The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • News
  • U.S. intelligence says Iran’s regime is consolidating power

ईरान युद्ध में ट्रंप की हार तय? रिपोर्ट में दावा, तबाही के बावजूद मजबूत होगा इस्लामिक शासन

डॉनल्ड ट्रंप का दावा है कि अमेरिकी हमलों ने ईरान की आर्मी की कमर तोड़ दी है, उसे कमजोर कर दिया है. लेकिन उनके ही देश की खुफिया एजेंसियों को ऐसा नहीं लगता.

Advertisement
mojtaba khamenei donald trump
मोजतबा खामेनेई (दायें) और डॉनल्ड ट्रंप (बाएं) (फोटोः India Today)
pic
राघवेंद्र शुक्ला
17 मार्च 2026 (अपडेटेड: 17 मार्च 2026, 10:57 PM IST)
font-size
Small
Medium
Large
font-size
Small
Medium
Large
whatsapp share

‘ईरान को दोपहर तक तबाह करने’ का दावा करने वाले डॉनल्ड ट्रंप के तेवर क्या अब ढीले पड़ने लगे हैं? सोमवार को उन्होंने दो बार कहा कि खाड़ी देशों पर ईरान के हमले ने उन्हें चौंका दिया था. उन्होंने या किसी ने भी इसके बारे में कभी नहीं सोचा था. हालांकि, ऐसा नहीं है कि ट्रंप का यही एक आकलन गलत हुआ है. अमेरिकी खुफिया रिपोर्टों में जो बातें सामने आ रही हैंं, उससे लगता है कि ईरान से जंग ट्रंप के लिए ‘ढाक के तीन पात’ साबित होने वाली है.

द वॉशिंगटन पोस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, दो हफ्तों से ज्यादा समय तक लगातार हवाई हमलों के बावजूद ट्रंप ईरान के शासन तंत्र का बहुत ज्यादा कुछ बिगाड़ नहीं पाए हैं. अमेरिका की खुफिया एजेंसियों का मानना है कि फिलहाल ईरान की सरकार बनी रहेगी. वह कमजोर जरूर होगी लेकिन इस जंग के बाद और मजबूती के साथ जमेगी. ये भी हो सकता है कि जब युद्ध खत्म हो तब ईरान में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) का कंट्रोल और बढ़ जाए.

28 फरवरी 2026 से चल रही इस जंग में अमेरिका और इजरायल की सेना ने अब तक ईरान की मिसाइल ताकत और नेवी को ध्वस्त कर दिया है. उनके सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामनेई की मौत हो गई. सेना और खुफिया विभाग के कई बड़े अधिकारी भी मारे गए. लेकिन इसी बीच ईरान ने न सिर्फ अपना नया सुप्रीम लीडर चुना बल्कि जवाबी हमलों के साथ होर्मुज स्ट्रेट का ट्रैफिक रोककर अमेरिका पर शिकंजा कसने की कोशिश भी कर रहा है.

उधर अमेरिका के लिए ये जंग अब लगातार महंगी साबित हो रही है. इस युद्ध में अमेरिका अब तक कम से कम 12 अरब डॉलर खर्च कर चुका है. साथ ही 13 अमेरिकी सैनिकों को भी गंवा चुका है. युद्ध के मकसद को लेकर अमेरिका के बदलते दावों में एक ईरान में सत्ता परिवर्तन भी था, लेकिन लगता नहीं है कि अमेरिका को ये लक्ष्य हाल-फिलहाल हासिल होने वाला है.

वॉशिंगटन पोस्ट के मुताबिक, एक्सपर्ट्स का मानना है कि अभी ईरान में सरकार बदलने या लोकतांत्रिक शासन आने की कोई संभावना नहीं दिख रही है. अखबार ने अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट्स के हवाले से बताया कि ईरान में अभी जो सुप्रीम लीडर की सरकार है वो बनी रह सकती है. बल्कि युद्ध के बाद वो खुद को और ज्यादा मजबूत महसूस कर सकती है, क्योंकि वह ट्रंप और बेंजामिन नेतन्याहू के आगे झुकी नहीं. उनका सामना किया और उनसे बच भी गई. ये एक मनोवैज्ञानिक बढ़त होगी जो ईरानी शासन को जंग के खत्म होने के बाद मिलेगी. इससे उसकी दावेदारी को पहले से ज्यादा शक्ति मिलने की संभावना है.

एक यूरोपीय अधिकारी का कहना है कि जंग के बाद ईरान में IRGC का ही शासन होगा. भले ही वो पहले से थोड़ा कमजोर होगा लेकिन उसके पास कुछ परमाणु और मिसाइल क्षमता होगी. 

अमेरिका के लिए फिलहाल मुश्किल ये भी है कि उसके सहयोगी खाड़ी देश भी उससे नाराज हैं. क्योंकि ईरान उन पर मिसाइल और ड्रोन से जवाबी हमले कर रहा है. वो कह रहे हैं कि इजरायल और अमेरिका ने मिलकर जंग शुरू की और अब ईरान के हमलों का सामना करने के लिए उन्हें अकेले छोड़ दिया. उनसे कहा गया था कि युद्ध जल्दी खत्म हो जाएगा. लेकिन दो हफ्तों के बाद भी अभी इसके खत्म होने के आसार नहीं हैं. 

खाड़ी देशों की इस नाराजगी की छाया ट्रंप के उस बयान में देखी जा सकती है, जिसमें वो कहते हैं कि ईरान के खाड़ी देशों पर हमले से वो चौंक गए थे. ट्रंप दावा करते हैं कि वो इसकी उम्मीद नहीं कर रहे थे, लेकिन अमेरिकी अधिकारियों के दावे उनके बयान को खारिज करते हैं. रॉयटर्स ने एक अमेरिकी अधिकारी और अमेरिकी खुफिया रिपोर्टों को जानने वाले सूत्रों के हवाले से बताया कि ट्रंप को पहले ही चेतावनी दी गई थी कि ईरान पर हमला करने से खाड़ी में अमेरिका के सहयोगी देशों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई हो सकती है. इसे सिर्फ आकलन की तरह नहीं बताया गया था बल्कि ये गारंटी भी दी गई थी कि ईरान खाड़ी देशों पर हमले करेगा ही करेगा.  

इतना ही नहीं, खुफिया एजेंसियों ने ट्रंप को ये भी पहले ही बता दिया था कि अगर जंग हुई तो IRGC और मजबूत हो सकती है. जाहिर है, ट्रंप ने युद्ध के आगे किसी की नहीं सुनी और अब इस जंग से उपजी परेशानियों की जद में पूरी दुनिया आ गई है. 

वीडियो: Pakistan Afghanistan Conflict: पाकिस्तान और अफगानिस्तान जंग की वजह क्या है?

Advertisement

Advertisement

()