सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में पड़ाका बैन किया है. पड़ाका वही है, जिसे आप पटाखाकहिते हैं, लेकिन हमारे कानपुर में इसे पड़ाका कहा जाता है, इसलिए हम पड़ाकाकहेंगे. सुप्रीम कोर्ट ने प्रदूषण के मद्देनज़र दिल्ली-NCR में पटाखों की बिक्री पररोक लगा दी. मजे की बात देखो कि खाली बिक्री पर बैन लगाया, दगाने पर नहीं. बाकी आपसमझदार हैं.तो सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर देशभर में क्रांति मची है. सब शहीद होने को तैयारहैं. कुछ सुप्रीम कोर्ट को कोस रहे हैं, कुछ सोशल मीडिया पर बम फोड़ रहे हैं.कुच्छौ शेयर कर रहे हैं. कह रहे हैं कि NCR में पटाखे बैन करने वाला जजहिंदू-विरोधी है, देशद्रोही है, गद्दार है.ये लोग जाने कहां से एक पुरानी फोटो खोज लाए हैं. इसमें एक शख्स कांग्रेस अध्यक्षसोनिया गांधी के चेहरे पर रंग लगा रहा है. लग रहा है कि होली की तस्वीर है. साथ मेंजो बताया जा रहा है, वो और झिलाऊ है. बताया जा रहा है कि ये आदमी जस्टिस एके सीकरीहैं, जिन्होंने दिल्ली-NCR में पटाखों की बिक्री पर बैन लगाया है. देखिए क्या-क्याशेयर कर रहे हैं लोग:Justice Sikri, head of the SC bench who imposed #firecrackersbanin Delhi👇 Is this true @pbhushan1?😁 pic.twitter.com/6GZW5zDgft— #Intolerant भारतीय (@goyalsanjeev) October 18, 2017मने लोगों की बौखलाहट सुप्रीम कोर्ट जस्टिस एके सीकरी से सीधे सोनिया गांधी तकपहुंच गई. फोटो का मेसेज साफ है कि जज साहब सोनिया गांधी के साथ खड़े हैं, तो वो तोदिवाली के विरोधी होंगे ही. सोनिया गांधी के इशारे पर ही जज साहब ने पड़ाकों पर बैनलगा दिया होगा. मतलब हद है. ठीक है आपको फैसला रास नहीं आया, लेकिन विरोध की भी एकसीमा होती है न. या भावनाओं में बहकर गदहापना करने लगेंगे. ऐसे लोगों को एक ही बातकहने का मन करता है- टोपा हो का बे. आज सुबह ही एक वीडियो में सुना तो याद आ गया,कहते तो कई साल से आए हैं.अच्छा कुछ ने तो इससे भी ज्यादा हद कर दी. देखिए, पहले नमूना देखिए.विनोद दुआ को भी ट्रोल किया जा चुका है इस फोटो के लिए.मतलब न तो इन्हें ये पता है कि ये फोटो किसकी है, न ये पता है कि फैसला देने वालेजज का नाम क्या है, न ये पता है कि विनोद दुआ कौन हैं. लेकिन बोलै से मतलब था,तो मुंह खोले और भक्क से मार दिए. और ये फोटो अभी नहीं, पहले भी अफवाह के साथ शेयरकी जा चुकी है. तब भी इसे विनोद दुआ की फोटो बताया गया था. विनोद दुआ वरिष्ठपत्रकार हैं. इनका शो आपको याद होगा, 'ज़ायका इंडिया का'. NDTV पर आता था.अब मुलाकात तो बीजेपी नेता भी सोनिया गांधी से करते हैं तो इसके क्या मतलबनिकालेंगे आप.यार ये कितनी नीचता की बात है कि जिस जज ने फैसला सुनाया, उसका नाम विनोद दुआ नहींहै. जो विनोद दुआ है, वो इस फोटो में नहीं है. जो इस फोटो में है, उसके बारे मेंकिसी को कुछ पता नहीं है. लेकिन एक फोटो आई और सारे लोग दल्ले घोषित हो गए. विनोददुआ तो पहले भी इस फोटो के शिकार हो चुके हैं.फोटो की सच्चाई ये हैहकीकत में ये फोटो 2008 की है. तस्वीर जो होली की लग रही है, असल में होली की हीहै. मगर जो शख्स सोनिया गांधी को रंग लगा रहे हैं, वो पत्रकार विनोद दुआ, जज विनोददुआ या जज एके सीकरी नहीं हैं. ये कांग्रेसी नेता केपी सिंह देव हैं, जो ओडिशा सेआते हैं. कई बार लोकसभा सांसद और ओडिसा कांग्रेस के अध्यक्ष रह चुके हैं.ओडिसा कांग्रेस के नेता केपी सिंह देव.अब उन जज साहब के बारे में भी जान लो, जिन्होंने फैसला सुनाया हैइनका पूरा नाम अर्जन कुमार सीकरी. ये अप्रैल 2013 से सुप्रीम कोर्ट के जज हैं. उससेपहले पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रहे. 1977 में दिल्ली से वकालत शुरूकी थी. पहली बार जज की पदवी 1999 में दिल्ली हाईकोर्ट में मिली थी. पंजाब औरहरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रहते हुए उन्होंने महिलाओं, बुजुर्गों,ट्रांसजेंडर्स के केसों में तेजी से सुनवाई के आदेश दिए थे. 2013 में पाकिस्तान कीजेल में सजा काट लेने के बाद भी बंद दो भारतीयों के मामले में सीकरी ने केंद्रसरकार को नोटिस जारी किया था. फिलहाल आधार अनिवार्य हो या नहीं, मामले की सुनवाई भीजस्टिस सीकरी और अशोक भूषण की बेंच कर रही है.जस्टिस सीकरी पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस भी रह चुके हैं.विनोद दुआ के नाम से ये फोटो पहले भी शेयर हो चुका है2014 में भी एक बार ये फोटो वायरल हुई थी, जब विनोद दुआ को खूब ट्रोल किया गया था.इसके बाद खुद विनोद दुआ ने अपने एक न्यूज़ वीडियो में बताया था कि फोटो में वोनहीं, बल्कि केपी सिंह देव हैं. दुआ ने बताया कि वो सोनिया गांधी से सिर्फ एक बारमिले हैं. वो भी एक डेलिगेशन में. पॉपुलेशन काउंसिल का डेलिगेशन. तब अटल बिहारीवाजपेयी प्रधानमंत्री थे. विनोद दुआ ने इस पर फोटो अपलोड करने वाले को केस करने कीचेतावनी दी थी, जिसके बाद उसने माफी मांगते हुए फोटो हटा ली थी.पत्रकार विनोद दुआ को भी इस फोटो का इस्तेमाल कर ट्रोल किया जा चुका है.ये तो कहो अपने यहां लोग साइबर क्राइम को इतना सीरियसली लेते नहीं हैं, वरना सोचोअगर यही फोटो फैसला सुनाने वाले जज तक पहुंच जाए, तो फोटो शेयर करने वालों को कितनीबड़ी लकड़ी मिलेगी. तो भइया लोगों, देशभक्त बनो, त्योहार मनाओ, सब कुछ करो. बस ऐसेसूतियापे न करो.--------------------------------------------------------------------------------ये भी पढ़ें:ये वीडियो देखने के बाद कंपनी में कार की सर्विस करवाने से पहले 100 बार सोचेंगेकितने बीमार हैं ये लोग, जो गाय काटकर दंगा फैलाना चाहते हैंबछड़ा मरने पर औरत से भीख मंगवाई, शुक्र है उसकी ‘लिंचिंग’ नहीं हुईइंडिया में 200 गायें मारी गई हैं, तो कितने लोगों को क्या सजा होगी!गोरक्षकों के मुंह खून लग गया है, वो गाय के मुद्दे के बिना भी मारेंगेये देखो लल्लनटॉप शो का एक जाबड़ वीडियो: