अमेरिका में बवाल जारी है. ट्रंप कोई फैसला ले रहे हैं, जनता उसके खिलाफ़ सड़क पर आरही है, कोर्ट उसके किसी हिस्से पर रोक लगा रहा है. कुल मिलाकर डेमोक्रेसी का भरपूरआनंद आ रहा है. अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की एक बात अच्छीहै. उन्होंने मुसलमानों के प्रति अपनी घृणा को कभी नहीं छिपाया है. डंके की चोट परवो कहते आए हैं कि मुसलमानों से उन्हें नफ़रत है. उनके चुनावी वादों में मुसलमानोंको अमेरिका में ना घुसने देने की बात प्रमुखता से उछलती रही है. अब सत्ता हाथ मेंआने के बाद उन्होंने जो सबसे पहला काम किया है वो यही है. इस लिहाज़ से कोई चाहे तोउन्हें ‘अपने वादों पर खरा उतरने वाला आदमी’ कहके उनकी पीठ ठोंक सकता है. डोनाल्डट्रंप ने सात मुस्लिम देशों के नागरिकों के अमेरिका में घुसने पर प्रतिबंध लगा दियाहै. ये सात देश हैं इराक, ईरान, सीरिया, यमन, सोमालिया, सूडान और लीबिया. शुक्रवारको ट्रंप ने इस आदेश पर साइन किए. ये बैन फिलहाल चार महीने के लिए है. इसके अलावापाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान और सऊदी अरब से वीजा अप्लाई करने वालों की पहले सख्त पड़तालहोगी और उसके बाद ही, अगर मामला अमेरिकी मानकों पर ठीक-ठाक पाया गया तो, उन्हेंएंट्री मिलेगी. ट्रंप ने इस सिलसिले में जो एग्जीक्यूटिव ऑर्डर साइन किया है उसकानाम है ‘प्रोटेक्शन ऑफ़ दी नेशन फ्रॉम फॉरेन टेररिस्ट एंट्री इन टू दी यूनाइटेडस्टेट्स’. ट्रंप ने ऑर्डर साइन करने के बाद कहा, “हम इस्लामिक आतंकवादियों कोअमेरिका से बाहर रखने के लिए नए नियम बना रहे हैं. हम उन्हें यहां नहीं चाहते. हमये सुनिश्चित करना चाहते हैं कि हमारे सैनिकों के लिए ख़तरा बने लोगों को हम हमारेमुल्क में घुसने न दें.” इसके अलावा सभी तरह के शरणार्थियों की यूएस एंट्री पर भीबैन लगा दिया गया था. न्यूयॉर्क के पूर्वी जिले के फेडरल कोर्ट ने शरणार्थियों केनिर्वासन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है. अब अमेरिका में रह रहे शरणार्थियों कोजबरन बाहर नहीं भेजा जा सकेगा. इससे उन शरणार्थियों को राहत मिली है जो इस फैसले कीचपेट में आ कर अमेरिकी एयरपोर्ट पर फंसे हुए हैं. न्यूयॉर्क के जेएफके एयरपोर्ट पर12 रिफ्यूजीज़ को डिटेन कर के रखा गया था. ट्रंप के इस फैसले के खिलाफ़ पूरे अमेरिकामें असंतोष की लहर फ़ैल गई है और लोग इसका जगह जगह विरोध कर रहे हैं. ट्रंप की इसघोषणा से और इसके तत्काल प्रभाव से दुनियाभर के हवाई अड्डों पर अफरातफरी का माहौलरहा. इन सात देशों के अमेरिका जाने वाले नागरिकों के पास वैलिड वीजा होने के बावजूदउन्हें प्रवेश नकारा गया. कैरो से न्यूयॉर्क जाने वाली इजिप्ट एयर की फ्लाइट में सेपांच इराक़ी और एक यमन के नागरिक को उतार दिया गया. बाद में उन्हें उनके देश वापसभेज दिया गया. ट्रंप के इस कदम की दुनियाभर में आलोचना शुरू हो गई है. फेसबुक केसंस्थापक मार्क जुकरबर्ग ने फेसबुक पर लिखा ‘माना हमें देश को सुरक्षित रखना हैलेकिन ये हमें उन लोगों पर फोकस करके करना होगा जो असल में देश के लिए ख़तरा हैं. इसक़ानून के दायरे में बेगुनाह लोगों को भी लाने से अमेरिकन्स ‘कम सुरक्षित’ होंगे’.उन्होंने ये भी कहा कि हमें शरणार्थियों और ज़रूरतमंदों के लिए अपने दरवाज़े खुलेरखने चाहिए. देखिये मार्क जुकरबर्ग की फेसबुक पोस्ट गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने भीट्रंप के इस कदम की निंदा की है. उन्होंने कहा कि ट्रंप के इस फैसले से प्रतिभाओंके अमेरिका पहुंचने में दिक्कतें आएंगी. इस फैसले पर अफ़सोस जताते हुए उन्होंने अपनेलगभग 100 कर्मचारियों को उनके देश लौटने का आदेश दे दिया है. इसके अलावा पाकिस्तानकी मलाला युसुफज़ई ने भी ट्रंप के इस फैसले पर दुःख जताया है. ख़ास तौर सेशरणार्थियों के प्रवेश के रोक पर. मलाला ने कहा कि वो इस निर्णय से बहुत दुखी हैं.मलाला बोली “राष्ट्रपति ट्रंप हिंसा और युद्ध पीड़ित देशों से जान बचाकर भाग रहेबच्चों, माताओं और पिताओं के लिए दरवाज़े बंद कर रहे हैं. मैं उनसे अनुरोध करती हूंकि वो दुनिया के सबसे असहाय बच्चों की ओर से मुंह न मोड़े.” डोनाल्ड ट्रंप के इसफैसले से धर्म के नाम पर दुनिया को दो फाड़ करने की मानसिकता को और भी बल मिलेगा.धर्म देख कर सारे काम किए जाने लगे तो वो एक भयावह स्थिति होगी. इस फैसले की आलोचनातो होती रहेगी, ये भी देखना ज़रूरी है कि इसमें इस्लाम के लिए एक गंभीर चेतावनीनिहित है. अगर मज़हब के नाम पर खूंरेजी का दौर जारी रहा तो जल्द ही पूरी दुनिया मेंउनके अलग-थलग पड़ने का ख़तरा मंडरा रहा है. ये वक़्त विरोध और आत्मनिरीक्षण दोनों काहै.--------------------------------------------------------------------------------ये भी पढ़िएभारत का मुसलमान क्यों दुनिया के मुसलमानों से ज्यादा समझदार है!आई थी अवॉर्ड लेने, राष्ट्रपति को धो गई ये एक्ट्रेस!इस कॉमेडियन ने ट्रंप के बेटे से कहा, 'मैं मुसलमान हूं और किसी से नहीं डरता'