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देश के सबसे साफ शहर का तमगा बनाए रखने के लिए इंदौर नगर निगम ने दिल दुखाने वाला काम किया है

आलोचना के बाद दो कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया गया है.

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30 जनवरी 2021 (अपडेटेड: 30 जनवरी 2021, 03:01 PM IST)
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इंदौर की ये तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं. फोटो- आजतक
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मध्य प्रदेश के इंदौर से दिल दुखाने वाली तस्वीरें सामने आई हैं. आरोप है कि इंदौर नगर निगम के कर्मचारी, सड़क किनारे फुटपाथ पर रहने वाले बुजुर्गों और गरीबों को उठाकर गाड़ी में ले गए. इन लोगों को वो शहर से बाहर शिप्रा नदी के तट पर छोड़ना चाहते थे, लेकिन स्थानीय लोगों ने इसका विरोध किया और वीडियो बनाने लगे. मामला बढ़ता देख बुजुर्गों को रैन बसेरे में पहुंचाया गया. अब कांग्रेस इसको लेकर सरकार पर निशाना साध रही है. वहीं एमपी सरकार ने कुछ कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की है. अवार्ड की खातिर किया ये काम? इंदौर में स्वच्छ सर्वेक्षण 2021 का सर्वे शुरू होने वाला है. स्वच्छ सर्वेक्षण के तहत उन शहरों को चुना जाता है जो स्वच्छता के पैमानों पर खरे उतरते हैं. ऐसे शहरों को सम्मानित किया जाता है. आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय ने साल 2016 में शहरों की रैंकिंग की शुरुआत की थी. इंदौर लगातार 4 बार एक लाख से अधिक आबादी वाले शहरों की श्रेणी में, देश का सबसे साफ शहर चुना जा चुका है. अब इंदौर के सामने 5वीं बार नंबर वन होने की चुनौती है और ऐसे में नगर निगम कुछ भी करके इंदौर को सबसे साफ शहर दिखाना चाहता है. लेकिन क्या इसके लिए उसने फुटपाथ पर सोए बुजुर्गों और असहायों को शहर से बाहर निकालने की कोशिश की? वीडियो बनाने वाले राजेश जोशी का तो यही कहना है. उन्होंने कहा कि,
"मैं अपनी दुकान पर बैठा था जब नगर निगम की टीम आई थी और गरीब बुजुर्गों को गाड़ी में भरकर लाया गया था. इन लोगों ने बड़ी मुश्किल से हमारी बात मानी और बुजुर्गों को वापस लेकर गए. हमने वीडियो बना लिया था जब वो उन्हें उतार कर जा रहे थे."
वहीं इस मामले में नगर निगम के अपर आयुक्त अभय जलगांवकर ने कहा कि इन दिनों ठंड अधिक हो रही है और ऐसे में कई लोग सड़कों पर ही सो जाते हैं. ऐसे में नगर निगम के कर्मचारियों ने इन्हें गाड़ियों में ले जाकर रैन बसेरा पहुंचाया. उन्होंने कहा कि गाड़ियों के जरिए बुजुर्गों को शिप्रा नहीं ले जाया जा रहा था. हालांकि कुछ तो गड़गड़ हुई है लिहाजा दो कर्मचारियों को सेवा से हटा दिया गया है जिनके नाम बृजेश लश्करी और विश्वास बाजपेई हैं. अभय जलगांवकर ने कहा कि मामले की जांच भी कराई जाएगी. सरकार और विपक्ष भी आमने-सामने इस मुद्दे पर सरकार और विपक्ष भी आमने-सामने दिखाई दे रहे हैं. राज्य के प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की कोशिश की है. प्रदेश के पूर्व सीएम कमलनाथ ने अपने ट्वीट में कहा कि,
"मध्यप्रदेश के इंदौर में नगर निगम कर्मचारियों द्वारा बुजुर्गों के साथ किए गए अमानवीय व्यवहार ने प्रदेश को देश भर में शर्मसार किया है. इसके दोषियों पर सिर्फ़ निलंबन की कार्यवाही अपर्याप्त है. इसके दोषियों पर कड़ी से कड़ी कार्यवाही हो ताकि भविष्य में ऐसी घटना की पुनरावृत्ति ना हो व कार्यवाही नज़ीर बन सके."
इस मामले में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने भी ट्वीट कर एमपी सरकार को निशाने पर लिया है. उन्होंने एक वीडियो ट्वीट किया जिसमें नगर निगम के लोग बुजुर्ग महिलाओं को डंपर में भरते दिख रहे हैं. https://twitter.com/priyankagandhi/status/1355368544448380931 इस मामले में सरकार की किरकिरी होते देख कर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बचाव का प्रयास किया. उन्होंने कहा कि 'आज इंदौर में नगर निगम कर्मचारियों द्वारा वृद्धजनों के साथ अमानवीय व्यवहार के संबंध में मुझे जानकारी मिली. इस मामले में जिम्मेदार नगर निगम उपायुक्त सहित दो कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने और कलेक्टर इंदौर को बुजुर्गों की समुचित देखभाल करने का निर्देश दिया है.' उन्होंने अपने अगले ट्वीट में कहा कि
"बुजुर्गों के प्रति अमानवीय व्यवहार किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जायेगा. मेरे लिये नर सेवा ही नारायण सेवा है. हर वृद्ध को आदर, प्रेम और सम्मान मिलना चाहिए; यही हमारी संस्कृति है और मानव धर्म भी."
इस मामले में कांग्रेस के विधायक संजय शुक्ला ने तो पुलिस में शिकायत भी की. वे आईजी हरिनारायण चारी मिश्र के पास पहुंचे और अपहरण का मामला दर्ज करने की मांग की. आईजी ने बताया कि उन्होंने शिकायत ले ली है जिस पर जांच की जाएगी. सोनू सूद ने जारी किया वीडियो इस घटना के वीडियो वायरल होने पर अभिनेता सोनू सूद ने भी एक वीडियो जारी किया जिसमें बुजुर्गों के लिए शेल्टर की व्यवस्था कराने की बात कही. उन्होंने कहा,
"मैं अपने सभी इंदौरवासियों से गुजारिश करना चाहता हूं. मैंने एक खबर देखी कि बुजुर्गों को शहर से बाहर रखने का प्रयत्न किया गया. हम लोगों को मिलकर इनके लिए छत देने की कोशिश करनी चाहिए. मैं इन्हें इनका हक दिलाना चाहता हूं, इनके सर पर छत दिलाना चाहता हूं. उनके खाने पीने का प्रबंध, उनके ध्यान रखने का प्रबंध करना चाहता हूं. लेकिन ये आपके साथ के बिना बड़ा मुश्किल है."

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