पिछले दो दिन से मौसम खराब है. बरसात, आंधी और ओले भी गिरे हैं. सीधे देखो तो मौसम रोमांटिक रहेगा. बूंदाबांदी होगी. कारे कजरारे बादल छाए रहेंगे. समोसे विद चटनी. बेसन कटहल की पकौड़ी. और ढेर सारा चटपटा खाने का मन होगा. हो सकता है शाम को दोस्तों के साथ दारू की महफिल जम जाए. फेसबुक पर ऐसी पोस्ट्स की बाढ़ आएगी. wow.. आज मौसम बड़ा बेईमान है. मौसम की खबरें अब ऐसे चलती हैं. जब बेमौसम बरसात हो.
लेकिन बेमौसम की बरसात किसी के लिए सच में बेईमान होती है. किसान. उसकी फसलें सरकारी छुट्टा उधारी, किस्मत और भगवान के अलावा बरसात भरोसे हैं. बचपन से हमको पढ़ाया गया "भारतीय खेती मौसम का जुआ है." इस बार भी खेती का नुकसान हुआ है. भले वो मीडिया में बहस का हिस्सा न बना हो. संसद में इस पर बात हुई है. बहस हुई है. इसलिए हमको भी जानना चाहिए कि आखिर ये मौसम रोमांटिक रहने के अलावा और क्या क्या रहा. किसान के लिए. किसान और जवान अपने देश में ऐसे हैं कि इनके बारे में एक लाइन में बात हो जाती है. किसान जो आत्महत्या कर रहे हैं. जवान, जो बॉर्डर पर शहीद हो रहे हैं. इसके आगे दिमाग लगाओ गुरू. काम की चीजें निकलेंगी. हम बरसात और किसान की बात करेंगे.
संसद में हंगामा कटा पड़ा है. तो ये भी पता होगा कि हर साल किसानों के लिए ढेर सारा धन वन मिलता है बजट में. तमाम योजनाएं आती हैं. लेकिन फिर भी अब तक इन योजनाओं और बजट से किसान को फायदा हुआ है 23 परसेंट. मने कुछ ज्यादा नहीं है ये. इस साल आई है प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना. उम्मीद है इससे कुछ हालात सुधरेंगे.
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना क्या है
इसके साथ दिल्ली सीएम अरविंद केजरीवाल भी किसानों के लिए कुछ कर रहे हैं. हालांकि दिल्ली में किसानी खेती तो कहने भर की है. लेकिन जो है उसके लिए तो कुछ करना ही पड़ेगा न. उनका ट्वीट देखो. जिसमें मौसम से खराब हुई फसलों के लिए सरकार खर्च देगी.
https://twitter.com/ArvindKejriwal/status/709307022697566208
फिर हमने नंबर लगाया पंजाब के देवेंद्र का. उधर तो सब मामला बिल्टा पड़ा है. गेहूं के खेत पूरे गिर कर पटरा हो गए. इस आंधी बारिश में. सरसों, चना और प्याज की फसलें. सबका भारी नुकसान हुआ है. गिनती सर्वे चल रहा है. आंकड़े आने बाकी हैं.
आजमगढ़, यूपी के सुभाष ने बताया कि चना 30 परसेंट मार गया है. मटर जो घर आ गई सो आ गई. खेत में थी नहीं. खलिहान पहुंच चुकी थी. वो लीद हो गई. 25 परसेंट लगभग सरसों भी खराब हुई.
यूपी के अमेठी से अर्जुन सिंह. बहुत बड़े खेतिहर हैं. अपने इलाके में पहली बार नई टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर खेती शुरू की. अवॉर्ड वगैरह भी कई बटोर चुके हैं. उनसे बात हुई. वो बताते हैं गेहूं पहुड़(लेट) गया है आंधी में. सरसो कटने के नगीच थी. वो गई. अरहर उधर होती नहीं. कोई बोता भी नहीं. लेकिन इतने में ही सब निपट गया.
नासरीगंज, बिहार से सुरेश सिंह ने बताया कि नॉर्थ बिहार में ज्यादा नुकसान हुआ है. फसलें उधर भी यही हैं. गेहूं, चना, मसूर वगैरह. जो किसान जितना बड़ी, उतनी तगड़ी चोट. कुल जमा किस्सा ये कि एक दिन की बारिश दो तीन महीनों की मेहनत, पैसा और आगे सालों साल की प्लानिंग चौपट कर देती है.
कितने मोर्चे पर लड़ते हैं किसान
खेती की जरूरत सबको है. नहीं तो दुनिया खाएगी क्या? भारत की 71 परसेंट जनता की रोटी ही नहीं रोजी भी खेती है. लेकिन इसकी राह में रोड़े बहुत हैं. जैसे
खेती की ट्रेनिंग. अभी बहुत ज्यादा काम नहीं हुआ है इस तरफ. कि मौसम और मिट्टी और माहौल के हिसाब से खेती करना सिखाया जाए. फिर
जमीन का बंटवारा. अभी तक देहात में ऐसा है कि किसान की जमीन का एक टुकड़ा दिल्ली तो दूसरा दौलताबाद. ईर तीर की खेती में ही खर्च हो जाते हैं किसान. उसके बाद
रेट का झंझट. लागत और मेहनत के बाद जितनी कीमत फसल की उनको मिलनी चाहिए उतनी मिलती नहीं. बड़ी प्रॉब्लम हैं
प्राइवेट बिचौलिए. जाकर धड़ से तौला लेते हैं औने पौने. अपनी मर्जी के दाम लेकर बेचते हैं.
साधन की समस्या भी है.
भंडारण की भी. फसल बच जाए तो रखे कहां जो सिक्योर रहे. अगर गल्लामंडी तक पहुंचा दे तो वहां भी रखने का जुगाड़ नहीं. कितना ही अनाज गल्ला मंडी में सड़ जाता है हर साल.
खेती पर बेस्ड इंडस्ट्री की कमी है. जो पैदावार को डायरेक्ट किसान से खरीद सकें. सरकार को हेल्प करनी ही पड़ेगी हर काम में. और फिर खेती में पैसा फंसाने के लिए किसान को कर्ज लेना होता है. वो कर्ज लेने का काम टेढ़ा है. मिलता मुश्किल से है. उगाही में बैंक तड़तड़ी किए रहते हैं. और लास्ट में
मौसमी मार. सूखा, बाढ़ और तूफान. इनसे बचकर घर आ जाए अनाज तब समझो सब ठीक है.
किसान आत्महत्या कर रहे हैं. ये बात कहते हुए एक दया टाइप की दिखाते हैं लोग. लेकिन उससे आगे बढ़ने की कोशिश की कुछ लोगों ने. जैसे नाना पाटेकर, अक्षय कुमार. नाना पाटेकर ने एक NGO के साथ मिल कर एक लक्ष्य रखा. आत्महत्या कर चुके विदर्भ के किसानों की विधवाओं से मिले. उनको 15-15 हजार के चेक दिए. तकरीबन 60 विधवाओं की मदद की. अक्षय कुमार ने भी करीब 90 लाख रुपए डोनेट किए.
इन फसलों के घर आने से पहले खर्चा तय होता है. बेटी का ब्याह होना है. बड़की बुआ के बेटे का मुंडन है. उसमें देनी लेनी करनी है. गांव में पूजा है. उसका चंदा देना है. मां बापू को तीरथ जाना है रिसीकेस. उसका सब इंतजाम. बहुत काम हैं भाईसाब. अपने किसी रिश्तेदार से फोन करके पूछ लो. उनके पास करने को बहुत कुछ है. लेकिन जिस उम्मीद पर ये सब होना है. वो एक दिन की बारिश में बह जाती है. मीडिया और सोशल मीडिया में सिर्फ एक लाइन चलती रह जाती है. देश में किसान आत्महत्या कर रहा है.