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यूपीः रेप के बाद बच्ची की मौत पर परिवार इंसाफ मांगने पहुंचा तो एसपी ने थप्पड़ जड़ दिए!

एसपी बोले- इतनी मार मारूंगा...

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14 अक्तूबर 2021 (अपडेटेड: 14 अक्तूबर 2021, 08:13 AM IST)
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यूपी के आजमगढ़ में पीड़ित परिवार वाले थाने में शिकायत दर्ज न होने पर जब एसपी के पास पहुंचे तो उन्होंने एक युवक को पकड़कर थप्पड़ जड़ दिए. (फोटो आजतक)
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एक बार फिर यूपी पुलिस का असंवेदनशील चेहरा सामने आया है. कुछ दिन पहले ही गोरखपुर में मनीष गुप्ता हत्याकांड और फिर लखीमपुर में हुई हिंसा को लेकर यूपी पुलिस की किरकिरी हुई थी. अब आजमगढ़ (Azamgarh) में एक पुलिस अधिकारी का वीडियो वायरल हो रहा है. इसमें एसपी साहब न्याय की गुहार लगा रहे लोगों पर ही गुस्सा निकालते नजर आ रहे हैं. वायरल वीडियो में दिख रहा है कि एसपी एक शख्स को पकड़ पकड़कर खींच रहे हैं, चांटे लगा रहे हैं. कॉलर पकड़कर खींचा, लगाए थप्पड़ मामला यूपी के आजमगढ़ जिले के रौनापार थाने का है. आजतक की खबर के मुताबिक, कुछ गांववाले अपनी शिकायत लेकर एसपी के पास पहुंचे थे. उनका आरोप है कि उनके परिवार की 8 साल की लड़की का रेप कर उसे सड़क पर फेंक दिया गया था. अस्पताल में इलाज के दौरान लड़की की मौत हो गई. इसके बाद पीड़ित परिवार और कुछ गांववाले शिकायत दर्ज कराने के लिए थाने पहुंचे. उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई. बार-बार थाने के चक्कर काटकर थक चुके पीड़ित न्याय की आस में एसपी ऑफिस पहुंचे. एसपी के यहां शिकायत करके जैसे ही वो लोग बाहर आए तो कुछ लोगों ने विरोध जताना शुरू कर दिया. इसके बाद आजमगढ़ के एसपी पीड़ित पक्ष के एक युवक को हड़काने लगे. उसे पकड़कर खींचते हुए ले गए. कई थप्पड़ भी जड़ दिए. परिवार के बाकी लोग छोड़ देने की गुहार लगाते रहे. लेकिन एसपी साहब नहीं रुके. वीडियो में एसपी कहते सुनाई दे रहे हैं कि -
"इतनी मार मारूंगा कि तुम्हें ठीक कर दूंगा."
इतना ही नहीं, एसपी उस युवक को कॉलर पकड़कर बीच सड़क से होते हुए पुलिस अधीक्षक कार्यालय में ले गए. (मामला रेप का है, इसलिए हम आपको वीडियो नहीं दिखा रहे हैं.) इस वीडियो पर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया हुई. लोगों के अलावा विपक्ष भी हमलावर हो गया. समाजवादी पार्टी ने वीडियो ट्वीट करते हुए घटना की आलोचना की. दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की. पुलिस ने सफाई में क्या कहा? जब मामले के वीडियो वायरल हुए और हंगामा शुरू हुआ तो आजमगढ़ पुलिस की तरफ से स्पष्टीकरण दिया गया. दावा किया गया कि वो युवक एसपी की कार के आगे लेट गया था. कुछ लोग पत्थर मारने आ गए थे. इस वजह से उसे पकड़कर ले गए थे. आज़मगढ़ पुलिस ने अपने ऑफिशियल ट्विटर अकाउंट से ट्वीट करते हुए लिखा,
"दिनांक 13/10/21 को जनसुनवाई के दौरान थाना रौनापार के कुछ लोगों द्वारा दिए गए प्रार्थना पत्र पर तत्काल एसपी आजमगढ़ के द्वारा मुकदमा पंजीकृत कराने हेतु आदेश दिया गया. इसके बावजूद उन लोगों द्वारा एसपी के वाहन के आगे लेट जाना व पथराव करने के प्रयास के संबंध में एसपी का आधिकारिक वक्तव्य."
आजमगढ़ के एसपी सुधीर कुमार सिंह ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि,
"बुधवार को रौनापार थाना क्षेत्र के कुछ पुरुष और महिलाएं जन सुनवाई के दौरान मुझसे मिले थे. उनकी जो एप्लीकेशन थी, उस पर मुकदमा पंजीकृत करने का आदेश तत्काल कर दिया गया था. जन सुनवाई के उपरांत जब मैं बाहर निकला तो मेरी गाड़ी के आगे एक कम उम्र का लड़का लेट गया. जिसके बाद कुछ लोग पत्थर मारने के लिए सामने आ गए. उसी पर मेरे द्वारा गाड़ी से उतरकर उसको गाड़ी के सामने से हटाकर उसे ऑफिस में लाकर पूछताछ करके कुछ देर बाद छोड़ दिया गया. इसमें कुछ लोगों ने राजनैतिक लाभ लेने के लिए इस तरह का ट्वीट किया है. सोशल मीडिया पर इसमें कोई सत्यता नहीं है."
पीड़ितों का कहना है कि स्थानीय थाने पर लड़की के साथ दुष्कर्म की घटना की सूचना दी गई. मौत के बारे में भी बताया गया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई. इसी के बाद वो एसपी ऑफिस पहुंचे थे. बहरहाल पीड़ित परिजनों के साथ आजमगढ़ पुलिस के व्यवहार से एक बार फिर यूपी पुलिस को सवालों के कटघरे में आ गई है. हालांकि गुरुवार 14 अक्टूबर की दोपहर आज़मगढ़ पुलिस ने ट्विटर पर जानकारी दी कि मामले में आरोपी दीपक को गिरफ्तार कर लिया गया है और इसमें कोई भी कार्यवाही शेष नहीं है.  

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