करोड़ों का गबन कर भागे दो भारतीयों को इंटरपोल की मदद से पकड़ा, एक तो 20 साल से फरार था
एक तमिलनाडु और दूसरा गुजरात में अलग-अलग मामलों में वांछित था. दोनों लंबे समय से देश से फरार थे. लेकिन इंटरपोल के रेड नोटिस ने दोनों का खेल बिगाड़ दिया.

CBI की निगरानी में दो भगोड़ों को 24 घंटे के अंदर गिरफ्तार कर लिया गया. दोनों के खिलाफ इंटरपोल रेड नोटिस जारी था. एक तमिलनाडु और दूसरा गुजरात में अलग-अलग मामलों में वांछित था. दोनों लंबे समय से देश से फरार थे. लेकिन इंटरपोल के रेड नोटिस ने उनका खेल बिगाड़ दिया. एक को थाईलैंड से और दूसरे को अमेरिका से लौटते ही गिरफ्तार कर लिया गया.
87 करोड़ के पोंजी घोटाले का आरोपीतमिलनाडु पुलिस ने 87 करोड़ रुपये की पोंजी स्कीम में निवेशकों से धोखाधड़ी करने वाले जनार्दनन सुंदरम को बैंकॉक से भारत लाकर कोलकाता एयरपोर्ट पर गिरफ्तार किया. पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने जनार्दनन पर आपराधिक साजिश, विश्वासघात, धोखाधड़ी, जमा राशि पर ब्याज न लौटाने के आरोप के अलावा बैनिंग ऑफ अनरेगुलेटेड डिपॉजिट स्कीम्स एक्ट, 2019 के तहत मामला दर्ज किया था.
इंटरपोल ने 21 जून, 2023 को सीबीआई के अनुरोध पर रेड नोटिस जारी किया था. जनार्दनन 28 जनवरी, 2025 को बैंकॉक पहुंचा था, लेकिन रेड नोटिस के चलते उसे घुसने नहीं दिया गया. CBI ने इंटरपोल, भारतीय दूतावास और कोलकाता एयरपोर्ट प्रशासन से समन्वय कर उसकी भारत वापसी सुनिश्चित कराई. 29 जनवरी को कोलकाता एयरपोर्ट पहुंचने के बाद तमिलनाडु पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया.
20 साल से फरार गुजरात का कारोबारी गिरफ्तारदूसरे ऑपरेशन में, गुजरात पुलिस ने 77 करोड़ रुपये के धोखाधड़ी मामले में भगोड़े वीरेंद्रभाई मणिभाई पटेल को अहमदाबाद एयरपोर्ट पर गिरफ्तार किया. पटेल चारोतार नागरिक सहकारी बैंक, आनंद का निदेशक था और गुजरात पुलिस ने उसके खिलाफ 2002 में धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश का केस दर्ज किया था. दो साल बाद इंटरपोल ने 3 मार्च, 2004 को उसके खिलाफ रेड अलर्ट नोटिस जारी किया था. 29 जनवरी, 2025 को अमेरिका से अहमदाबाद एयरपोर्ट पर उतरते ही उसे इमीग्रेशन अधिकारियों ने रोक लिया. CBI के ग्लोबल ऑपरेशंस सेंटर ने गुजरात पुलिस और एयरपोर्ट प्रशासन से समन्वय कर उसकी गिरफ्तारी सुनिश्चित कराई. गुजरात पुलिस की टीम अहमदाबाद एयरपोर्ट पर पहुंची और उसे अपनी कस्टडी में ले लिया.
CBI भारत में इंटरपोल मामलों की नोडल एजेंसी है. उसने इन दोनों आरोपियों की धरपकड़ के लिए भारतीय दूतावासों, स्थानीय पुलिस और एयरपोर्ट अधिकारियों से कोऑर्डिनेशन किया. जिससे दोनों की गिरफ्तारी सुनिश्चित हो सकी.
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