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अफगानिस्तान में खिंचाई इस फोटो में ऐसा क्या है जो UN वालों को 'सॉरी' बोलना पड़ा?

तालिबान के झंडे को अभी तक वैश्विक स्तर पर मान्यता नहीं मिली है.

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21 जनवरी 2023 (अपडेटेड: 21 जनवरी 2023, 04:58 PM IST)
United Nations apologises for photo of its personnel in front of Taliban flag
इसी वायरल फोटो पर विवाद हुआ है. (साभार-सोशल मीडिया)
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संयुक्त राष्ट्र संघ (United Nations) से जुड़े कर्मचारियों की एक फोटो सोशल मीडिया पर वायरल है. इस फोटो को लेकर तगड़ा विरोध हो रहा है. असल में फोटो में कर्मचारी तालिबानी झंडे के सामने खड़े हैं. तालिबान (Taliban) के झंडे को अभी तक वैश्विक स्तर पर मान्यता नहीं मिली है, इसीलिए भी इस फोटो पर विवाद हुआ. हालांकि अब यूएन ने इस फोटो को लेकर माफी मांगी है. 

संयुक्त राष्ट्र की डिप्टी सेक्रेटरी जनरल अमीना मोहम्मद 17 जनवरी को चार दिन के लिए अफगानिस्तान पहुंची थीं. उनके साथ यूएन वूमन की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर सीमा बाहौस और यूएन के राजनीति विभाग की असिस्टेंट सेक्रेटरी जनरल खालेद अमीरी भी थे. अब इस डिलिगेशन की सुरक्षा में तैनात जवानों ने तालिबान के झंडे के साथ खींचकर फोटो डाल दी.

इसके बाद फोटो को लेकर अफगानिस्तान से लेकर दुनियाभर में कई जगहों पर विरोध हुआ. सोशल मीडिया पर भी लोगों का गु्स्सा निकला. अफगानिस्तान में तालिबान के विरोधी गुट नेशनल रेजिस्टेंट फ्रंट ऑफ अफगानिस्तान के नेता अली मैजम नाजरी ने भी ट्वीट किया. उन्होंने लिखा,

 "काबुल में एक आतंकी संगठन के झंडे के साथ तस्वीर लेकर UN कर्मियों ने संयुक्त राष्ट्र की निष्पक्षता और अखंडता को सवालों के घेरे में ला दिया है. हम एंटोनियो गुटेरस से कहना चाहते हैं कि वह इस मामले की जांच कराएं, क्योंकि ऐसी असंवेदनशील फोटो संयुक्त राष्ट्र की प्रतिष्ठा को धूमिल कर सकती हैं."

आलोचना के बाद संयुक्त राष्ट्र ने इस पर माफी मांगी है. संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरस के प्रवक्ता फरहान हक ने 21 जनवरी से मीडिया से बात करते हुए कहा,

"वह तस्वीर कभी नहीं ली जानी चाहिए थी. यह साफ तौर से एक चूक है. यह एक गलती थी और हम इसके लिए माफी मांगते हैं. अधिकारी तस्वीर लेने वाले कर्मचारियों से बात करेंगे."

दरअसल अफगानिस्तान में सत्ता में आने के बाद तालिबान ने देश के झंडे में भी बदलाव किया. तालिबान का अपनाया गया नया झंडा सफेद रंग का है और उस पर शहादा लिखा है. इससे पहले अफगानिस्तान का झंडा हरे और लाल रंग का था. दुनिया के कई देशों ने तालिबान के नए झंडे को मान्यता नहीं दी है.

वहीं सत्ता में आने के बाद से ही तालिबान पर मानवाधिकार हनन के आरोप लगे. महिलाओं के लेकर तालिबान के रवैये पर भी सवाल खड़े होते रहे हैं. इसी को देखते हुए 17 जनवरी से 20 जनवरी तक के अपने दौरे पर UN डेलिगेट अमीना मोहम्मद ने तालिबान सरकार के नेताओं के सामने महिलाओं की शिक्षा और काम करने पर लगे प्रतिबंधों पर चिंता जाहिर की. साथ ही अफगानिस्तान में मानवाधिकार उल्लंघन की घटनाओं पर भी बात हुई.

अफगानिस्तान ने महिलाओं की शिक्षा और राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय गैर सरकारी संस्थाओं के लिए काम करने पर प्रतिबंध लगा दिया है. साथ ही अफगानिस्तान में महिलाओं के पार्क, जिम आदि में जाने पर भी पाबंदी लगा दी गई है. संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि अफगानिस्तान सरकार के इस फैसले से गैर सरकारी संगठनों में काम कर रही लाखों महिलाएं प्रभावित होंगी.

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