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बेटा पैदा होने की चाहत रखने वालों, खबरदार ऐसा कतई न करना

ऐसी सोच कितनी खतरनाक है. ये जानकर दंग रह जाएंगे. कहीं आपके इलाके में तो ऐसा नहीं हो रहा है.

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18 जुलाई 2017 (अपडेटेड: 18 जुलाई 2017, 12:41 PM IST)
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दिल दहलाने वाली खबर होती है कि बेटे की चाहत में बेटी को मार डाला. या फिर पड़ोसी के लड़के की जान ले ली. ये चाहत नहीं बल्कि हवस है. बच्चे पैदा करने को लेकर लोग एक दूसरे के धर्मों पर तो कटाक्ष करते हैं, लेकिन आज भी लोग उस दकियानूसी समाज को संभाल कर रखना चाहते हैं जिसके लिए बेटे का होना ज़रूरी है. अगर ऐसा न होता तो बेटे की चाहत में किसी मासूम की जान लेने से पहले कातिलों के दिल दहलने चाहिए थे. ऐसी ही खौफनाक खबर एक बार फिर सामने आई है. बेटे की चाहत में पड़ोसी के 2 साल के मासूम की बलि दे दी गई. रोंगटे खड़े हो जाते हैं सुनकर.
इन खौफनाक मौतों के पीछे वो तांत्रिक होते हैं, जिनके पर्चे आपको दीवारों, बसों या फिर कहीं और छपे मिल जाएंगे, जो दावा कर रहे होंगे. बेटा होने का पक्का इलाज. सौतन से छुटकारा. बच्चे पैदा करने का गारंटी से इलाज. इलाज होना चाहिए, लोगों का नहीं बल्कि इन तांत्रिकों का. जो अंधविश्वासी लोगों को ही नहीं, बल्कि आम लोगों को भी अपनी बातों में उलझाकर आसानी से निशाना बना लेते हैं.
पढ़िए ये खौफनाक मौतें, और लोगों को समझाने की कोशिश करिए, ताकि बेटे की चाहत रखने वाले लोग तांत्रिकों के शैतानी जाल से बच सकें.

बेटे की चाहत में, पड़ोसी के बेटे के जिस्म में पिनें चुभोकर मार डाला

पड़ोसी के बेटे की जान लेने का मामला मध्यप्रदेश के इंदौर का है. डीआईजी हरिनारायणचारी मिश्रा का कहना है कि इस मामले में एक प्राइवेट स्कूल के बस ड्राइवर दिलीप बागरी (36) और उसकी दो पत्नियों संतोष बाई (28) और पुष्पा (30) को गिरफ्तार किया गया है. तीनों गढ़ी बिल्लौदा गांव के रहने वाले हैं.
मिश्रा ने बताया कि बागरी ने पहले सज्जन बाई से शादी की थी. 12 साल पहले डिलिवरी के दौरान सज्जन बाई की मौत हो गई थी. स्कूल बस ड्राइवर को इस महिला से दो बेटियां थीं. लेकिन बागरी को तो बेटा चाहिए था. उसने दूसरी शादी की. उससे भी बेटा नहीं हुआ. फिर तीसरी शादी की उससे भी बेटा नहीं हुआ.
9 जून को बागरी और उसकी बीवियां संतोष और पुष्पा एक तांत्रिक के पास पहुंचे. तांत्रिक ने उनपर अपनी जादुई बातों का जाल फेंका. तांत्रिक के कहने पर तीनों ने अपने पड़ोसी के 2 साल के बच्चे यश को किडनैप कर लिया. आधी रात आई. बागरी और उसकी बीवियों ने कागज में लगाई जाने वाली नुकीली पिनें बेरहमी से बच्चे के जिस्म में चुभानी शुरू कर दीं.
दर्द से परेशान बच्चा जब बुरी तरह रोने लगा तो कपड़े से उसका मुंह दबा दिया गया, ताकि उसकी चीखें घर से बाहर न जा सकें. दम घुटने से बच्चे की मौत हो गई. मगर उन तीनों का दिल नहीं पिघला, करीब तीन घंटे तक मासूम के जिस्म से बर्बरता करते रहे.

बेटा चाहिए था, इसलिए मां ने ही तीन महीने की बच्‍ची को जिंदा जला दिया

साल 2014. अक्टूबर में उत्तर प्रदेश में महोबा के बसौरा गांव से खबर आई थी. एक मां ने अपनी ही बेटी को बेटे की चाहत में मार दिया था. राजकली के कोई बेटा नहीं था. वो बेटे की चाहत में तांत्रिकों के पास भटक रही थी. राजकली ने जिस खौफनाक कारनामे को अंजाम दिया उसका गवाह आठ साल का उसका भतीजा बना. राजकली के भतीजे ने पुलिस को जो बताया सुनकर कंपकंपी छूट जाती है. उसने बताया, '
'चाची राजकली ने अपनी बेटी पर केरोसिन डाला और फिर आग लगा दी. उस वक़्त चाचा घर पर नहीं थे.'
जब पुलिस ने राजकली को पकड़ा तो उसे ज़रा भी दुःख नहीं था. राजकली ने पुलिस से कहा कि उसने बेटे की चाहत में ऐसा किया. और अब उसे यकीन है कि वह बेटे को जन्म देगी. बेटे को जन्म का नहीं पता पुलिस ने उसे जेल पहुंचा दिया.

बाप ने बेटी के दोनों कान काट दिए

23 जून को दिल्ली के जीटीबी इंकलेव में रहने वाला अमृत बहादुर ने अपनी बच्ची के कान काट लिए, क्योंकि उसे बेटा चाहिए. बेटे की चाहत में पागल बाप बेटी का गला भी काटकर मारने वाला था, वो तो पड़ोसियों ने बचा लिया. नेपाल का रहने वाला अमृत बहादुर पिछले 17 सालों से दिल्ली में रह रहा है. वो गाड़ियां साफ़ करता है. तरक्की के लिए एक तांत्रिक के पास भी जाता था. कान काट लेने के बाद बच्ची को मां ने जीटीबी अस्पताल में भर्ती कराया. डॉक्टरों के पूछने पर बच्ची की मां ने पूरी कहानी बताई और फिर पति के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया. जिसके बाद पुलिस ने अमृत को गिरफ्तार कर लिया.
बच्ची और उसके मां-बाप
बच्ची और उसके मां-बाप.

बच्ची का मां मंजू ने बताया कि उसका पति करीब 1.30 बजे शराब पीकर घर लौटा और आते ही कहने लगा कि कोई भूत उसे बच्ची के कान काटने को कह रहा है. इतने में चाकू उठाया और सामने बैठी बच्ची का पहले एक और फिर तुरंत दूसरा कान काट दिया. पुलिस का कहना था कि बच्ची के कान तब काटे गए, जब वो जाग रही थी और अगर उसकी मां उसे तुरंत अस्पताल लेकर नहीं भागती तो वो मर भी सकती थी.
तांत्रिकों के चक्कर में आकर किसी इंसान या फिर किसी जानवर पर भी की गई हिंसा, हमारे पिछड़ेपन को लगातार सामने ला रही है. ये पहली बार नहीं है कि जादू-टोने और तथाकथित भूत-प्रेतों से मुक्ति के लिए तांत्रिकों के आगे सर झुकाकर सब कुछ करने के लिए तैयार हो जाते हैं. हैरानी होती है कि ये कैसा मोह है, जो बेटे की चाहत में अपनी ही औलाद की बलि चढ़ा देते हैं. विश्व गुरु बनने के दावे करते हैं मगर अभी तक बेटे वाले दायरे से ही बाहर नहीं आए हैं. तभी तो कभी ससुराल में लड़की पर ज़ुल्म होता है. तो कभी पति अपनी बीवी को दोस्त के हवाले कर देता है. उसे लगता है शायद ऐसा करने से बेटा हो जाएगा. कभी भ्रूण में ही लड़की को मार दिया जाता है.
प्रदेश सरकारों को तांत्रिकों पर नकेल कसनी चाहिए. ताकि ये बेटे के झांसे में लोगों को मुजरिम बनने से रोक सकें.


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