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ज़वाहिरी जिस मिसाइल से मरा, वो बिना ब्लास्ट किये जिंदा इंसान को लाश बना देती है!

आगे ब्लेड लगी होती है, आसपास वालों को कोई नुकसान नहीं होता!

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2 अगस्त 2022 (अपडेटेड: 2 अगस्त 2022, 05:34 PM IST)
Al-Jawahiri
अल-जवाहिरी की वीडियो का स्क्रीन ग्रैब और ताइपेई में प्रदर्शनी के दौरान Hellfire के प्रोटोटाइप की तस्वीर. (AFP)
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अमेरिका ने अल-कायदा चीफ अल-जवाहिरी को मार गिराया है. अमेरिका की केंद्रीय खुफ़िया एजेंसी (CIA) ने जवाहिरी के घर को निशाना बनाकर और उसे मिसाइल दाग मार गिराया. न्यूज़ एजेंसी AFP की रिपोर्ट के मुताबिक जवाहिरी के काबुल वाले घर पर दो मिसाइल दागी गई. लेकिन सवाल ये उठ रहे हैं कि दो मिसाइल दागने के बाद भी तस्वीरों में कोई धमाका क्यों नहीं दिख रहा है. अमेरिका ने ये दावा भी किया है कि इस हमले में जवाहिरी के अलावा किसी और को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है.

कौन-सी मिसाइल से मरा Al Zawahiri?

इंडिया टुडे के अभिषेक भल्ला की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका ने जवाहिरी को मारने के लिए मैकाब्रे हेलफायर R9X मिसाइल का इस्तेमाल किया. इस मिसाइल में 6 रेजर जैसे ब्लेड से लगे होते हैं. ये मिसाइलें विस्फोट नहीं करती, बल्कि टारगेट पर जाकर चाकू जैसी ब्लेड से सटीक हमला करती है. यही वजह है कि इससे टारगेट के अलावा किसी और को कोई नुकसान नहीं पहुंचता.

यह भी पढ़े: अमेरिका की CIA ने अल-कायदा चीफ ज़वाहिरी को मिसाइल से मार दिया, काबुल के एक घर में छुपा था

हेलफायर R9X को 'फ्लाईंग जिन्सू' (Flying Ginsu) भी कहते हैं. सरल शब्दों में कहें तो उड़ता हुआ चाकू. पिछले कुछ समय से आतंकियों की टारगेटेड किलिंग के लिए ये अमेरिका की पसंदीदा मिसाइल बन गई है. क्योंकि विस्फोटक ना होने की वजह से इससे किसी और को कोई नुकसान नहीं होता.

अभिषेक भल्ला की रिपोर्ट के मुताबिक, R9X पहली बार मार्च 2017 में सामने आई थी, जब कार में बैठे अल-कायदा के सरगना अबू अल-खैर अल-मसरी को सीरिया में एक ड्रोन हमले में मार गिराया गया था. हालांकि, ना तो पेंटागन और ना ही CIA ने इस बात को कभी सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया. इसके बाद जब अमेरिका ने 2020 में सीरिया में अल-कायदा के एक ट्रेनर को निशाना बनाया तब भी इसी मिसाइल का इस्तेमाल किया गया. रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका ने 2019 में भी इस घातक हथियार का इस्तेमाल किया था.

Hellfire R9X

दी वीक की रिपोर्ट के मुताबिक ये एक सबसोनिक लेज़र गाइडेड मिसाइल है. यानी ये ध्वनि (साउंड) की रफ्तार से धीरे चलती है और लेजर की मदद से इसका निशाना लगाया जाता है. ये मिसाइल हवा से जमीन पर वार करती है. इसके अंदर टैंक को ध्वस्त करने की भी क्षमता होती है. हेलफायर मिसाइल के कई वेरिएंट होते हैं, जो इसके वॉरहेड, गाइडेंस सिस्टम और मॉडल के मुताबिक अलग अलग होते हैं. हेलफायर मिसाइलों का नया और बेजोड़ मॉडल है हेलफायर R9X. R9X को टारगेट हत्याओं के लिए डिज़ाइन किया गया है. ये मिसाइल टारगेट पर ब्लेड से वार करती है. दुबई के टीवी चैनल, अल अरबिया के मुताबिक, ईरानी जनरल कासिम सुलेमानी की हत्या के लिए भी हेलफायर R9X का इस्तेमाल किए जाने की संभावना है.

इसके अलावा, वॉल स्ट्रीट जर्नल के मुताबिक R9X को कथित तौर पर ओबामा के राष्ट्रपति शासनकाल के दौरान बनाया गया था. इस मिसाइल को बनाने के पीछे सोच थी कि टारगेट के अलावा आम नागरिकों को कम नुकसान पहुंचे. R9X को निंजा बम भी कहा जाता है और इसका वजन लगभग 45 किलो है. इस मिसाइल को हेलिकॉप्टर, ड्रोन या एयरक्राफ्ट से भी लॉन्च किया जा सकता है. इस मिसाइल को 500 मीटर से 11 किलोमीटर तक के टारगेट को खत्म करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है.

वीडियो: अमेरिका के ड्रोन हमले में अल कायदा चीफ अल-जवाहिरी मारा गया, काबुल में छिपा बैठा था

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