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डूबने की कगार पर पहुंच गया ये देश, डर के मारे लोग बच्चे पैदा नहीं कर रहे

दुनिया के सबसे छोटे देशों में शुमार Tuvalu के अस्तित्व पर खतरा पैदा हो गया है. Pacific ocean में नौ छोटे-छोटे द्वीपों में बसा यह देश global climate change के चलते डूबने की कगार पर है.

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tuvalu pacific ocean climate change sinking boundary
तुवालु के विदेश मंत्री ने COP26 के मंच से पहली बार दुनिया का ध्यान खींचा था. (Reuters)
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आनंद कुमार
25 सितंबर 2024 (अपडेटेड: 25 सितंबर 2024, 01:14 PM IST)
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साल 2021. COP26 का मंच. यहां एक वीडियो दिखाया गया. वीडियों में सूट और टाई पहन कर पानी में खड़ा एक शख्स दिख रहा था. वह विश्व के नेताओं से जलवायु परिवर्तन को लेकर जरूरी कदम उठाने का आग्रह कर रहा था. यह वीडियो वायरल हुआ. और इसने छोटे-छोटे द्वीपों पर बसे देशों और समुद्र के बढ़ते जल -स्तर के साथ उनके संघर्ष को सुर्खियों में ला दिया. इस वीडियो में दिख रहे शख्स का नाम साइमन कोफे था. साइमन कोफे दुनिया के सबसे छोटे देशों में शुमार तुवालु (Tuvalu) के विदेश मंत्री थे.

तुवालु प्रशांत महासागर (Tuvalu pacific ocean) के बीचो-बीच बसा एक देश है. यहां की आबादी 11 हजार से थोड़ा अधिक है. नौ छोटे-छोटे रिंग शेप द्वीपों (एटॉल) में बसे इस देश के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है. वैश्विक जलवायु परिवर्तन के चलते यह देश डूबने की कगार पर है. और इस डर से इस देश के लोग बच्चे पैदा करने से बच रहे हैं.

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, तुवालु की फुकानोई लाफाई परिवार बसाना चाहती हैं. लेकिन द्वीप के आसपास बढ़ते जलस्तर के चलते वे इस पर अमल नहीं कर पा रही हैं. क्योंकि वैज्ञानिकों का अनुमान है कि जब तक उनके बच्चे एडल्ट होंगे. तब तक उनके देश का अधिकांश हिस्सा जलमग्न हो जाएगा.

तुवालु की औसत ऊंचाई समुद्र तल से सिर्फ 2 मीटर यानी 6.56 फीट है. और पिछले तीन दशकों में यहां सी-लेवल में 15 सेमी की वृद्धि हुई है. जोकि वैश्विक औसत का डेढ़ गुणा है. अमेरिका की स्पेस एजेंसी नासा के वैज्ञानिकों का अनुमान है कि साल 2050 तक रोज आने वाले ज्वार भाटा के चलते फुनाफुटी के मुख्य द्वीप का आधा हिस्सा जलमग्न हो जाएगा. जहां तुवालु के 60 फीसदी लोग रहते हैं. यहां गांव के कुछ हिस्सों में लोग 20 मीटर की पतली सी जमीन की पट्टी पर बसे हुए हैं.

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तुवालु में परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं. तुवालु के लोग सब्जियां उगाने के लिए रेनवाटर टैंक और ऊंचाई पर बसाए गए बगीचों पर निर्भर हैं. क्योंकि खारे पानी की बाढ़ ने ग्राउंड वाटर को बर्बाद कर दिया है. 2023 में तुवालु ने ऑस्ट्रेलिया के साथ एक ऐतिहासिक जलवायु और सुरक्षा संधि की घोषणा की थी. जिसके मुताबिक, 2024 से प्रत्येक वर्ष तुवालु के 280 नागरिकों को ऑस्ट्रेलिया अपने यहां जगह देगा.

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