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अमेरिका ने टेस्ट की 'कयामत के दिन वाली' मिसाइल मिनटमैन-3, ईरान पर दागी जाएगी?

अमेरिका ने एक नई बैलिस्टिक मिसाइल 'मिनटमैन-3' का टेस्ट किया है. इसे ‘डूम्सडे’ मिसाइल यानी कयामत के दिन इस्तेमाल होने वाली मिसाइल कहा जा रहा है. ये मिसाइल हिरोशिमा पर गिराए गए परमाणु बम से भी 20 गुना अधिक विस्फोटक ले जा सकती है.

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5 मार्च 2026 (अपडेटेड: 5 मार्च 2026, 04:12 PM IST)
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अमेरिका ने डूम्सडे नाम से मशहूर मिनटमैन-3 ICBM का टेस्ट किया है (PHOTO-India Today)
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अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष बढ़ता जा रहा है. दोनों देश एक-दूसरे पर हमले कर रहे हैं. ईरान से चल रही टेंशन के बीच अमेरिका ने कुछ ऐसा किया है जिससे इस युद्ध में और भी खतरनाक हथियारों के इस्तेमाल का डर बढ़ गया है. दरअसल अमेरिका ने एक नई बैलिस्टिक मिसाइल 'मिनटमैन-3' का टेस्ट किया है. इसे ‘डूम्सडे’ मिसाइल यानी कयामत के दिन इस्तेमाल होने वाली मिसाइल कहा जा रहा है. ये मिसाइल हिरोशिमा पर गिराए गए परमाणु बम से भी 20 गुना अधिक विस्फोटक ले जा सकती है.

अमेरिका की US स्पेस फोर्स ने 4 मार्च को एक बयान जारी कर कहा कि एयरफोर्स ग्लोबल स्ट्राइक कमांड ने कैलिफोर्निया के वैंडेनबर्ग स्पेस फोर्स बेस से बिना हथियार वाली मिनटमैन III ICBM लॉन्च की. इसमें री-एंट्री के लिए दो व्हीकल थे. यानी ये दो बार वायुमंडल के बाहर जाकर हमला कर सकती है. US स्पेस फोर्स ने मिसाइल को टेस्ट व्हीकल GT-255 नाम दिया गया है.

क्या ईरान पर दागी जाएगी?

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक कहा जा रहा है कि ये टेस्ट लंबे समय से चल रहे रूटीन इवैल्यूएशन प्रोग्राम का हिस्सा था. और इसका हालिया संघर्ष से कोई लेना-देना नहीं है. लेकिन सवाल इसकी टाइमिंग को लेकर ही उठ रहा है कि इस लड़ाई के दौरान एक खतरनाक हथियार का टेस्ट क्यों? ये रूटीन है या किसी साइकोलॉजिकल लड़ाई का हिस्सा. इस टेस्ट पर जानकारी देते हुए 576 फ्लाइट टेस्ट स्क्वाड्रन के कमांडर, लेफ्टिनेंट कर्नल कैरी व्रे ने कहा, 

GT 255 ने हमें मिसाइल सिस्टम के अलग-अलग हिस्सों की परफॉर्मेंस का अंदाजा लगाने में मदद की. लगातार अलग-अलग मिशन प्रोफाइल का अंदाजा लगाकर, हम पूरे ICBM बेड़े की परफॉर्मेंस को बेहतर बना पाए हैं. इससे देश के न्यूक्लियर ट्रायड में जमीन पर तैयारी का सबसे ज़्यादा लेवल पक्का हो गया है. 

कयामत की मिसाइल है ‘मिनटमैन’

मिनटमैन III की रेंज लगभग 10 हजार किलोमीटर है. यह मिसाइल लगभग 24 हजार किलोमीटर प्रति घंटे से ज्यादा तेज चल सकती है. इससे यह मिनटों में अलग-अलग महाद्वीपों के टारगेट तक पहुंच सकती है. लेकिन इसे अपने नाम से इतर ‘डूम्सडे मिसाइल’ के नाम से ख्याति प्राप्त है. इस मिसाइल को यह खतरनाक नाम इसलिए मिला है क्योंकि इसे न्यूक्लियर हमले की हालत में तेजी से जवाब देने के लिए बनाया गया है. 

अपने पहले वाले सिस्टम के उलट, मिनटमैन III सॉलिड फ्यूल पर चलती है, जिससे यह लगातार हाई अलर्ट पर रहती है और इसे जमीन के नीचे बने साइलो से कुछ ही मिनटों में लॉन्च किया जा सकता है. एक ICBM के तौर पर, यह हाइपरसॉनिक स्पीड से कई कॉन्टिनेंट्स में हजारों मील का सफर कर सकती है. इसी कारण यह दुनिया में लगभग कहीं भी टारगेट पर हमला कर सकती है. 

वीडियो: खामेनेई को 'ब्लू स्पैरो' से मारा गया, क्या है इस मिसाइल की खासियत?

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