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बीजेपी लीडर को हड़काया, तो हुआ ट्रांसफर, अब इस लेडी अफसर ने दिया है कर्रा जवाब

वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था. एक बार फिर फेसबुक पर चर्चा में हैं.

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3 जुलाई 2017 (अपडेटेड: 3 जुलाई 2017, 10:28 AM IST)
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फोटो - thelallantop
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उत्‍तर प्रदेश की महिला पुलिस अफसर श्रेष्‍ठा ठाकुर का तबादला कर दिया गया. ये तो जानकारी मिल ही गई होगी. लेकिन अब इस लेडी अफसर ने योगी सरकार को करारा जवाब दिया है. ये वही लेडी अफसर हैं, जिनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर उस वक़्त वायरल हुआ था, जब बुलंदशहर में एक स्थानीय बीजेपी लीडर का ट्रैफिक रूल तोड़ने पर चालान काट दिया गया था. और बीजेपी कार्यकर्ताओं से बहस हुई थी. लेकिन इस लेडी अफसर ने उन कार्यकर्ताओं के धरने के सामने बड़े इत्मीनान से खड़े होकर उनकी बोलती बंद कर दी थी. उनकी इस सख्ती पर उन्हें सोशल मीडिया पर 'लेडी सिंघम' बताया जा रहा था. लेकिन शनिवार को उनका तबादला बहराइच कर दिया गया. श्रेष्ठा ने अपने ट्रांसफर पर जवाब दिया और इसको 'अच्‍छे कामों का इनाम' बताया है. श्रेष्ठा ठाकुर ने बिना डरे पांच बीजेपी नेताओं को सरकारी काम में बाधा डालने के चलते जेल भी भेज दिया था. ट्रांसफर की खबर मिलने पर उन्‍होंने फेसबुक पर लिखा,
'जहां भी जाएगा, रोशनी लुटाएगा. किसी चराग का अपना मकां नहीं होता. बहराइच ट्रांसफर हो गया, नेपाल बॉर्डर है. परेशान मत होइए दोस्‍तों, मैं खुश हूं. मैं इसे अपने अच्‍छे काम का इनाम मानती हूं. आप सभी बहराइच में आमंत्रित हैं.'
facebook अभी तक श्रेष्‍ठा ठाकुर की तैनाती बुलंदशहर जिले के स्‍याना सर्किल में थी. उन्‍हें कुछ अन्‍य डिप्‍टी सुप्रिटेंडेंट्स के साथ ट्रांसफर किया गया है. हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक श्रेष्ठा ठाकुर के ट्रांसफर के बाद स्थानीय नेता इसे अपना सम्मान बता रहे हैं. इसके अलावा आला पुलिस अफसरों से सीओ श्रेष्ठा ठाकुर के खिलाफ कार्रवाई करने की भी मांग कर रहे हैं. बुलंदशहर के बीजेपी अध्यक्ष मुकेश भारद्वाज का कहना है कि श्रेष्ठा पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और अन्य नेताओं पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने का मामला दर्ज कराया गया है. एक हफ्ते पहले ट्रैफिक रूल तोड़ने पर पुलिस ने भाजपा कार्यकर्ता का चालान काट दिया था. इस दौरान जिला पंचायत सदस्या के पति और भाजपा नेता प्रमोद लोधी सीओ श्रेष्ठा ठाकुर से से भिड़ गए थे. और प्रमोद पर बदसलूकी करने का इलज़ाम लगा था. जिन कार्यकर्ताओं को पुलिस ने पकड़ा था, उन्हें भी कोर्ट परिसर से छुड़ाने की कोशिश की गई थी.

क्या था मामला?

जो वीडियो वायरल हुआ उसमें श्रेष्ठा ठाकुर की नोकझोंक हो रही थी. लोग अपने आप को बीजेपी कार्यकर्ता बता रहे थे. कार्यकर्ताओं का आरोप था कि पुलिस बीजेपी से जुड़े ही लोगों के खिलाफ कार्रवाई करती है और ट्रैफिक नियमों के नाम पर घूसखोरी की जाती है. हालांकि सीओ ने इन आरोपों की सिरे से नकार दिया. जब एक आदमी वीडियो में हिंदू होने की बात दोहराता है तो एक पुलिस वाला उसकी बोलती ये कहकर बंद कर देता है कि वो खुद भी हिंदू है. क्या वो ये देखके कार्रवाई करते हैं. इसके बाद श्रेष्ठा कहती हैं, 'ये वो लोग हैं जो इलाके में हिंदू-मुस्लिम करा दें.' श्रेष्ठा का कहना था, 'हम बेवक़ूफ़ नहीं है जो रात में सड़क पर चेकिंग करने खड़े होते हैं. हमारा अधिकार है. करीब 2000 लोगों की चेकिंग की. किसी को दिक्कत नहीं. आपको ही दिक्कत है. जाइये और सीएम से लिखवा लाइए कि पुलिस को चेकिंग करने का अधिकार नहीं है. तब हम चेकिंग नहीं करेंगे. क्या आप लोग ट्रैफिक रूल तोड़कर बिना हेलमेट वाहन चलाएंगे.' इस कार्रवाई के बाद सीओ श्रेष्ठा ने मीडिया को बताया था, 'मामला चालान का था. और कुछ नहीं. प्रमोद के पास पूरे दस्तावेज नहीं थे. पहले उन्होंने मेरे साथ बदतमीजी की. इसके बाद दूसरे पुलिस अफसरों के साथ भी बदसलूकी की गई.' अब श्रेष्ठा को नेपाल बॉर्डर के पास भेज दिया गया है. लेकिन उनके हौसले में कमी नहीं है. तभी तो फेसबुक पर उन्होंने इशारों में जवाब दे दिया है.

देखिए सीओ श्रेष्ठा का वायरल वीडियो

https://www.youtube.com/watch?v=u6gIOn7dBsM लल्लनटॉप की ब्रांड न्यू सीरीज,भारत के राष्ट्रपति चुनाव पर:

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