जब भारत पाकिस्तान का विभाजन हुआ तो कई मुसलमान पाकिस्तान नहीं जा पाए. पर रहना वोपाकिस्तान में चाहते थे. बिहार, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के ये मुसलमान जाकरबांग्लादेश में बस गए. फिर बांग्लादेश का भी विभाजन हुआ. तब इन्हें पाकिस्तान जानापड़ा क्योंकि बांग्लादेश में हिंसा बढ़ गई थी. उस वक़्त पाकिस्तान के समर्थक ये बिहारीकतई नहीं चाहते थे कि बांग्लादेश बने. इसी वजह से बाद में वहां इनसे कुछ अच्छासुलूक न किया जाता था. तो हल ये निकला कि 70 और 80 के दशक तक लोग बंगलादेश से लोगपाकिस्तान में बसने जाते रहे. 1974 में जो पहुंचे थे उनके लिए चीजें सरल थीं, उनकेपास देश छोड़ने और पाकिस्तान में बसने के कागज थे. लेकिन बाद के सालों में रैंडमपाकिस्तान जाने वालों के पास ये सब नहीं था. जाने वालों में ज्यादातर बिहार के थेऔर जाकर कराची में बस गए. पाकिस्तान की सरकार ने चाहा था कि इनका ढ़ंग का पुनर्वासहो जाए पर ज्यादातर कराची के ओरंगी टाउन, मजीद कॉलोनी, सेक्टर 36-बी लांधी,बहादुरबाद, न्यू कराची और सुरजनी टाउन इलाकों में बस गए. अभी क्या हो रहा है कि एकओर्गनाइजेशन है नादरा माने National Database and Registration Authority वो तमामरहने वालों का रजिस्ट्रेशन कर रही है. समझ लो आधार कार्ड जैसा काम है. अब मान लीजिएकोई आदमी है जो सन 1970 या 1979 में पाकिस्तान आया हो. उसके पास न राशन कार्ड है, नदेश-प्रत्यावर्तन वाले कागज. तो उसका रजिस्ट्रेशन कैसे हो? नादरा वाले भी कहते हैं.ऐसे हम किसी का रजिस्ट्रेशन कैसे कर सकते हैं. जिनके कोई रिकॉर्ड ही नहीं हैं. येएलियंस जैसे हैं. संदिग्ध हैं अब वो न कार ले सकते हैं. न जॉब कर सकते हैं, ना हीबैंक में अकाउंट खोल सकते. सयानों के रिकॉर्ड न होने के कारण अगली पीढ़ी को भी वहीभुगतना होता है. मजीद कॉलोनी में रहने वाले ये भी बताते हैं कि जो कागज पत्तर थे भीवो भी मजीद कॉलोनी में हुए हमलों से बच नहीं सकते. हथियार बंद हमारे घर जला दियाकरते थे.