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दादा के मर्डर का बदला लेने के लिए बच्चों ने किया रेप

एक 10 साल की बच्ची से उसके दादा का 'बकाया बदला' लिया जाता है. बच्ची उस वारदात के 4 साल बाद पैदा हुई थी. रेप करने वालों की उम्र है 14 साल और 15 साल.

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4 जुलाई 2016 (अपडेटेड: 4 जुलाई 2016, 12:12 PM IST)
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symbolic image. reuters
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बवंडर. सन 2000 में प्रदर्शित निर्देशक जगमोहन मूंदड़ा की इस फिल्म में नंदिता दास ने भंवरी देवी की केंद्रीय भूमिका निभाई थी. वही भंवरी देवी जो राजस्थान की सामाजिक कार्यकर्ता हैं. वे कुम्हार जाति से हैं. साथिन रहते हुए जयपुर के पास अपने गांव भटेरी में उन्होंने ऊंची जाति में बाल विवाह रोकने की कोशिशें की. इससे नाराज गांव के लोगों ने उनके परिवार का बहिष्कार किया. 1992 में खेत में काम करने के दौरान ऊंची जाति के पांच लोगों ने उनके पति पर हमला किया. उसके सामने भंवरी का रेप किया. इस रेप में कथित तौर पर दादा-पोता भी शामिल थे जिन्होंने बारी-बारी से ऐसा किया.
इतने साल हो गए लेकिन हमारी सोसायटी इस सोच से बुरी तरह बीमार बनी हुई है कि बदला लेने के लिए अपनी 'मर्दानगी' को तरजीह देती है. ये माशरे के बीमार होने की अलामत है. बदले की ऐसी कहानी दोहराई गई है यूपी के फिरोजाबाद में. एक मर्डर होता है. उसके 14 साल बाद बदला लेने के लिए 10 साल की बच्ची से रेप होता है.
पुलिस के मुताबिक, "संबंधित 10 साल की बच्ची के दादा ने 14 साल पहले एक मर्डर कर दिया था. उसका बदला लेने के लिए मरने वाले के पोते ने बच्ची से रेप किया. वो भी अपने दोस्त के साथ मिलकर." ये जुर्म बच्चों से कराया गया, क्योंकि जिस वक्त हत्या हुई उस वक्त रेप करने वाला बच्चा पैदा ही हुआ होगा. क्योंकि उसकी उम्र महज 14 साल है और उसके दोस्त की उम्र 15 साल है. ये रेप करने वालों की फैमिली की नीचता को दिखाता है कि उन्होंने उस बच्ची को निशाना बनाया जो उस वारदात के 4 साल बाद पैदा हुई. आरोपी किशोरों के परिवारों से पूछा जाए कि क्या बच्ची का रेप करने से दादा जी उठे हैं? जांच कर रहे पुलिस ऑफिसर प्रदीप यादव ने इस वारदात से हैरानी जताई. उन्होंने कहा है, 'मैंने आज तक ऐसा केस नहीं देखा'. लड़के लड़की को झाड़ियों के पीछे ले गए और उसके मुंह पर पट्टी बांधकर रेप कर डाला. आधे घंटे बाद लड़की की मां ने उसे खून से लथपथ पाया. लड़के ने अपना जुर्म कबूल करते हुए बताया कि उसने अपने दादा की हत्या का बदला लेने के लिए किया. पुलिस जांच कर रही है कि इस जुर्म को करने के लिए बच्चों को किसने उकसाया? बच्ची को आगरा के हॉस्पिटल रेफर कर दिया गया. उसकी हालत सीरियस है. इलाके का माहौल गर्माता देख पुलिस फोर्स तैनात कर दी गई है. इस बदले की आग ने बच्चों के दिमाग में जहर भर दिया. ये केस सोसायटी की गंद भरी सोच को सामने लाता है. आखिर उन बच्चों के दिमाग में ये आया कहां से कि अगर किसी लड़की के साथ जबरदस्ती संभोग करेंगे तो उससे उसकी बेइज्जती हो जाएगी? कि वो शर्म से भर जाएगी? कि उसके परिवार के लोगों की इज्जत मिट्‌टी में मिल जाएगी?
घरों, मुहल्लों, दुकानों, स्कूलों, विज्ञापनों से लेकर हर जगह महिला उपभोग की या फिर इज्जत की वस्तु है. जैसे चाहे इस्तेमाल करो. ये सोच एक बीमारी बन चुकी है. अगर कोई किसी के प्रति रेप जैसे अपराध को अंजाम देता है तो लोगों की नजरों की मार लड़की को झेलनी पड़ती है. इज्जत तो उसकी जानी चाहिए जिसने ने ये करतूत की. लेकिन अफसोस आपकी मानसिकता की वजह से वो अपमान में डूबी रहती है.
जैसा बर्ताव हम अपने देश के रेप पीड़ितों के साथ कर रहे हैं, उससे तो ये बुरा सिलसिला चालू रहेगा. आगे से ऐसे मामलों में प्लीज़, अपनी नजरें अपराध करने वाले की ओर रखें और जिसके साथ अपराध हुआ है उसे जितना सम्मान दे सकते हैं दें.

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