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किसानों से माफी मांगने के सवाल पर प्रेस कॉन्फ्रेंस छोड़कर चले गए मोदी के मंत्री

राव साहब दानवे चीन-पाकिस्तान भूल गए

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केंद्रीय मंत्री रावसाहब दानवे ने चीन-पाकिस्तान के किसान आंदोलन से कनेक्शन की बात से पल्ला झाड़ लिया है. उन्होंने कहा कि उनके बयान को गलत तरह से पेश किया गया. (फाइल फोटो)
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अमित
15 दिसंबर 2020 (अपडेटेड: 16 दिसंबर 2020, 05:55 AM IST)
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किसान आंदोलन का पाकिस्तान-चाइना कनेक्शन बताने वाले मोदी सरकार के मंत्री राव साहब दानवे से पत्रकारों ने फिर से किसान आंदोलन पर राय पूछ ली. लेकिन इस बार उन्होंने इस पूरे विवाद का ठीकरा मीडिया के सिर पर ही फोड़ दिया. उन्होंने कहा कि चाइना-पाकिस्तान वाले उनके स्टेटमेंट को मीडिया में गलत तरीके से पेश किया गया. वह बोले कि मैं तो देश के किसानों के बारे में गलत बोल ही नहीं सकता, क्योंकि मैं खुद एक असली किसान हूं. इसके लिए उन्होंने कई तर्क दिए.
माफी की बात पर प्रेस कॉन्फ्रेंस से उठकर चले गए
मंत्री राव साहब दानवे की इस बात पर जब पत्रकारों ने उनसे पूछा कि अगर ऐसा है तो क्या वह अपने पुराने बयान पर किसानों से माफी मांगने को तैयार हैं? इस पर मंत्री जी प्रेस कॉन्फ्रेंस से उठकर ही चले गए. इससे पहले वह पत्रकारों को तरह-तरह के तर्क देकर यह समझाते नजर आए कि वह खुद अपनी दिनचर्या के हिसाब से किसान हैं. उन्होंने कहा
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केंद्रीय मंत्री राव साहब दानवे ने खुद को असली किसान बताया लेकिन चीन-पाकिस्तान के बयान पर माफी नहीं मांगी.

क्या बोला था पहले
आंदोलन कर रहे किसानों से जब सरकार की बात हुई थी, तब औरंगाबाद में बीजेपी के मंत्री राव साहब दानवे ने ये बयान दिया था. केंद्रीय मंत्री दानवे ने 9 दिसंबर को औरंगाबाद में कहा था कि दिल्ली के पास चल रहे किसान आंदोलन के पीछे पाकिस्तान और चीन का हाथ है.
राव साहब दानवे ने 32 सेकेंड के वीडियो में कहा था,
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राव साहब दानवे (बाएं) मोदी सरकार में राज्यमंत्री हैं. किसानों के आंदोलन को उन्हें चीन और पाकिस्तान से जोड़ दिया था.

केंद्रीय मंत्री राव साहब दानवे जालना के तकली कोलतेगांव के प्राथमिक आरोग्य केंद्र के उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे थे. वहीं ये बयान दिया था. इसे लेकर काफी हंगामा भी हुआ था, लेकिन उन्होंने कभी भी न तो बयान पर खेद जताया और न ही माफी मांगी.
बता दें, नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का दिल्ली के बॉर्डर पर प्रदर्शन 20वें दिन में पहुंच गया है. दिल्ली-एनसीआर में पारा लगातार गिरता जा रहा है, लेकिन किसानों की मांगों पर गतिरोध बढ़ता ही जा रहा है. सिंघु, टिकरी और गाजीपुर बॉर्डरों पर डटे किसान नए कानूनों को रद्द करने से कम पर राजी नहीं हैं.

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