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ये दो भाई 120 साल पहले भारत में लाए थे सबसे नशीला पदार्थ

आज इसे लिए बिना हममें से ज्यादातर की जिंदगी नहीं चल पाती.

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7 जुलाई 2017 (अपडेटेड: 8 जुलाई 2017, 07:39 AM IST)
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ऑगस्ट और लुई ल्यूमियर.
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धर्म की तरह पूजा जाता है हमारे यहां सिनेमा. दोनों ही 'अफीम' जैसा नशा देते हैं. बच्चे होते हैं तब से हमारी आंखें कार्टून्स और दूसरी फिल्मों पर ठिठक जाती हैं. बड़े होते हुए स्कूली लड़के-लड़कियां छुप-छुपकर सिनेमा देखने जाते हैं. जो नौकरीपेशा हैं वो नाइट शोज़ देखते हैं या वीकेंड पर परिवार के साथ थियेटर जाने की प्लानिंग करते हैं. आधा देश तो हीरो-हीरोइन बनने के सपने देख रहा है. सड़कों से लेकर प्लेन तक या अपने-अपने हैडफोन्स में सुबह से शाम तक फिल्मी गाने चलते रहते हैं. रही सही कसर फिल्मी डायलॉग पूरी कर देते हैं जिन्हें दोस्तों के बीच हम सुनते-सुनाते हैं. हमारी बॉडी में ख़ून के साथ सिनेमा भी बहता है.
लेकिन 7 जुलाई न होती, तो इंडिया में तस्वीर कुछ और होती. इस तारीख पर हमें भंडारा बांटना चाहिए, सबीलें करनी चाहिए, लंगर छकाना चाहिए. क्योंकि इसी दिन देश में सिनेमा की पहली झलक हमें देखने को मिली थी. लेकिन ऐतिहासिक घटना हुई तो दो भाइयों की गलती से. गलती से वो इंडिया को सिनेमा जैसा नशीला पदार्थ चखाकर चले गए और बाद में हमने खोज-खोज कर कंज्यूम किया.
ऑगस्ट और लुई ल्यूमियर.
ऑगस्ट और लुई ल्यूमियर. (फोटोः पिंटरेस्ट)

वो दो भाई थे फ्रांस में जन्मे ल्यूमियर ब्रदर्स. उन्होंने चलती फिल्में बनाईं जिन्हें वो पूरी दुनिया में फैलाना चाहते थे. इसकी शुरुआत उन्होंने ऑस्ट्रेलिया से करने की सोची. अपने एजेंट को तैयार किया. उनका एजेंट ऑस्ट्रेलिया जा रहा था. लेकिन हम हिंदुस्तानियों के प्रचंड नसीब में सिनेमा देखना लिखा था. लेकिन वो ऑस्ट्रेलिया नहीं जा पाए. एजेंट यानी मॉरिस सेस्टियर बंबई के वॉटसन होटल में रुक गए.
बंबई की धरोहर वाटसन होटल.
बंबई की धरोहर वाटसन होटल.

उन्होंने सोचा कि क्यों न ऑस्ट्रेलिया जाने के बजाय यहीं इंडिया में ही फिल्में दिखा दी जाए. उन्होंने ल्यूमियर ब्रदर्स से पूछा. वो मान गए और इस तरह 7 जुलाई 1896 को बंबई के वाटसन थिएटर में पहली बार कोई फिल्म चली.
इस फिल्म को 200 लोगों ने देखा था और हर दर्शक के लिए 2 रुपए की टिकट लगाई गई थी. 7 से 13 जुलाई तक छह फिल्में वाटसन थिएटर में चली. इसके बाद इनको बंबई के नॉवेल्‍टी थिएटर में दिखाया गया.

#ल्यूमियर ब्रदर्स की कहानी
वे फ्रांस में पैदा हुए. बचपन से दोनों भाइयों को साइंस में बड़ी दिलचस्पी थी. उनके पापा ने खूब सपोर्ट किया. मेहनत रंग लाने लगी. दोनों भाइयों ने मिलकर फोटोग्राफी का एक औजार बनाया. जिससे बाद में सिनेमैटोग्राफ ने जन्म लिया. और यही से सिनेमा शब्द आया. ल्यूमियर ब्रदर्स ने 1895 में Workers Leaving The Lumière Factory in Lyon नाम से एक फिल्म बनाई. इसे दुनिया की पहली चलती फिल्म माना जाता है.
फ्रांस के बाहर ल्यूमियर ब्रदर्स ने सिनेमैटोग्राफी की इस तकनीक के पेटेंट के लिए 18 अप्रैल 1895 में अर्जी दी. दुनिया भर में उनकी तकनीक के बारे में बातें होने लगीं. लोग बौरा गए. एकदम नई चीज़ थी सबके लिए. इसके बाद दोनों भाइयों ने इस दिशा में कई धांसू काम किए. कह सकते हैं कि आज अगर हम थिएटर में बैठकर पॉपकॉर्न खाते हुए 'बाहुबली' और 'दंगल' देख रहे हैं तो इन भाइयों की वजह से.
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