इस टैंकर का पीछा कर रहा था. (Image: X/ @US_EUCOM)
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सौरभ
7 जनवरी 2026 (Updated: 7 जनवरी 2026, 11:49 PM IST)
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अमेरिका ने उत्तरी अटलांटिक महासागर में एक रूसी झंडे वाले तेल टैंकर को जब्त कर लिया है. यह टैंकर वेनेजुएला से जुड़ा था. इस पूरे ऑपरेशन को ब्रिटेन की जानकारी और मंजूरी के साथ अंजाम दिया गया. इस घटना पर रूस ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है. रूस के परिवहन मंत्रालय ने कहा है कि किसी भी देश को दूसरे देश के अधिकार क्षेत्र में पंजीकृत जहाजों के खिलाफ बल प्रयोग करने का अधिकार नहीं है.

इस बीच, व्हाइट हाउस के उप प्रमुख स्टीफन मिलर ने कहा कि केवल वही समुद्री ऊर्जा परिवहन अनुमति पाएगा जो अमेरिकी कानून और राष्ट्रीय सुरक्षा के अनुरूप होगा.

जिस जहाज को जब्त किया गया, उसका पुराना नाम बेला-1 था और अब वह मारिनेरा के नाम से पंजीकृत है. अमेरिकी यूरोपीय कमांड के अनुसार, बुधवार को इस टैंकर को एक संघीय अदालत के वॉरंट के आधार पर अमेरिकी नियंत्रण में लिया गया. अदालत ने यह वॉरंट अमेरिकी प्रतिबंधों के उल्लंघन के आरोप में जारी किया था.

अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि यह अभियान अमेरिकी कोस्ट गार्ड और अमेरिकी सेना ने मिलकर चलाया. इसमें ब्रिटेन की भूमिका भी अहम रही. इस ऑपरेशन के लिए ब्रिटेन के एयरबेस का इस्तेमाल किया गया और रॉयल एयर फोर्स के निगरानी विमानों ने आइसलैंड और ब्रिटेन के बीच के समुद्री क्षेत्र में टैंकर पर नजर रखी.

अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, इस टैंकर पर कई हफ्तों से नजर रखी जा रही थी. टैंकर ने अमेरिकी समुद्री “ब्लॉकेड” से बचने की कोशिश की थी, बार-बार कोस्ट गार्ड के बोर्डिंग अनुरोध को ठुकराया और अपना झंडा और पंजीकरण बदलकर कार्रवाई से बचने का प्रयास किया. इस दौरान रूस के नौसैनिक जहाज, जिनमें एक पनडुब्बी और अन्य युद्धपोत शामिल बताए गए, टैंकर के मार्ग के पास सक्रिय थे. हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों ने यह स्पष्ट नहीं किया कि रूसी जहाज टैंकर से कितनी दूरी पर थे.

यह कार्रवाई आइसलैंड के पास की गई और इससे मॉस्को के साथ तनाव बढ़ने का खतरा भी बना रहा.

रॉयटर्स के मुताबिक, बेला-1 नाम से चल रहा यह टैंकर पिछले महीने पहली बार अमेरिकी कोस्ट गार्ड के संपर्क में आया था. उस समय भी जहाज ने अमेरिकी अधिकारियों को बोर्डिंग की अनुमति नहीं दी थी. बाद में इसने खुद को रूसी झंडे के तहत फिर से पंजीकृत कर लिया और इसका नाम मारिनेरा हो गया.

यह टैंकर उन जहाजों में शामिल है जिन पर राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के नेतृत्व में वेनेजुएला के खिलाफ ऑपरेशन के तहत कार्रवाई की जा रही है. इस अभियान में वेनेजुएला से जुड़े तेल शिपमेंट पर सख्ती से अमेरिकी प्रतिबंध लागू किए जा रहे हैं. इसके अलावा, अमेरिकी कोस्ट गार्ड ने लैटिन अमेरिका के समुद्री क्षेत्र में वेनेजुएला से जुड़े एक और तेल टैंकर को भी रोका है.

यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब कुछ दिन पहले अमेरिकी विशेष बलों ने कराकस में तड़के एक ऑपरेशन कर वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हिरासत में लिया था. इसके बाद मादुरो को अमेरिका ले जाया गया, जहां उन पर कथित ड्रग तस्करी से जुड़े मामलों में मुकदमा चलाया जाना है.

वेनेजुएला के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस कार्रवाई की कड़ी निंदा की है. उन्होंने मादुरो की गिरफ्तारी को अपहरण बताया और अमेरिका पर वेनेजुएला के विशाल तेल भंडार पर कब्जा करने की कोशिश का आरोप लगाया. 

वीडियो: अमेरिका के डेल्टा फ़ोर्स ने निकोलस मादुरो को बंदी बनाया, जानिए कैसे काम करता है ये फ़ोर्स?

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