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ब्रिटेन की दीवारों को लाल सलाम मत करो 'पानरेड'

इंडिया विमल के 25 साल पूरे होने पर सेलिब्रेट कर रहा है. उधर ब्रिटेन में बवाल मचा पड़ा है. वहां प्रशासन हाथ जोड़ रहा है कि भैया शहर की दीवारों को लाल सलाम न करो.

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आशुतोष चचा
4 अप्रैल 2016 (अपडेटेड: 4 अप्रैल 2016, 11:15 AM IST)
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भारतीयों ने अपने तरीके से बदला लिया है अंग्रेजों से. हमेशा. कभी पिच्चर में क्रिकेट में हरा कर. तो कभी गांधी जी और अंग्रेजों वाले जोक्स बना कर. इस बार ब्रांड न्यू तरीका निकाला है. ब्रिटेन की गलियों, चौराहों, चबूतरों, झरोखों और कोनों को लाल बहादुर बना कर. पान थूक कर इस कदर लाल देह लाली लसाई है कि वहां प्रशासन मजबूर हो गया है. दीवारों पर "पान खाकर न थूकें" वाले पोस्टर लगाए हैं. न मानने पर 80 पाउंड का जुर्माना. देखो अइसा है कि पान चबाना इंडिया में कोई फैशन नहीं है. कल्चर है कल्चर. जो मरे मराए ही छूटता है. उसकी वजह से यहां का हर चौक तो लाल चौक रहता ही है. ब्रिटेन में भी ये जलवा आम हो गया है. वहां रेस्टोरेंट में पान बिकता है. पान की अलग दुकानें भी हैं. सहूलियत पूरी है. अब इंडियन ओरिजिन के लोग जहां हैं वहां हचक के पान खाया जाता है. और थूका भी. जैसे लाइसेस्टर शहर. वहां भारतीय मूल के लोगों की आबादी बहुत है. इस शहर के स्पोक्समैन बताते हैं कि "हांजी, हमको पता है कि प्रॉब्लम बड़ी है. इससे हाईजीन का खतरा है और दाग धब्बों का. हम लोगों को जागरुक करेंगे. कि ऐसा करना कितना बुरा है." "पिछले साल हमारी सफाई करने वाली टीमें उधर गई थीं. लग के साफ सफाई की. स्प्रे सिस्टम से दाग छुड़ाए. लेकिन आसान काम तो है नहीं. छक्के छूट जाते हैं दाग छुड़ाने में." भारतीय मूल के लोग सब पान खवैया हों ऐसा तो है नहीं. कुछ लोग हैं जिनको ये पिचकारी वाला हुनर बहुत घटिया लगता है. हिंदुस्तान टाइम्स में ये खबर छपी है. उसी में उनके दिल के उद्गार भी हैं. कहते हैं "ये इंडिया का कल्चर है. पीढ़ी दर पीढ़ी चलता है. वहीं तक ठीक है. बलग्रेव जैसे शहर को तो बख्श दो. इन लोगों को सीखने की जरूरत है कि कैसे थूकना है." 2013 में ब्रिटेन में पब्लिक हेल्थ का खयाल रखने वाले डिपार्टमेंट ने इससे जागरुकता के लिए कैंपेन शुरू किया था. अब फिर से वो कैंपेन लॉन्च करने की तैयारी है. ताकि लोग तमीज सीख लें थूकने की.

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