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यूपी स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी गंगा में डूबे, बचाने की जगह पैसे ट्रांसफर कराते रहे गोताखोर!

घटना कानपुर के नानामऊ घाट की है. अधिकारी के दोस्तों का आरोप है कि उन लोगों ने गोताखोरों से तुरंत मदद मांगी थी, लेकिन गोताखोरों ने कहा कि पहले 10 हजार रुपये दो, फिर बचाने जाएंगे.

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सुरभि गुप्ता
| रंजय सिंह
1 सितंबर 2024 (अपडेटेड: 1 सितंबर 2024, 09:14 PM IST)
UP health official drowns in ganga river
यूपी स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी आदित्यवर्धन सिंह की तलाश जारी है. (फोटो: आजतक)
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उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी आदित्यवर्धन सिंह के गंगा नदी में डूबने की खबर है. घटना कानपुर नगर के बिल्हौर कोतवाली के अंतर्गत आने वाले नानामऊ घाट की है. स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी आदित्यवर्धन सिंह दोस्तों के साथ गंगास्नान के लिए नानामऊ घाट गए थे. इस दौरान नदी का बहाव तेज होने के कारण वो डूब गए. अधिकारी के दोस्तों का कहना है कि उन लोगों ने तुरंत वहां मौजूद गोताखोरों से मदद मांगी थी, लेकिन गोताखोरों ने ‘पहले उन्हें 10 हजार रुपये देने’ की बात कही. कैश न होने के कारण जब तक पैसे एक दुकानदार के अकाउंट में ऑनलाइन ट्रांसफर किए गए, तब तक देर हो चुकी थी. 

आजतक के रंजय सिंह की रिपोर्ट के मुताबिक, कानपुर के नानामऊ घाट पर हुई ये घटना शनिवार, 31 अगस्त की है. उन्नाव के रहने वाले यूपी स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी आदित्यवर्धन सिंह अपने दोस्तों के साथ गंगा नहाने गए थे. उनके दोस्तों का कहना है कि नहाते समय आदित्यवर्धन ने फोटो खींचने के लिए कहा. इस दौरान उनका पैर गंगा के गड्ढे में चला गया और वो डूबने लगे. उनके दोस्तों ने तुरंत घाट पर खड़े गोताखोरों से मदद मांगी.

पहले बचाने की बजाए गोताखोर पैसे मांगते रहे!

आदित्यवर्धन के दोस्तों का आरोप है कि गोताखोरों ने उन लोगों से पहले 10 हजार रुपये देने को कहा. उनके पास उस वक्त 10 हजार रुपये कैश नहीं थे. आदित्यवर्धन के दोस्तों का कहना है कि उन लोगों ने गोताखोरों से कहा कि वो लोग पैसे ऑनलाइन ट्रांसफर कर देंगे. 

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दोस्तों का आरोप है कि गोताखोरों ने पहले पास के एक दुकानदार के अकाउंट में 10 हजार रुपये ट्रांसफर कराए और फिर आदित्यवर्धन को बचाने के लिए आगे बढ़े. लेकिन तब तक देर हो चुकी थी. आदित्यवर्धन गंगा नदी में कहीं नजर नहीं आए, गोताखोरों को वो नहीं मिले.

वहीं जिस दुकानदार के अकाउंट में पैसे ट्रांसफर कराए गए थे, उसका कहना है कि गोताखोरों का अपना कोई अकाउंट नहीं  था, इसलिए उसके अकाउंट में पैसे ट्रांसफर कराए गए थे. लेकिन जब आदित्यवर्धन नहीं मिले, तो उन्होंने पैसे तुरंत वापस कर दिए. ये पूछे जाने पर कि गोताखोर पहले डूबते शख्स को बचा लेते, फिर पैसे मांगते. इस पर दुकानदार ने कहा, ‘जब कोई दिखता, तो बचा लेते’.

आदित्यवर्धन सिंह की पत्नी शैलजा मिश्रा महाराष्ट्र में जज हैं. आदित्यवर्धन के चचेरे भाई अनुपम सिंह बिहार में सीनियर IAS अधिकारी हैं और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सचिव हैं. अब तक आदित्यवर्धन की बॉडी नहीं मिली है. पुलिस-प्रशासन की ओर से तलाशी अभियान जारी है.

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