UAE ओपेक के गुट से बाहर हो गया, सऊदी को झटका पर भारत को फायदा ही फायदा
UAE 12 फीसदी हिस्सेदारी के साथ OPEC में सबसे ज्यादा तेल पैदा करने वालें देशों में एक है. अब UAE पर OPEC की पाबंदी लागू नहीं होगी और वो अपने हिसाब से ऑयल प्रोडक्शन करेगा. इससे OPEC का मार्केट पर नियंत्रण कमजोर होगा. भारत के लिए भी ये फायदेमंद है.

संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने तेल पैदा करने वाले देशों के संगठन OPEC से बाहर निकलने का फैसला किया है. 1 मई 2026 को UAE की OPEC से विदाई हो जाएगी. अबू धाबी ने OPEC+ को छोड़ने का फैसला किया है. यह कदम ऐसे समय पर उठाया गया, जब अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच तनाव है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने से ऑयल सप्लाई भी चरमराई हुई है. UAE के दोनों संगठनों से बाहर निकलने से ग्लोबल ऑयल मार्केट का आकार बदल सकता है.
1960 में ईरान, इराक, कुवैत, सऊदी अरब और वेनेजुएला ने पेट्रोलियम निर्यातक देशों का संगठन (OPEC) बनाया था. बाद में और भी देश इस संगठन से जुड़ते गए. दुनिया भर की तेल सप्लाई पर इस संगठन का दबदबा रहता है. 2016 में OPEC ने रूस समेत उसके नेतृत्व वाले 10 गैर-OPEC देशों के साथ मिलकर OPEC+ बनाया था. यह ऑयल एक्सपोर्ट करने वाले देशों का और भी बड़ा संगठन है.
UAE का बाहर निकलना Saudi के लिए बड़ा झटकाUAE का बाहर निकलना OPEC का दरकना दिखाता है. OPEC के असल लीडर सऊदी अरब के लिए यह बड़ा झटका है. OPEC के सदस्य देशों पर तेल प्रोडक्शन की लिमिट लागू होती है. ये देश सिर्फ तय कोटा के हिसाब से ही ऑयल प्रोडक्शन कर सकते हैं. OPEC से निकलने के बाद UAE पर यह पाबंदी लागू नहीं होगी. UAE अपनी मर्जी से जितना चाहे, उतना तेल निकाल सकता है.
UAE की यही आजादी OPEC के लिए खतरा बन सकती है. 12 फीसदी हिस्सेदारी के साथ UAE इस ग्रुप में सबसे ज्यादा तेल पैदा करने वालें देशों में एक है. तेल प्रोडक्शन पर पाबंदी दुनिया भर में ऑयल सप्लाई और तेल की कीमत कंट्रोल करने के लिए थी. अब UAE पर ये पाबंदी लागू नहीं होगी और वो अपने हिसाब से ऑयल प्रोडक्शन करेगा. इससे OPEC का मार्केट पर नियंत्रण कमजोर होगा.
ब्रेंट अभी भी 110 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर है, इसलिए बाजार OPEC के अंदरूनी बदलावों के बजाय सप्लाई में रुकावटों पर ज्यादा रिएक्ट कर रहा है. UAE के ऊर्जा मंत्री सुहैल अल मजरूई ने कहा कि इस कदम से देश को प्रोडक्शन के फैसलों में ज्यादा फ्लेक्सिबिलिटी मिलेगी. उन्होंने यह भी साफ किया कि UAE ने यह फैसला खुद किया और सऊदी अरब समेत दूसरे सदस्यों के साथ इस पर चर्चा नहीं की गई थी. उन्होंने कहा,
"यह प्रोडक्शन लेवल से जुड़ी मौजूदा और भविष्य की पॉलिसी पर ध्यान से देखने के बाद लिया गया नीतिगत फैसला है."

यह कदम OPEC के अंदर लंबे समय से चल रहे तनाव को दिखाता है. UAE अपनी प्रोडक्शन कैपेसिटी बढ़ा रहा है और अपने ऑयल सेक्टर में भारी इन्वेस्ट कर रहा है, लेकिन OPEC की प्रोडक्शन कटौती ने UAE मजबूर किया कि वह असल में कितना प्रोडक्शन और एक्सपोर्ट कर सकता है. फिलहाल, UAE के पास लगभग 48.5 लाख बैरल प्रति दिन की कैपेसिटी है. 2027 तक इसे 50 लाख बैरल प्रति दिन तक बढ़ाने का प्लान है. UAE के लिए इन पाबंदियों को सहना मुश्किल होता जा रहा है.
UAE के OPEC से हटने से तुरंत कोई बड़ा असर नहीं दिखेगा. इसकी सबसे ज्यादा सप्लाई स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर गुजरती है. होर्मुज बंद है. UAE प्रोडक्शन तो बढ़ा सकता है, लेकिन चाहकर भी ज्यादा तेल सप्लाई नहीं कर सकता. लॉन्ग टर्म में इसके बड़े नतीजे सामने आ सकते हैं, जब ऑयल प्रोडक्शन को लेकर OPEC देशों और UAE का टकराव होगा.
भारत पर क्या असर होगा?भारत एक बड़ा ऑयल इंपोर्टर है. अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए भारत बड़े पैमाने पर तेल के इंपोर्ट पर निर्भर है. UAE के OPEC से बाहर निकलने पर भारत के पास तेल के ऑप्शन का दायरा बढ़ेगा. UAE ज्यादा प्रोडक्शन करेगा, तो भारत के पास उससे तेल खरीदने का ऑप्शन रहेगा. मार्केट में ज्यादा तेल आएगा, तो कीमत में कमी आ सकती है. माने, सस्ते तेल का फायदा भारत को भी मिल सकता है. भारत लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) का भी एक बड़ा हिस्सा UAE से खरीदता है.
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तेल पैदा करने वाले देश OPEC जैसे ग्रुप के फैसलों से बंधे रहने के बजाय ज्यादा से ज्यादा प्रोडक्शन और रेवेन्यू बढ़ाने पर ध्यान दे रहे हैं. UAE भी ग्लोबल सप्लाई में अपनी भूमिका बढ़ाने पर फोकस करता दिख रहा है. 2030 तक 150 बिलियन डॉलर (करीब 14.21 लाख करोड़ रुपये) का प्रोग्राम समेत UAE के बड़े इन्वेस्टमेंट प्लान हैं.
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