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‘मिडिल ईस्ट का गुंडा मर चुका है’, ये बोलकर ट्रंप ने ईरान को बड़ी धमकी दे दी

US के राष्ट्रपति Donald Trump एक बार फिर Iran पर हमला करने का संकेत दे रहे हैं. दरअसल, ईरान-अमेरिका दोनों ही अब तक एक-दूसरे की शर्तें नहीं मान पाए हैं. सीजफायर के बाद भी दोनों देश एक-दूसरे के खिलाफ हमले कर रहे हैं.

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10 जून 2026 (अपडेटेड: 10 जून 2026, 07:38 PM IST)
Iran War Update
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप (बाएं) और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान (दाएं). (फोटो-आजतक)
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अमेरिका और ईरान की शांतिवार्ता किसी काम की साबित नहीं हुई. सीजफायर के बाद कई दिनों तक चली बातचीत के बाद दोनों देशों ने फिर एक-दूसरे पर हमले शुरू कर दिए हैं. अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने तो पूरा मोर्चा खोलने का साफ संकेत दे दिया है. ट्रूथ सोशल पर उन्होंने अपनी झल्लाहट दिखाते हुए ईरान को ‘बड़ी कीमत चुकाने’ की धमकी दी है.

ट्रंप ने ईरान को ‘धमकी’ दी

बुधवार, 10 जून को ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर पोस्ट कर लिखा कि ईरान की मिलिट्री में सबकुछ गड़बड़ है. उनकी नेवी और एयरफोर्स का ज्यादा हिस्सा अब खत्म हो चुका है. वे पूरी तरह से हार चुके हैं. ईरान सिर्फ बातें करता है और कोई भी एक्शन नहीं लेता. 

Donald Trump Post
डॉनल्ड ट्रंप का पोस्ट.

ट्रंप ने आगे लिखा, ‘मिडिल ईस्ट का गुंडा मर चुका है.’ अमेरिकी राष्ट्रपति ने ये तो नहीं बताया कि वो किसे ‘गुंडा’ कह रहे हैं, लेकिन माना जा रहा है कि उनका इशारा ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई की तरफ हो सकता है. 28 फरवरी, 2026 को अमेरिका और ईरान के हमले में खामेनेई की मौत हो गई थी.

ट्रंप ने पोस्ट में ईरान पर फिर से हमले करने का संकेत देते हुए लिखा कि उन्होंने (ईरान) एक ऐसी डील पर बातचीत करने में ज्यादा समय लगा दिया, जो उनके लिए बहुत अच्छी है. अब उन्हें इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी.  

ट्रंप पर जंग खत्म करने का दबाव

दरअसल, राष्ट्रपति ट्रंप पर देश-विदेश के राजनीतिक हलकों से लगातार इस जंग को रोकने का दबाव बन रहा है. जंग की वजह से कई देश ऊर्जा संकट से गुजर रहे हैं. बीते दिन कथित तौर पर ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अमेरिकी सेना का लड़ाकू अपाचे हेलीकॉप्टर गिरा दिया था. इसके बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि अमेरिका के पास जवाबी कार्रवाई करने के अलावा कोई ऑप्शन नहीं था.

वहीं, ईरान की सरकारी न्यूज एजेंसी ISNA की मुताबिक, ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने अयातुल्ला खामेनेई के हवाले से दावा किया कि पूर्व सुप्रीम लीडर ने बातचीत के जरिये समाधान निकालने की अनुमति दे दी थी. ऐसे में ईरान को अपने' न युद्ध न शांति' वाले स्टैंड से अलग होकर भी सोचना होगा. 

पेजेश्कियान के इस बयान से लगता है कि वे भी अमेरिका और इजरायल से बातचीत कर मौजूदा संकट को खत्म करने के पक्ष में हैं. हालांकि कई रिपोर्ट्स कहती हैं कि IRGC के कट्टर अधिकारी उनकी दलीलों से इत्तेफाक नहीं रखते और जंग जारी रखने के पक्षधर हैं.

'न युद्ध न शांति' को एक ऐसी नीति (या स्थिति) के रूप में देखा जाता है जिसमें किसी कम्युनिटी, क्षेत्र या देश को लंबे वक्त तक गतिरोधों का सामना करना पड़ता है. विदेश नीति, अर्थव्यवस्था और वैश्विक संबंध बुरी तरह प्रभावित होते हैं. कई तरह के अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध झेलने पड़ते हैं. घरेलू चुनौतियां बार-बार अस्थिरता पैदा करती हैं. सैन्य संघर्षों पर विराम लगने के बावजूद कूटनीतिक सफलताएं नहीं मिलतीं. नतीजा, देश में लंबे वक्त तक तनाव ही बना रहता है.

वीडियो: Mamata Banerjee को और एक झटका, राज्यसभा से TMC MP Sushmita Dev का इस्तीफा

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