टर्की में तख्ता पलटने वाली थी फौज, 90 मौतों के बाद खुद पलट गई
रात भर टर्की की सड़कों पर घूमते रहे टैंकर, चलती रही गोलियां. प्रेसिडेंट को इसके पीछे एक धर्मगुरु के होने का शक.
Advertisement

फोटो - thelallantop
Quick AI Highlights
Click here to view more
यहां सोए थे तभी टर्की में सेना के एक गुट का तख्तापलट करने का प्लान फेल हो गया. इस गुट ने रात में अचानक से टर्की की राजधानी अंकारा पर हमला कर दिया. हमलावरों ने बमबारी करने के लिए हेलीकाप्टर का यूज किया. टैंक से भी लोगों पर गोलियां बरसाईं और बम फेंके. करीब 2 बजे अंकारा में एक बम विस्फोट भी हुआ था.
इस्तांबुल में बॉसपोरस पुल को क़ब्ज़े में ले लिया था. फिर पुलिस ने इनका सामना किया. जमकर भिडंत के बाद सेना कुछ देर में कमजोर पड़ गई और सरेंडर कर दिया. 1500 बागी सैनिकों को गिरफ्तार कर लिया गया है.
टर्की में रह रहे भारतीयों को घर में ही रहने की हिदायत दी गई है. इस हमले में पुलिसवालों समेत कुल 90 मौतें हो चुकी हैं. एक हजार से ज्यादा लोग घायल भी हुए हैं.
इस कारनामे के लिए टर्की के राष्ट्रपति रेकेप टायइप इर्डगन ने इस्लामी धर्मगुरु फ़तहुल्लाह गुलेन के समर्थकों पर आरोप लगाया है. साथ ही लोगों से लोकतांत्रिक तरीके से चुनी हुई सरकार के सपोर्ट में लोगों को घर से बाहर निकलकर आने को भी कहा. जिसके बाद बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर निकल आए. राष्ट्रपति ने कहा -

photo credit- Turkey tv
गुलेन 90 के दशक से अमेरीका के पेंसिलवेनिया में रह रहे हैं. और पहले भी धर्मसुधार के लिए एक बड़ा आंदोलन चला चुके हैं. वैसे 75 साल के फ़तहुल्लाह अभी कई बीमारियों से जूझ रहे हैं.
टर्की में देशद्रोह के आरोप लगने के बाद वो अमेरिका आ गए थे. हालांकि बाद में उन्हें आरोपमुक्त कर दिया गया था.
गुलेन मीडिया से परहेज़ करते हैं. टर्की की पुलिस, न्यायपालिका और यहां तक की जांच एजेंसियों में भी गुलेन की तगड़ी पकड़ है. इन सब जगहों पर इन्होने अपने आदमी सेट कर रखे हैं.
टर्की हमले का वीडियो -
https://twitter.com/ANI_news/status/754158844339564544
इस्तांबुल में बॉसपोरस पुल को क़ब्ज़े में ले लिया था. फिर पुलिस ने इनका सामना किया. जमकर भिडंत के बाद सेना कुछ देर में कमजोर पड़ गई और सरेंडर कर दिया. 1500 बागी सैनिकों को गिरफ्तार कर लिया गया है.
टर्की में रह रहे भारतीयों को घर में ही रहने की हिदायत दी गई है. इस हमले में पुलिसवालों समेत कुल 90 मौतें हो चुकी हैं. एक हजार से ज्यादा लोग घायल भी हुए हैं.
इस कारनामे के लिए टर्की के राष्ट्रपति रेकेप टायइप इर्डगन ने इस्लामी धर्मगुरु फ़तहुल्लाह गुलेन के समर्थकों पर आरोप लगाया है. साथ ही लोगों से लोकतांत्रिक तरीके से चुनी हुई सरकार के सपोर्ट में लोगों को घर से बाहर निकलकर आने को भी कहा. जिसके बाद बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर निकल आए. राष्ट्रपति ने कहा -
तख्तापलट की कोशिश नाकाम कर दी गई है. सजिश करने वालों को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जायेगा.
टर्की का दूसरा सबसे ताकतवर शख्स है फ़तहुल्लाह गुलेन
इस्लामी धर्मगुरू फ़तहुल्लाह गुलेन के टर्की में लाखों फॉलोवर हैं. डेढ़ सौ से ज़्यादा देशों में उनके स्कूल चलते हैं. और वैसे कहने को तो ये धर्मगुरु हैं पर कारोबार अरबों डॉलर का है.
photo credit- Turkey tv
गुलेन 90 के दशक से अमेरीका के पेंसिलवेनिया में रह रहे हैं. और पहले भी धर्मसुधार के लिए एक बड़ा आंदोलन चला चुके हैं. वैसे 75 साल के फ़तहुल्लाह अभी कई बीमारियों से जूझ रहे हैं.
टर्की में देशद्रोह के आरोप लगने के बाद वो अमेरिका आ गए थे. हालांकि बाद में उन्हें आरोपमुक्त कर दिया गया था.
गुलेन मीडिया से परहेज़ करते हैं. टर्की की पुलिस, न्यायपालिका और यहां तक की जांच एजेंसियों में भी गुलेन की तगड़ी पकड़ है. इन सब जगहों पर इन्होने अपने आदमी सेट कर रखे हैं.
टर्की हमले का वीडियो -
https://twitter.com/ANI_news/status/754158844339564544

