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गाजीपुर में मारे गए पुलिसवाले के बेटे ने जो कहा, वो सबको सुनना चाहिए

महीने भर के अंदर यूपी में तीसरे पुलिसकर्मी की हत्या.

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30 दिसंबर 2018 (अपडेटेड: 30 दिसंबर 2018, 08:21 AM IST)
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29 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गाजीपुर में लोगों को संबोधित कर रहे थे. जनसभा से थोड़ी दूर निषाद पार्टी के लोग आरक्षण की मांग को लेकर सड़क पर प्रदर्शन कर रहे थे. प्रधानमंत्री की रैली खत्म हुई और लोग वापस लौटने लगे. पुलिस ने निषाद पार्टी के लोगों से सड़क से जाम खत्म करने को कहा.
भीड़ में शामिल लोगों ने हाथ में बैनर ले रखा था. जिसमें हिंसक प्रदर्शन की चेतावनी थी.
भीड़ में शामिल लोगों ने हाथ में बैनर ले रखा था. जिसमें हिंसक प्रदर्शन की चेतावनी थी.

पर वे लोग नहीं माने. इसी दौरान प्रदर्शनकारियों की पुलिस से झड़प हो गई और भीड़ ने वाहनों पर पथराव करना शुरू कर दिया. पथराव के दौरान ही सिर में चोट लगने से हेड कॉन्स्टेबल सुरेश वत्स बेहोश हो गए. उन्हें अस्पातल ले जाया गया. जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.
सीओ सिटी महिपाल पाठक ने बताया कि घटना से जुड़े नौ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है.
सीओ सिटी महिपाल पाठक ने बताया कि घटना से जुड़े ग्यारह लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है.

सुरेश वत्स प्रतापगढ़ के रहने वाले थे. उनकी तैनाती गाजीपुर के करीमुद्दीनपुर थाने में थी. प्रधानमंत्री की रैली होने के कारण 29 दिसंबर को उनकी ड्यूटी रैली में थी. सीओ सिटी गाज़ीपुर महिपाल पाठक ने बताया कि वह (सुरेश वत्स) पीएम की रैली से ड्यूटी करके वापस आ रहे थे. कठवा मोड़ पुलिस थाने के पास निषाद पार्टी के कुछ लोग प्रदर्शन कर रहे थे. वहीं भीड़ ने पत्थरबाजी शुरू कर दी. जिसमें सुरेश को चोट लगी. इस मामले में 32 नामजद और 60 अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है.
मृतक कांस्टेबल के बेटे ने प्रदेश की कानून व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि मुआवजा देने से क्या होगा?
मृतक कॉन्स्टेबल के बेटे ने प्रदेश की कानून व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि मुआवजा देने से क्या होगा?

मामले को संज्ञान में लेते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने परिवार के एक सदस्य को नौकरी और 50 लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है. मगर मृतक कॉन्स्टेबल के बेटे वीपी सिंह ने सरकार को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा 'पुलिस अपनी खुद की सुरक्षा नहीं कर पा रही है. हम उनसे और क्या उम्मीद करें? इससे पहले बुलंदशहर और प्रतापगढ़ में इसी तरह की घटनाएं हो चुकी हैं.'
उपद्रवियों ने रास्ते से गुजर रहे वाहनों में जमकर तोड़फोड़ की.
उपद्रवियों ने रास्ते से गुजर रहे वाहनों में जमकर तोड़फोड़ की.

महीने भर के अंदर उत्तर प्रदेश में यह तीसरे पुलिस वाले की हत्या है. गौरतलब है कि इससे पहले बुलंदशहर में गोकशी की घटना के बाद हुए उपद्रव में भीड़ ने सीओ सुबोध सिंह की हत्या कर दी थी. जबकि प्रतापगढ़ में ड्यूटी से लौट रहे सिपाही की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी.
सवाल यहां सिर्फ सरकार से नहीं, इन निषाद पार्टी के प्रदर्शनकारियों से भी पूछा जाना चाहिए कि क्या बसें तोड़कर, जाम लगाकर, हिंसा करके, किसी की जान लेके आप आरक्षण लेंगे. क्यों न आपको गुंडा या अपराधी समझा जाए, बजाए प्रदर्शनकारियों के. आपके हाथ में पोस्टर हैं जिनमें लिखा है - आरक्षण नहीं मिला तो खून बहेगा सड़कों पर. इसे क्या समझा जाए कि आप पूरे देश को धमका रहे हैं. आपकी बात नहीं मानी तो आप हिंसा करेंगे. ये तरीका एकदम गलत है.


वीडियो देखें: संजलि को जिंदा जलाने वाले जो निकले आप विश्वास नहीं करेंगे.

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