सीजफायर खत्म होने से पहले पीस डील की कोशिश, US-ईरान के बीच इसी हफ्ते हो सकती है मीटिंग
Iran-US New Talks For Peace Deal: 11 अप्रैल को इस्लामाबाद टॉक्स फेल होने के बाद अनुमान है कि जल्द दोबारा बैठक हो सकती है. अमेरिका का मानना है कि पहली बैठक में ईरान उनकी शर्तों के आगे झुक रहा था, उम्मीद है इस बार वो मान लेगा.

अमेरिका और ईरान के बीच गुरुवार 16 अप्रैल को शांति समझौते पर एक और बैठक हो सकती है. अमेरिकी मीडिया ने दावा किया है कि 'इस्लामाबाद टॉक्स' फेल होने के बावजूद दोनों पक्ष शांति बहाल करने पर विचार कर रहे हैं. अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने भी 'डील लॉक' करने की इच्छा जताई है. बैठक की लोकेशन पर अभी संदेह बना हुआ है.
CNN ने सूत्रों के हवाले से लिखा कि कुछ अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि दोनों पक्ष बातचीत के लिए तैयार हो रहे हैं. अनुमान है कि इस बार की बैठक इस्लामाबाद या फिर जेनेवा में हो सकती है. जगह अभी तय नहीं है, लेकिन तारीख लगभग तय मानी जा रही है. ये रिपोर्ट प्रेसिडेंट ट्रंप के उस बयान के बाद आई है, जिसमें उन्होंने कहा, 'ईरान ने सामने से डील के लिए बोला है, वो वाकई डील करना चाहते हैं.'
11 अप्रैल को ‘इस्लामाबाद टॉक्स’ फेल होने के बाद अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने बताया कि बैठक पूरी तरह विफल नहीं थी. उन्होंने बताया कि ईरान पीस डील करना चाहता है. इसलिए वो अमेरिका की कई शर्तें मानने को भी तैयार है. उन्होंने इसे अच्छा संकेत बताया है. अमेरिका अब होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों की नाकाबंदी की बात कर रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक़, ये ईरान पर प्रेशर बनाने की कोशिश है. लेकिन तेहरान ने भी अपना स्टैंड क्लियर कर दिया है.
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अपने X हैंडल से पोस्ट कर लिखा,
‘बीते 47 सालों में पहली बार ऐसा हुआ कि ईरान जंग ख़त्म करने के लिए अमेरिका के साथ इतनी सहजता से टेबल पर आया था. लेकिन इस्लामाबाद में डील होने से पहले ही नाकाबंदी की खबर आ गई. आपने (अमेरिका) अपनी गलतियों से कुछ नहीं सीखा. अच्छा चाहोगे तो अच्छा होगा, बुरा चाहोगे तो बुरा.’
अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में 21 घंटे बातचीत चली, लेकिन कोई निष्कर्ष नहीं निकला. अमेरिकी डेलीगेशन को उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरानी डेलीगेशन को वहां की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर कालिबाफ लीड कर रहे थे. लेकिन परमाणु हथियार पर आकर बात रुक गई. अमेरिका ईरान को न्यूक्लियर संपन्न देश नहीं बनने देना चाहता है. वहीं ईरान अपने न्यूक्लियर एनरिचमेंट प्रोग्राम रोकने या परमाणु हथियार न बनाने को लेकर कोई ठोस कमिटमेंट नहीं दे रहा है. सीजफायर की डेडलाइन 21 अप्रैल को खत्म हो रही है, इसलिए उससे पहले डील करने की कोशिश है.
एक रिपोर्ट में ये भी दावा किया गया कि पाकिस्तान एक बार फिर खुद को होस्ट बनाना चाहता है. पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने कहा है कि इस्लामाबाद में हुई बातचीत के बाद कोई नया नुकसान नहीं हुआ है. ये एक अच्छा संकेत है. पाकिस्तान चाहता है कि गल्फ रीजन में जल्द से जल्द शांति बहाल हो.
वीडियो: एक तरफ इस्लामाबाद में शांति वार्ता, दूसरी तरफ इजरायल का लेबनान पर ताबड़तोड़ हमला

