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अब उज्जैन में भी दुकानदारों को लगानी होगी नेम प्लेट, यहां तो मोबाइल नंबर भी लिखना होगा

उत्तर प्रदेश में कांवड़ यात्रा को लेकर दुकानदारों के लिए एक नया नियम जारी हुआ, नाम लिखने का. मध्य प्रदेश के Ujjain के Mayor ने भी अब यही किया है, कहा- इस आदेश का मकसद मुस्लिम दुकानदारों को निशाना बनाना नहीं है. इसके पीछे की क्या वजह बताई उन्होंने?

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21 जुलाई 2024 (अपडेटेड: 21 जुलाई 2024, 10:39 AM IST)
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उज्जैन के मेयर ने दिया नेमप्लेट लगाने का आदेश (सांकेतिक फोटो- PTI)
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उत्तर प्रदेश के बाद मध्य प्रदेश के उज्जैन में भी दुकान के मालिकों को अपने नाम और फोन नंबर वाली नेमप्लेट लगाने के लिए कहा गया है (Shopkeeper Name plate Ujjain MP). उज्जैन के मेयर ने कहा कि आदेश को ना मानने वालों पर दो हजार रुपये जुर्माना लगाया जाएगा. दूसरी बार उल्लंघन पर पांच हजार रुपये का जुर्माना तय किया गया है.

इससे पहले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कांवड़ यात्रा वाले रास्तों पर पड़ने वाली खाने-पीने की दुकानों पर उनके मालिकों का नाम लिखने का आदेश दिया था. राज्य सरकार की ओर से कहा गया है कि कांवड़ यात्रियों की आस्था की शुचिता बनाए रखने के लिए ये फैसला लिया गया है.

न्यूज एजेंसी PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, उज्जैन के मेयर मुकेश ततवाल ने कहा,

इस आदेश का मकसद सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है. ना कि मुस्लिम दुकानदारों को निशाना बनाना.

आगे बोले,

उज्जैन की मेयर-इन-काउंसिल ने साल 2002 में ही दुकानदारों को अपना नाम डिस्प्ले करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी थी. बाद में उसे आपत्तियों और औपचारिकताओं के लिए राज्य सरकार के पास भेज दिया गया था. सब औपचारिकताएं पहले ही पूरी हो गई हैं. इम्प्लिमेंट करने में देरी हुई क्योंकि पहले नेमप्लेट को एक ही रंग और आकार का रखने का नियम था. अब हमने इस नियम में ढील दे दी है. अब बस नाम और मोबाइल नंबर दिखना जरूरी है.

मेयर ने आगे कहा,

उज्जैन एक धार्मिक और पवित्र शहर है. लोग यहां धार्मिक आस्था के लिए आते हैं. उन्हें उस दुकानदार के बारे में जानने का अधिकार है जिससे वो सामान ले रहे हैं.

BJP के सहयोगी ही तंज कसने लगे

इस मामले को लेकर विपक्ष के साथ-साथ BJP के सहयोगी ही उसपर सवाल उठाने लगे हैं. LJP अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने PTI के साथ बातचीत की. बोले,

गरीबों के लिए काम करना हर सरकार की जिम्मेदारी है जिसमें समाज के सभी वर्ग जैसे दलित, पिछड़े, ऊंची जातियां और मुस्लिम भी शामिल हैं. जब भी जाति या धर्म के नाम पर इस तरह का विभाजन होता है, मैं न तो इसका समर्थन करता हूं और न ही इसे प्रोत्साहित करता हूं. मुझे नहीं लगता कि मेरी उम्र का कोई भी शिक्षित युवा ऐसी चीजों से प्रभावित होता है. मैं केंद्र और राज्य दोनों सरकारों के सामने अपनी आपत्तियां उठाऊंगा.

BJP की एक और सहयोगी पार्टी RLD ने भी योगी आदित्यनाथ के इस फैसले पर सवाल उठाया है. पार्टी के राष्ट्रीय सचिव अनुपम मिश्रा ने द इंडियन एक्सप्रेस से कहा,

खाद्य सुरक्षा नियमों के मुताबिक, हर भोजनालय को केवल अपना नाम और अपने उत्पादों की डीटेल को डिस्पले करना होता है. अगर नियम लागू करना है तो इसे लाल या हरे सिंबल के साथ शाकाहारी और मांसाहारी में डिवाइड किया जाना चाहिए, जैसे खाने के पैकेट पर होता है. हमारे देश में अलग-अलग समुदायों के लोग हैं और सद्भाव बनाए रखा जाना चाहिए.

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अनुपम मिश्रा ने कहा कि वो इस मुद्दे को केंद्र और राज्य में उठाएंगे.

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