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किसानों से बात करने के लिए आगे आए नितिन गडकरी, कही ये बड़ी बातें

अन्ना हजारे क्या किसान आंदोलन में शामिल होने वाले हैं?

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केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने किसानों को लेकर कई बड़ी बातें कही हैं. फोटो- ट्विटर/PTI
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Varun Kumar
15 दिसंबर 2020 (अपडेटेड: 15 दिसंबर 2020, 01:27 PM IST)
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नितिन गडकरी. केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री हैं. बीजेपी के कद्दावर नेता है. अपनी साफ बयानी के लिए जाने जाते हैं. पिछले 20 दिनों से सड़कों पर डटे किसानों से बातचीत के लिए अब गडकरी आगे आते दिख रहे हैं. अभी तक केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ही किसानों के साथ बातचीत कर रहे थे. क्या कहा नितिन गडकरी ने? नितिन गडकरी ने मीडिया के साथ बातचीत करते हुए कहा कि फिलहाल कृषि और वाणिज्य मंत्री किसानों के साथ बातचीत कर रहे हैं. अगर मुझसे बातचीत के लिए कहा जाएगा तो जरूर मैं उनसे बात करूंगा. उन्होंने कहा,
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"हम उचित बदलावों के लिए तैयार हैं" नितिन गडकरी ने कहा कि हमारी सरकार किसानों को समझाने का प्रयास कर रही है, बातचीत के लिए रास्ता निकालने की कोशिशें की जा रही हैं. उन्होंने कहा,
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आंदोलन में शामिल होंगे अन्ना? समाजसेवी अन्ना हजारे क्या किसान आंदोलन में शामिल होने वाले हैं? इस सवाल के जवाब में केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री ने कहा,
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https://twitter.com/nitin_gadkari/status/1338502354316845057 बातचीत पर जोर नितिन गडकरी ने किसानों के साथ बातचीत पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि किसानों के साथ नाइंसाफी नहीं होगी. सरकार किसानों के जो भी अच्छे सुझाव हैं, उन्हें कानून में समाहित करेगी. किसानों को इन कानूनों के समझना चाहिए क्योंकि कुछ लोग किसानों को भ्रमित करने की कोशिशें कर रहे हैं. उन्होंने कहा,
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गडकरी ने कहा कि अगर अधिक भाव मिल रहा है तो मंडी में बेचो. जहां अधिक भाव मिल रहा है,  वहां बेचो. किसान खुद तय करे कि वो कहां बेचना चाहता है. इस मामले में यही हो रहा है लेकिन कुछ लोग किसानों को भ्रमित कर रहे हैं. फार्मेसी वाला दवा के रेट तय करता है, होटल वाला खाने-पीने के रेट तय करता है, रेलवे और एयरलाइन्स टिकट के रेट तय करते हैं लेकिन किसान अपनी फसल के रेट नहीं तय करता. उन्होंने कहा कि अगर किसान हर बिंदू पर बात करने के लिए तैयार है तो सरकार भी तैयार है. "नक्सली की फोटो आंदोलन में क्यों?" नितिन गडकरी ने कहा,
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केंद्रीय मंत्री ने कहा कि विदर्भ में जमीन बंजर पड़ी है. वहां कोई किसान को कहे कि मैं सब करूंगा और आपको पैसे भी दूंगा तब? कॉन्ट्रैक्ट फॉर्मिंग गलत है क्या? कोई टैक्सी में बैठता है तो मालिक थोड़े ही बन जाता है? पेप्सी ने एक प्रोजेक्ट डाला था. आलू का भाव वो बाजार से ज्यादा देते थे तो किसान उनको बेचता था. हमें कोई आपत्ति नहीं है कि किसान मंडी में बेचे. किसान को पूरा अधिकार है.

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