पंचांग पर चलती रही है यूपी पुलिस, पूर्व अधिकारियों ने दीं बेहद दिलचस्प वजहें
यूपी पुलिस के डीजीपी की तरफ से जारी एडवाइज़री में हिंदू पंचांग इस इस्तेमाल करने को लेकर सोशल मीडिया में हाय-तौबा मची है.

चंद्रयान-3 दो दिन बाद चांद की सतह पर लैंड कर सकता है. पूरी दुनिया की निगाहें ISRO और भारत पर लगी हैं. लेकिन इस बीच सोशल मीडिया पर ‘कृष्ण पक्ष’ और ‘शुक्ल पक्ष’ को लेकर बहस चल रही है. बहस की वजह है यूपी पुलिस के मुखिया की तरफ से जारी एक एडवाइज़री. इसे लेकर सोशल मीडिया पर कई लोग यूपी पुलिस पर सवाल खड़े कर रहे हैं.
दरअसल एडवाइज़री में यूपी के कार्यवाहक डीजीपी विजय कुमार ने अधिकारियों को पंचांग के हिसाब से अपराध रोकने का निर्देश जारी किया है. सोशल मीडिया पर कई लोगों का कहना है कि सैटेलाइट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दौर में पुलिस हिंदू पंचांग के भरोसे काम करने जा रही है. सोशल मीडिया पर यूपी पुलिस पर उठाए जा रहे सवालों के पीछे सच क्या है, आइए आपको बताते हैं.
एडवाइज़री में क्या लिखा है?
कार्यवाहक डीजीपी विजय कुमार के 14 अगस्त की एडवाइज़री में लिखा है कि पुलिस अधिकारी हिंदू पंचांग में कृष्ण पक्ष की अमावस्या (अंधेरी रात) से एक हफ्ते पहले और एक हफ्ते बाद ख़ास चौकसी बरते. अधिकारी डायल 112 पर आए कॉल्स के हिसाब से घटित घटनाओं की क्राइम मैपिंग कराएं. एडवाइज़री में कहा गया है कि कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि से 1 सप्ताह पहले और 1 सप्ताह बाद रात में सबसे अधिक घटनाएं होती हैं. इस एडवाइज़री के साथ अधिकारियों को हिंदू पंचांग की कॉपी भी मुहैया कराई गई है.
पूर्व डीजीपी ने क्या बताया?
उत्तर प्रदेश पुलिस के डीजीपी रहे विक्रम सिंह ने दी लल्लनटॉप को बताया कि अंधेरी रात और उजाली रात के हिसाब से काम करने का पुलिस का तरीक़ा अंग्रेजों के ज़माने से चला आ रहा है. डकैती, लूट और नकबजनी की घटनाएं अंधेरी रात में ज़्यादा दर्ज होते रहे हैं. डीजीपी के इस लेटर से पहले कई बार बड़े अधिकारियों की तरफ से अंधेरी रात में पुलिसिंग पर ख़ास ध्यान रखने को लेकर निर्देश जारी किए जाते रहे हैं.
विक्रम सिंह ने क्राइम मैपिंग पर बताया,
"प्रेडिक्टिव पुलिसिंग में संवेदनशील जगह और संवेदनशील समय पर पुलिसिंग पर ख़ास चौकसी रखी जाती रही है. पंचांग पर सवाल करना औचित्यहीन है क्योंकि अंधेरी रात की जानकारी इससे आसानी से हो जाती है."
पूर्व आईपीएस ने बड़ी बात बताई
यूपी पुलिस में 35 साल काम कर रिटायर हो चुके आईपीएस अधिकारी राजेश पांडेय भी पंचांग पर सवाल को ग़लत मानते हैं. राजेश पांडेय ने 1993-94 की घटना का ज़िक्र करते हुए बताया कि जब वो जौनपुर और आजमगढ़ में सीओ सिटी थे, तब वरिष्ठ अधिकारियों की तरफ से एक कैलेंडर छाप कर दिया जाता था. उसमें अंधेरी पक्ष और उजाले पक्ष का बाक़ायदा ज़िक्र रहता था. सभी थानाध्यक्षों को ये निर्देश था कि वो अपने कमरे में इस कैलेंडर को सामने लगाए रखें और गश्त टीम तैयार करने में इसका ख़्याल रखें कि कब अंधेरी पक्ष है.
आगे राजेश पांडेय बताते हैं कि कृष्ण पक्ष में गश्त में कम से कम एक सब इंस्पेक्टर की ड्यूटी लगानी ज़रूरी होती थी क्योंकि इस दौरान अपराध की घटनाएं ज़्यादा घटती थीं. उन्होंने भी यूपी पुलिस के पंचांग वाली एडवाइज़री पर सवाल खड़े किए जाने को ग़लत बताया.
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