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डिफेंस बजट 2025: सेनाओं को वित्त मंत्री ने क्या दिया? बीते साल से 61 हजार करोड़ की बढ़ोतरी

Union Defence Budget 2025: इस साल के बजट में सबसे बड़ा आवंटन रक्षा क्षेत्र में किया गया है.

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1 फ़रवरी 2025 (अपडेटेड: 1 फ़रवरी 2025, 03:27 PM IST)
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रक्षा क्षेत्र को बजट का सबसे अधिक हिस्सा आवंटित किया गया है (PHOTO-PTI/INDIA TODAY)
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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए बजट (Budget 2025-26) पेश किया है. ये बजट मोदी सरकार (Modi govt) के तीसरे कार्यकाल या यूं कहें कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार का पहला बजट है. बजट में वित्त मंत्री ने कई एलान किए हैं. साथ ही डिफेंस सेक्टर को लेकर भी कई एलान किए गए हैं. इस बार वित्त मंत्री ने 2025 के बजट में डिफेंस सेक्टर के लिए 6 लाख 81 हजार 210 करोड़ का प्रावधान किया गया है.

बीते वर्ष पेश किए गए बजट में डिफेंस सेक्टर के लिए 6.2 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे. 2025 में इसमें लगभग 61 हजार करोड़ की बढ़ोतरी देखने को मिली है. साथ ही वित्त वर्ष 2025-26 में 4 लाख 91 हजार 732 करोड़ रुपये के व्यय यानी खर्चे का अनुमान लगाया गया है. इस साल के बजट में सबसे बड़ा आवंटन रक्षा क्षेत्र में किया गया है. बजट के बाद देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मीडिया को बताया

वित्त वर्ष 2025-26 में डिफेंस मिनिस्ट्री को 6 लाख 81 हजार करोड़ से अधिक का आवंटन किया गया है. ये पिछले बजट से 9.5 प्रतिशत अधिक है. पूरे बजट का 13.44 प्रतिशत डिफेंस बजट है. 1 लाख 80 हजार करोड़ का आवंटन हमारी सेनाओं की क्षमता बढ़ाने के लिए किया गया है. डिफेंस बजट में आधुनिकीकरण का 75 प्रतिशत हिस्सा स्वदेशी प्रोक्योरमेंट पर खर्च किया जाएगा. 

इसके अलावा भूतपूर्व सैनिकों के परिवारों को स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लिए 8 हजार 300 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है. साल 2025 की शुरुआत में ही रक्षा मंत्री ने कहा था कि देश की सेनाओं के लिए ये 'बड़े सुधारों' का साल (Year Of Reforms) होने वाला है. बीते वर्ष भारत ने 1.26 लाख करोड़ का डिफेंस प्रोडक्शन किया था जो अपने आप में अभूतपूर्व था. कुल 21 हजार 083 करोड़ के रक्षा उत्पादों का एक्सपोर्ट भी किया गया था. 

रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार भारत को कंपटीशन में बने रहने के लिए रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) पर खर्च बढ़ाना चाहिए. अमेरिका जैसे देश रिसर्च एंड डेवलपमेंट पर अपने रक्षा बजट का 13 फीसदी खर्च करते हैं. भारत के सामने पाकिस्तान और चीन की चुनौतियां बरकरार हैं. ऐसे में भारत को रिसर्च एंड डेवलपमेंट पर और ध्यान देने की जरूरत है. सेनाओं के अलावा बॉर्डर पर इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए 6 हजार 500 करोड़ का प्रावधान किया गया है. समुद्री सीमा की रक्षा के लिए भारतीय तटरक्षक बल (Indian Coast Guard) को 7 हजार 651.80 करोड़ आवंटित किए गए हैं. इसके अलावा डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट आर्गेनाइजेशन (DRDO) को 23 हजार 855 करोड़ आवंटित किए गए हैं.

2025 का बजट देखें तो इसका सिर्फ 27.66  प्रतिशत हिस्सा कैपिटल एक्सपेंडिचर के लिए रखा गया है. जबकि बाकी का पैसा सैलरी, पेंशन जैसी पर खर्च किया जाएगा. विशेषज्ञों के मुताबिक भारत के तेजस मार्क 2 और एडवांस मल्टीरोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) जैसे जरूरी प्रोजेक्ट्स को रफ्तार देने के लिए बजट में कैपिटल एक्सपेंडिचर को बढ़ाए जाने की जरूरत है जिससे हर रोज सिर उठा रही चुनौतियों से निपटने के लिए भारत तैयार रहे. 

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