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'मैं शेख हूं, शुभम नहीं, अब सबको बता सकता हूं'

UPSC का एग्जाम पास करने पर उसे दोहरी खुशी है. एक, अब वह अफसर हो जाएगा. दूसरी, वह सबको अपना असली नाम बता सकता है.

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11 मई 2016 (अपडेटेड: 10 मई 2016, 03:36 AM IST)
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अंसार अहमद शेख
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UPSC का एग्जाम पास करने पर उसे दोहरी खुशी है. एक, अब वह अफसर हो जाएगा. दूसरी, वह सबको अपना असली नाम बता सकता है. 21 साल के अंसार अहमद शेख के पिता ऑटो चलाते हैं. घर महाराष्ट्र के जालना जिले के शेडगांव में है. उसने पहली ही कोशिश में UPSC का एग्जाम पास कर लिया. ऑल इंडिया रैंक, 361. ग्रेजुएशन और उसके बाद UPSC की तैयारी के लिए अंसार अहमद पुणे चला आया. फर्ग्युसन कॉलेज से पॉलिटिकल साइंस में ग्रेजुएशन की, फिर सिविल सर्विसेस की तैयारी में जुट गया. लेकिन अपने मुस्लिम नाम की वजह से उसे मनचाही जगह पर किराए का घर नहीं मिला. तब उसने अपना नाम बदला. शुभम. ताकि बिना भेदभाव के इस शहर में रहकर पढ़ाई कर सके. वह खुश है कि अब सबको अपना नाम बता सकता है.
'मुझे याद है जब मैं पीजी खोजने निकला था. मेरे हिंदू दोस्तों को आसानी से कमरे मिल गए, पर मुझे मना कर दिया गया. इसलिए अगली बार मैंने अपना नाम शुभम बताया, जो दरअसल मेरे दोस्त का नाम था. लेकिन अब मुझे अपना नाम छिपाने की जरूरत नहीं है.'
अंग्रेजी अखबार 'द इंडियन एक्सप्रेस' से अपने संघर्ष पर बात करते हुए अंसार शेख की आंखें भर आईं. उसने बताया, 'मेरे वालिद साहब की तीन बीवियां थीं. मेरी मां उनकी दूसरी बीवी हैं. हमारी फैमिली में पढ़ाई-लिखाई की अहमियत नहीं थी. छोटे भाई ने स्कूल के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी. दो बहनों की जल्दी शादी कर दी गई थी. जब मैंने घर पर फोन करके बताया कि मैंने UPSC का एग्जाम निकाल लिया है और अब IAS अफसर बन सकता हूं, तो वे हैरान रह गए.' शेख ने अभी अपने दोस्तों के साथ एक छोटा जश्न मनाया है. बड़े जश्न के लिए वह घर पहुंच रहा है. अपनी तैयारी के बारे में बताते हुए उसने कहा कि कामयाबी का कोई शॉर्ट कट नहीं है. दसवीं क्लास को छोड़कर वह स्कूल में टॉपर रहा. UPSC के लिए ग्रेजुएशन के दिनों से ही तैयारी की. तीन साल तक रोजाना 10-12 घंटे पढ़ाई.
'मैं स्टूडेंट्स से कहूंगा कि वह खुद से पूछें कि सिस्टम में क्यों आना चाहते हैं. इसका जवाब मिलने के बाद रास्ता आसान है.'
सारी जिंदगी धार्मिक भेदभाव झेल चुके शेख कहते हैं कि वह हिंदू-मुस्लिम एकता को मजबूत करने के लिए काम करेंगे.

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