'लिख के दो, सरकार के खिलाफ कुछ नहीं लिखोगे'
लेखकों को बताना होगा कि सरकार या योजनाओं के खिलाफ न लिखेंगे पर बात इतनी सी ही नहीं है...
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फोटो - thelallantop
नेशनल काउंसिल फॉर प्रमोशन ऑफ उर्दू लैंग्वेज HRD मिनिस्ट्री में आता है. वहां की एक खबर आ रही है. बताया जा रहा है कि कई उर्दू वाले राइटर्स को एक फॉर्म मिला है जिसमें उन्हें घोषित करना है कि उनका लिखा कहीं से सरकार या देश के खिलाफ नहीं होगा.
ये डिक्लेयरेशन फॉर्म नई चीज है. एक साल पहले काउंसिल के मेमबर्स की मीटिंग हुई थी. HRD मिनिस्ट्री के मेम्बर भी थे उसके बाद ये फॉर्म आया. काउंसिल वाले कहते हैं क्या करें यार लोग दूसरे के काम को अपना बताकर चेंप जाते थे. इत्ते तो लोग भी नहीं हैं कि एक-एक लाइन पढ़ें बैठ के तो एक फॉर्म दे दिया. पिछले साल किसी ने कहीं पर गलत फैक्ट दे दिए और गला नपा हमारा.
हम भी काउंसिल फॉर प्रमोशन ऑफ उर्दू लैंग्वेज की साइट पर जा पहुंचे. स्कीम देखी. ये सिर्फ राइटर्स के लिए नहीं था. अगर आपको किसी प्रोजेक्ट लिए पैसे चाहिए या पांडुलिपियां छपवानी हैं या फिर थोक में अपनी उर्दू वाली किताबें खरिदवानी हैं तो आपको एक फॉर्म भरना होगा कि आपका लिखा सरकार की योजनाओं के खिलाफ या उसके इंटरेस्ट के खिलाफ नहीं होगा.
उर्दू वाले कुछ राइटर्स इससे खुश नहीं हैं कह रहे हैं. ये तो मतभेदों की भ्रूण हत्या हुई. और ये कैसी बेइज्जती है कि दो जनों की दस्तख़त भी करानी पड़ती है फॉर्म में. तो भाई ये तो बनी बात है. सरकार काहे को चाहेगी कि आप उसी से पईसा लेकर उसी की योजनाओं की बखिया उधेड़ दो या उसी के इंटरेस्ट के खिलाफ लिख डालो. और एक बात और वो जो नेशन के अगेंस्ट वाली बात थी वो हमको नहीं दिखी फॉर्म में. हो सकता है राइटर्स को अलग से भेजी गई हो. आम आदमी जो नेशनल काउंसिल फॉर प्रमोशन ऑफ उर्दू लैंग्वेज की साइट पर फॉर्म देख सकता है वो कुछ ऐसा है.


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