भूकंप के बाद तुर्की, सीरिया में मलबा उगल रहा लाशें, 3800 लोगों की मौत
सीरिया में भी मृतकों का आंकड़ा 1000 के पार चला गया है.

तुर्की और सीरिया में भूकंप से हुई मौतों का आंकड़ा 3800 के पार चला गया है. सोमवार को आई ये प्राकृतिक आपदा पहले तुर्की में एक हजार मौतों की वजह बनी. ताजा जानकारी के मुताबिक अब ये आंकड़ा 2400 के करीब पहुंच गया है. वहीं सीरिया में मृतकों की संख्या की एक हजार से ज्यादा हो गई है. खबरों के मुताबिक भूकंप के चलते सीरिया में अब तक 1400 से ज्यादा लोग मारे गए हैं और करीब 14 हजार लोग घायल हैं. फिलहाल दोनों देशों में राहत और बचाव का काम चल रहा है. मृतकों की संख्या और बढ़ने की आशंका है.
सैकड़ों बिल्डिंग जमींदोजभूकंप की वजह से तुर्की और सीरिया में सैकड़ों बिल्डिंग जमींदोज हो गई हैं. वहां के मालट्या प्रांत के गवर्नर ने 130 से ज्यादा बिल्डिंग गिरने की जानकारी दी है. सीरिया के सिविल डिफेंस ने स्थिति को विनाशकारी बताते हुए कहा कि सैकड़ों लोग मलबे में दबे हैं. अस्पतालों के इमरजेंसी रूम घायलों से भरे पड़े हैं. इस बीच तुर्की के उप-राष्ट्रपति फुआत ओक्ताए ने कहा है कि भूकंप से अब तक 2,379 लोगों की मौत हई है, जबकि 14 हजार 483 लोग घायल हुए हैं. फुआत ने बताया कि तुर्की के 10 प्रांत भूकंप की चपेट में आए हैं.
6 फरवरी को 24 घंटे के अंदर तुर्की में तीन अलग-अलग भूकंप आए थे. रिक्टर पैमाने पर इनकी तीव्रता 7.8, 7.5 और 6.0 मापी गई थी. पहले भूकंप का केंद्र गजियांटेप, दूसरे का काहरामानमारस और तीसरे का गोकसुन इलाका था. तुर्की में 1999 के बाद आया ये अब तक का सबसे जानलेवा भूकंप है. उस भूकंप में 17 हजार से भी ज्यादा लोग मारे गए थे.
भारत ने भेजी मददभूकंप से हुई तबाही ने तुर्की को अंतरराष्ट्रीय मदद मांगने पर मजबूर कर दिया है. उसने दुनियाभर के सक्षम देशों से मदद की गुहार लगाई है. भारत भी अपनी तरफ से हर संभव कदम उठा रहा है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने बताया कि NDRF रेस्क्यू टीम का पहला दल अपने साथ राहत सामग्री लेकर तुर्की के लिए निकल चुका है. भारत ने स्पेशल डॉग स्क्वॉड, मेडिकल सप्लाई, ड्रिलिंग मशीन और दूसरी जरूरी चीजों को तुर्की भेजा है.
इससे पहले पीएम नरेंद्र मोदी के मुख्य सचिव पीके मिश्रा की अध्यक्षता में प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में एक उच्च स्तरीय बैठक हुई थी. इसमें तुर्की की मदद को लेकर बड़े फैसले लिए गए.
भारत के अलावा रूस, अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इजरायल और युद्ध से जूझ रहे यूक्रेन ने भी तुर्की-सीरिया को मदद भेजी है. तुर्की के राष्ट्रपति रेजब तैयब अर्दोआन ने कहा है कि अब तक 45 देशों ने मदद भेजने का आश्वासन दिया है.
उधर यूनाइटेड नेशंस ने बताया कि सड़क टूटने और खराब मौसम की वजह से बचाव कार्य में परेशानी आ रही है. उसने कहा कि लोगों को रेस्क्यू करने के दूसरे तरीके निकालने होंगे. UN की शाखा यूनिसेफ ने भी खराब मौसम को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि भूकंप से हजारों घर टूट गए हैं, इस वजह से भीषण ठंड में भी लोग राहत शिविरों में रहने पर मजबूर हैं.
वीडियो: तुर्की भूकंप ने मचाई भयंकर तबाही, 7.8 मैग्नीट्यूड के बाद तबाही देख दुनिया हिल गई!

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