ट्रंप-जिनपिंग की बैठक पर 'मर्दों की मीटिंग' होने का आरोप लगा, वजह ये तस्वीर है
लंबी चमचमाती टेबल थी. दोनों तरफ सूट-बूट में ताकतवर लोग बैठे हुए थे. कैमरे फ्लैश कर रहे हैं. सबकुछ बिल्कुल परफेक्ट दिख रहा था. लेकिन फिर लोगों ने गौर किया कि इस तस्वीर में कोई मिसिंग है.

अमेरिका और चीन. दुनिया की दो सबसे बड़ी ताकतें. बीजिंग के ‘ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल’ में दोनों देशों के बड़े-बड़े नेता, डिप्लोमैट्स और कारोबारी बैठे हुए थे. मीटिंग काफी हाई प्रोफ़ाइल थी. उसकी हर फोटो हर फ्रेम दुनिया भर में वायरल हो रहे थे. कहीं Taiwan पर चर्चा, कहीं Thucydides Trap की बहस. इन सबके बीच एक तस्वीर ने लोगों का ध्यान दूसरी वजह से खींच लिया.
लंबी चमचमाती टेबल थी. दोनों तरफ सूट-बूट में ताकतवर लोग बैठे हुए थे. कैमरे फ्लैश कर रहे हैं. सबकुछ बिल्कुल परफेक्ट दिख रहा था. लेकिन फिर लोगों ने गौर किया कि इस तस्वीर में कोई मिसिंग है.
पूरी टेबल पर एक भी महिला मौजूद नहीं थी. अब इसी तस्वीर को लेकर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है. लोग पूछ रहे हैं कि क्या दुनिया की सबसे ताकतवर सरकारों और कंपनियों के फैसले आज भी सिर्फ पुरुषों की टेबल पर ही तय होते हैं? और क्या ये तस्वीर पितृसत्ता यानी patriarchy की सबसे बड़ी विजुअल मिसाल बन गई है?

IMF की पूर्व डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर और अर्थशास्त्री Gita Gopinath ने इस पर नाराजगी जाहिर करते हुए एक पोस्ट किया. उन्होंने लिखा,'काबिलियत की अहमियत खत्म होने की तस्वीर: दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की बैठक में टेबल पर एक भी महिला नहीं है.'
द गार्जियन ने इसको लेकर गीता गोपीनाथ से बात भी की. उन्होंने कहा, 'हम फिर से ऐसी सोच की तरफ लौट गए हैं, जहां आपकी काबिलियत से ज्यादा आपके संबंध और नेटवर्क मायने रखते हैं. और यही तय करता है कि आपको टेबल पर जगह मिलेगी या नहीं. दुनिया में इतनी प्रतिभाशाली महिलाएं होने के बावजूद किसी बैठक में सिर्फ पुरुषों का होना समझ से परे है.'
अमेरिका की स्टैनफर्ड यूनिवर्सिटी में फेमिनिस्ट, जेंडर और सेक्शुअलिटी स्टडीज प्रोग्राम की एसोसिएट डायरेक्टर, हालिमा काज़ेम ने भी इस तस्वीर पर कुछ ऐसी ही राय रखी. उन्होंने इसकी तुलना पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के दौर से की. उन्होंने कहा,'हम पीछे चले गए हैं. ओबामा के समय अमेरिका-चीन की समिट और बैठकों में महिलाएं भी टेबल पर मौजूद रहती थीं. अब लगता है दोनों 'महाशक्तियों' ने मान लिया है कि वैश्विक राजनीति तय करने वाली बड़ी बैठकों में महिलाओं की जगह नहीं है. ये सिर्फ अमेरिका की नाकामी नहीं, बल्कि दोनों देशों की तरफ से दिया गया ऐसा संकेत है कि दुनिया की दिशा तय करने में महिलाओं की आवाज़ मायने नहीं रखती.'
इससे जुड़ी एक तस्वीर भी सामने आई है जिसमें दिख रहा है कि ओबामा के कार्यकाल में जब अमेरिका-चीन के बीच बैठकें हुईं तो उनमें महिलाओं की भी अहम मौजूदगी रहती थी. पुरानी फोटो में चीन की तत्कालीन उप-प्रधानमंत्री Liu Yandong, अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार Susan Rice और विदेश मंत्री Hillary Clinton शामिल नजर आ रही हैं.

हालिमा ने आगे कहा, 'ऐसा नहीं है कि योग्य महिलाओं की कमी थी. दोनों देशों के कूटनीतिक और सुरक्षा तंत्र में कई सक्षम महिलाएं मौजूद हैं. ये एक सोचा-समझा फैसला था कि किस तरह की सत्ता और ताकत का संदेश दिया जाए: मर्दों के दबदबे वाला, सैन्य ताकत दिखाने वाला और दूसरों को बाहर रखने वाला'.
उन्होंने आगे ये भी कहा, ‘जब दोनों महाशक्तियां इस तरह ताकत दिखाती हैं, तो वे मिलकर तय कर रही होती हैं कि ‘गंभीर’ कूटनीति कैसी दिखेगी और उसमें किन लोगों को बाहर रखा जाएगा.’
गुरुवार को हुई बैठक में तो महिलाएं नजर नहीं आईं, लेकिन ट्रंप के दो दिन के बीजिंग दौरे पर कुछ महिलाएं उनके साथ पहुंची थीं. इनमें उनकी बहू लारा ट्रंप, सिटीग्रुप की सीईओ Jane Fraser और Meta की प्रेसिडेंट Dina Powell McCormick शामिल हैं.
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