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मुंबई हमले के मास्टरमाइंड को हर महीने डेढ़ लाख रुपये क्यों देगा पाकिस्तान?

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की प्रतिबंध समिति ने दी अनुमति.

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मुंबई आतंकी हमले के मास्टरमाइंड कहे जाने वाला जकीउर रहमान लखवी 2015 से जमानत पर जेल से बाहर है. (फाइल फोटो)
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डेविड
11 दिसंबर 2020 (Updated: 11 दिसंबर 2020, 11:52 AM IST)
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जकीउर रहमान लखवी. मुंबई के 26/11 आतंकी हमले के मास्टरमाइंड्स में से एक. अब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद यानी UNSC की प्रतिबंध समिति ने इस बात की परमिशन दे दी है कि लखवी को खर्च के लिए हर महीने डेढ़ लाख पाकिस्तानी रुपये दिए जाएं. इसमें खाने के लिए 50 हज़ार, दवाइयों के लिए 45 हज़ार, पब्लिक यूटिलिटी चार्जेस के लिए 20 हज़ार, वकील की फीस के लिए 20 हज़ार और आने-जाने के लिए 15 हज़ार रुपये शामिल हैं. इंडिया टुडे की गीता मोहन की रिपोर्ट के मुताबिक, आतंकवादियों की लिस्ट में नाम आने के बाद लखवी की संपत्ति और बैंक खाते सीज कर दिए गए थे. सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान की सरकार ने उसके खाते से मासिक भुगतान किए जाने को लेकर विचार करने के लिए अनुरोध किया था. पाकिस्तान सरकार के इस अनुरोध को UNSC 1267 अलकायदा प्रतिबंध समिति ने सहमति दे दी है. लखवी 2015 से जमानत पर बाहर है. ऐसी खबरें आई थीं कि पाकिस्तानी जेल में कैद रहने के दौरान उसे सभी तरह की सुविधाएं मिलती थी. बाहर से आए लोगों के साथ बैठकें किया करता था. यहां तक कि जेल में रहने के दौरान वह पिता तक बन गया.

परमाणु वैज्ञानिक को भी मिलेंगे पैसे!

इसके अलावा UNSC  समिति ने प्रतिबंधित परमाणु वैज्ञानिक महमूद सुल्तान बशीरुद्दीन को भी हर महीने पैसे भेजने की पाकिस्तान की अपील स्वीकार कर ली. वो उम्माह तामीर-ए-नौ के संस्थापक और निदेशक रहे हैं. पाकिस्तान के परमाणु उर्जा आयोग के लिए काम किया. बशीरुद्दीन अफ़ग़ानिस्तान में ओसामा बिन लादेन से भी मिले थे. उन्हें पाकिस्तान की नवाज शरीफ सरकार ने सितारा-ए-इम्तियाज़ (पाकिस्तान के तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान) से नवाज़ा था. बशीरुद्दीन अभी पाकिस्तान में स्वतंत्र रूप से रहते हैं.

UNSC का नियम क्या है?

एक अधिकारी ने बताया,
UNSC के नियमों के मुताबिक, इस तरह की रिक्वेस्ट को तभी खारिज किया जाता है जब सभी 15 सदस्यों को इस पर आपत्ति हो. प्रक्रिया के अनुसार देश 1267 UNSC समिति के सामने अनुरोध करता है. यदि सभी 15 सदस्यों की ओर से अगले तीन दिनों के भीतर कोई आपत्ति नहीं दर्ज कराई जाती तो यह अनुमति मिल जाती है. चूंकि सभी सदस्यों को आपत्ति दर्ज करानी होती है ऐसे में एक या दो आपत्तियों से फर्क नहीं पड़ता.
साथ ही, अधिकारी ने बताया कि 'जरूरी खर्चों' के ऐसे मामलों में आमतौर पर UNSC समिति के सदस्य तब तक आपत्ति नहीं करते हैं जब तक कि राशि बहुत ज्यादा ना हो. यह पहली बार नहीं है जब UNSC की ओर से नामित व्यक्तियों के लिए इस तरह के अनुरोध को मंजूरी दी गई है. अगस्त 2016 में इसी प्रावधान के तहत हाफिज सईद को 'जरुरी खर्च' की भी अनुमति दी गई थी. हालांकि लखवी के मामले में कोई यह तर्क दे सकता है कि 1.5 लाख पाकिस्तानी रुपये (6,500 USD लगभग) एक ऐसे देश के लिए पर्याप्त राशि है जहां औसत आमदनी इससे बहुत कम है.

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