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यूएन में ईरान के लिए खेल गए रूस-चीन, होर्मुज खोलने का आखिरी रास्ता वीटो से बंद कर दिया

बहरीन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को खोलने का एक प्रस्ताव पेश किया था. इस प्रस्ताव को चीन और रूस ने वीटो कर दिया. इस प्रस्ताव के पक्ष में 11 वोट पड़े, जबकि कोलंबिया और पाकिस्तान ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया.

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7 अप्रैल 2026 (अपडेटेड: 7 अप्रैल 2026, 11:34 PM IST)
Iran strait of hormuz russia china bahrain security council
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज खुलवाने के प्रस्ताव पर चीन और रूस ने वीटो कर दिया है. (तस्वीरें- पीटीआई और इंडिया टुडे)
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अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को खोलने के लिए ईरान को चेतावनी दी है. ईरानी सभ्यता को मिटाने की. चेतावनी की मियाद खत्म होने में कुछ घंटे बाकी हैं. इस बीच संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को खोलने से जुड़ा एक प्रस्ताव आया था. प्रस्ताव बहरीन की ओर से लाया गया था, जिस पर चीन और रूस ने वीटो कर दिया है. यानी प्रस्ताव पास नहीं हो पाया.

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, बहरीन की ओर से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में आए प्रस्ताव के पक्ष में 11 वोट पड़े, जबकि कोलंबिया और पाकिस्तान ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया. बहरीन ने इस प्रस्ताव को बनाने में खाड़ी सहयोग परिषद के सदस्य देशों और जॉर्डन की मदद ली थी. इस प्रस्ताव में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खुलवाने के लिए सभी डिफेंसिव उपाय अपनाने का जिक्र किया गया था. यानी सैन्य कार्रवाई को छोड़कर बाकी सारे डिप्लोमैटिक उपाय.

बहरीन ने शुरुआती प्रस्ताव में ‘सभी जरूरी उपायों’ के इस्तेमाल का जिक्र किया था. संयुक्त राष्ट्र की भाषा में इसमें सैनिक कार्रवाई भी शामिल होती. रूस, फ्रांस और चीन ने इस प्रस्ताव की भाषा का विरोध किया. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में इन तीनों देशों के पास वीटो पावर है. इनकी आपत्तियों के बाद प्रस्ताव में बदलाव किया गया. इससे आक्रमक कार्रवाई से जुड़े सभी रेफरेंस हटा दिए गए. केवल डिफेंसिव तरीके से हॉर्मुज के खुलवाने का जिक्र किया गया. लेकिन फिर भी रूस और चीन ने इस प्रस्ताव पर वीटो कर दिया.

प्रस्ताव गिरने से खाड़ी देश नाराज

बहरीन का प्रस्ताव गिरने के बाद खाड़ी देशों ने नाराजगी जताई है. बहरीन के विदेश मंत्री अब्दुल लतीफ बिन राशिद अल जयानी ने सुरक्षा परिषद में बहरीन, यूएई, सऊदी अरब, कतर, कुवैत और जॉर्डन का बयान पढ़ा. इसमें प्रस्ताव गिरने पर निराशा जताई गई है. उन्होंने कहा,

 आपके सामने पेश किया गया प्रस्ताव पास नहीं हो सका. परिषद एक अवैध गतिविधि को रोकने के मामले में अपनी जिम्मेदारी निभाने में असफल रही. हॉर्मुज खोलने के लिए बिना किसी देरी के बड़ी कार्रवाई की जानी जरूरी थी.

रूस और चीन के वीटो के बाद अमेरिका और उसके सहयोगियों के पास कानूनी तौर पर ईरान को रोकने का रास्ता बंद हो गया है. कुछ घंटों में ट्रंप की डेडलाइन खत्म होने वाली है. यूएन से कोई सहयोग नहीं मिला है. अब सवाल है कि क्या अमेरिका और इजरायल बिना यूएन की मंजूरी के कोई बहुत बड़ी सैन्य कार्रवाई करने जा रहे हैं?

वीडियो: दुनियादारीः 'सुपरपावर' की सुपर फजीहत, हॉर्मुज संकट में ट्रंप ने चीन तक से मदद मांग ली?

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