The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • News
  • UP professors who didn't know anything about their subjects were checking answer sheets, got caught

ऐसे मास्टर कॉपी जांचें, उससे भला हम चूहामार खा लें

अंग्रेजी के प्रोफेसर एक चिट्ठी नहीं लिख पाते, इकोनॉमिक्स वाले को IMF का मतलब नहीं पता.

Advertisement
pic
1 जुलाई 2016 (अपडेटेड: 2 जुलाई 2016, 08:50 AM IST)
Img The Lallantop
फोटो - thelallantop
Quick AI Highlights
Click here to view more
बिहार के सारे टॉपर्स का सच प्याज के छिलके की तरह परत दर परत सामने आ रहा है. पॉलिटिकल साइंस की टॉपर रूबी को अपने सब्जेक्ट की नॉलेज नहीं है. खैर ये तो स्टूडेंट है. सिर चकरा जाएगा जब आपको पता चलेगा कि एक इकोनॉमिक्स के प्रोफेसर को IMF का फुल-फॉर्म नहीं पता.  अंग्रेजी के मास्टर जी को ग्रामर का भी नहीं आता. और वो इंसान B.A की कॉपियां चेक कर रहा है. पूरी खबर द टाइम्स ऑफ इंडिया ने छापी है. वाकया उत्तर प्रदेश का है. अंग्रेजी के एसोसिएट प्रोफेसर को Evaluation और इकोनॉमिक्स वाले को ऑडिट और IMF का मतलब नहीं पता. सोच लो कैसे ये प्रोफेसर बच्चों को पढ़ाते होंगे. पता है, ये मामला सामने कैसे आया? दरअसल अभी-अभी B.A के एग्जाम खत्म हुए हैं. माने आंसर शीट पर लाल कलम चलने की बारी. सोमवार को इंस्टिट्यूट ऑफ टूरिज्म एंड होटल मैनेजमेंट में अंग्रेजी, हिस्ट्री और इकोनॉमिक्स की कॉपिया चेक हो रही थी. वहां जो बाकी प्रोफेसर को कॉर्डिनेट कर रहा था, अचानक उसकी नजर दो प्रोफेसरों पर पड़ी. उसे उन दोनों की पहचान पर शक हुआ. बस फिर क्या था, कॉर्डिनेटर ने दोनों की अच्छे से क्लास ले ली. हालांकि दोनों के पास डिग्री थी. दोनों यूपी यूनिवर्सिटी से एफलिएटेड कॉलेजों में पढ़ाते हैं. श्याम बहादुर, महात्मा ज्योतिबा फुले रोहिलखंड यूनिवर्सिटी बरेली में अंग्रेजी के एसोसिएट प्रोफेसर हैं. तो वहीं अनिल कुमार पाल जौनपुर के वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल यूनिवर्सिटी में इकॉनॉमिक्स के एसोसिएट प्रोफेसर हैं. दोनों को पढ़ाते हुए एक दशक से भी ज्यादा समय बीत चुका है. पर श्याम बहादुर को आज भी सही से दो लाइन की अर्जी लिखनी नहीं आती. कॉपी चेक करने के लिए लिखी अर्जी में अनगिनत व्याकरण की गलतियां थी. जनाब ने evaluation को evallutaion लिखा था. बेसिक सवाल के जवाब भी नहीं दे पाए श्याम. पाल की बारी आई. उन्हें ऑडिट क्या होता है, ये नहीं पता. और बच्चों को अर्थ शास्त्र का ज्ञान बांचते थे. इनके अनुसार IMF माने International Money Found. जब ये बात यूपी के गवर्नर और यूनिवर्सिटी के चांसलर राम नाईक को पता चली तो इनने फौरन फरमान जारी कर दिया कि मुझे दोनों प्रोफेसर की डिटेल चाहिए. जांच-पड़ताल कर मैं उनकी सूत्रों के मुताबिक दोनों प्रोफेसरों का नाम ब्लैक लिस्ट में डाल दिया गया है. दोनों की हायरिंग के पीछे जरूर कोई लोचा है. सवाल ये भी है कि इन दोनों को फर्स्ट क्लास की डिग्री मिली कहां से. अब जिस देश में टीचर ऐसे होंगे, वहां के स्टूडेंट्स से आप क्या अपेक्षा रख सकते हैं?

Advertisement

Advertisement

()