'पाकिस्तान हमारे लिए बड़ा परमाणु खतरा... ', अमेरिका इंटेलिजेंस चीफ तुलसी गबार्ड का बड़ा बयान
Tulsi Gabbard ने अमेरिकी सांसदों को बताया है कि अमेरिका पर हमला करने में सक्षम मिसाइलों की संख्या में भारी वृद्धि हो सकती है. उनका अनुमान है कि 2035 तक यह संख्या 16,000 से अधिक हो जाएगी, जो कि मौजूदा अनुमान 3,000 से काफी ज्यादा है.

अमेरिका की डायरेक्टर ऑफ नेशनल इंटेलिजेंस तुलसी गबार्ड ने पाकिस्तान को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने दुनिया में बढ़ रहे खतरों में पाकिस्तान का नाम लिया है. तुलसी गबार्ड ने चेतावनी देते हुए कहा है कि दुनिया में लगातार बढ़ रहे खतरों में रूस, चीन, नॉर्थ कोरिया और पाकिस्तान सबसे बड़े खतरे हैं. गौर करने वाली बात ये है कि ये सभी देश न्यूक्लियर पावर से लैस हैं. यह बयान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के एक बयान के ठीक बाद आया है. इस बयान की टाइमिंग काफी अहम है. क्योंकि पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ ने फरवरी 2026 की शुरुआत में ही प्रेसिडेंट ट्रंप की तारीफ के कसीदे पढ़े थे. पीएम शहबाज ने उन्हें 'शांति का दूत' और 'दक्षिण एशिया का रक्षक' बताया था.
अपने आकलन में, तुलसी गबार्ड ने सांसदों को बताया कि अमेरिका पर हमला करने में सक्षम मिसाइलों की संख्या में भारी वृद्धि हो सकती है. उनका अनुमान है कि 2035 तक यह संख्या 16,000 से अधिक हो जाएगी, जो कि मौजूदा अनुमान 3,000 से काफी ज्यादा है. इसके अलावा तुलसी गबार्ड ने बदलते जियोपोलिटिकल संबंधों पर भी बात की. उन्होंने कहा कि नॉर्थ कोरिया लगातार रूस और चीन के साथ अपनी साझेदारी को मजबूत कर रहा है. इससे अमेरिका के विरोधियों के बीच सैन्य क्षमताओं को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं.
तुलसी गबार्ड ने कहा कि पाकिस्तान का लंबी दूरी की मिसाइलों पर काम करना चिंता का विषय है क्योंकि इसमें ऐसी ICBM तकनीक शामिल हो सकती हैं, जो अमेरिकी जमीन पर पर हमला करने की रेंज रखती हैं. खुफिया विभाग (IC) का मानना है कि पाकिस्तान पारंपरिक और न्यूक्लियर, दोनों पेलोड ले जाने वाले सिस्टम पर रिसर्च कर रहा है. यह विकास अमेरिका के मौजूदा मिसाइल डिफेंस को चुनौती देने या उसे पार करने की क्षमता रखने वाले देशों की लिस्ट में पाकिस्तान को शामिल करता है.
तुलसी गबार्ड ने ईरान से जुड़ी स्थिति पर भी बात की. उन्होंने कहा कि जून 2025 के हमलों में उसका न्यूक्लियर एनरिचमेंट का काम पूरी तरह ठप हो गया था. अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, इन हमलों से ईरान के कई प्रमुख ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचा है. उन्हें फिर से बनाने में कई साल लग सकते हैं.
हालांकि, उन्होंने ईरान से खतरे को पूरी तरह नकारा भी नहीं है. वो कहती हैं कि ईरान और उसके क्षेत्रीय पार्टनर अब भी एक बड़ा खतरा हैं. उनके पास पूरे वेस्ट एशिया में अमेरिकी सेनाओं और सहयोगी देशों को निशाना बनाने की क्षमता अब भी मौजूद है. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ईरान की मौजूदा सरकार सत्ता में बनी रही, तो आने वाले सालों में वह अपनी मिसाइल और ड्रोन क्षमताओं को फिर से डेवलप करने की कोशिश करेगा.
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