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अमेरिका ने भारत पर लगाया जबरन मजदूरी का 'ठप्पा', 12.5% टैरिफ बढ़ने का खतरा

US-India Trade Deal: नई दिल्ली में अमेरिका और भारत की अंतरिम ट्रेड डील को लेकर बैठक चल रही है. इस बीच अमेरिकी एजेंसी ने एक रिपोर्ट निकाली, जिसमें भारत का गलत तरीके से व्यापर करने वाले देशों की लिस्ट में नाम आया है. टैरिफ बढ़ाने का भी सुझाव दिया गया है.

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3 जून 2026 (पब्लिश्ड: 03:39 PM IST)
US-India trade deal:
अमेरिका-भारत ट्रेड डील के बीच अमेरिकी एजेंसी ने भारत पर आरोप लगाया है. (फोटो-इंडिया टुडे)
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अमेरिका और भारत की ट्रेड डील पर बात चल रही है (US-India Trade deal). इस बीच भारत का उन देशों में नाम आया है जो गलत तरीके से व्यापार करते हैं. अमेरिकी सरकार की यूनाइटेड स्टेट्स ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) एजेंसी ने अपनी जांच के आधार पर प्रस्ताव रखा है कि इन देशों से आयात किए गए सामानों पर अलग से 10 से 12.5 फीसदी टैरिफ लगाया जाना चाहिए. USTR ने अपनी जांच में कुल 60 देशों का नाम दिया है. 1 जून को अमेरिका का एक हाई लेवल प्रतिनिधिमंडल चार दिन के लिए भारत पहुंचा है, जिसका मकसद US-India अंतरिम डील को अंतिम रूप देना है. 

USTR एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि उसने ‘सेक्शन 301’ के तहत अपनी जांच की. इसमें बताया गया कि कुछ देश ‘फोर्स्ड लेबर’ या जबरदस्ती मजदूरी के ज़रिए बनाए गए सामान के आयात को रोकने में नाकाम रहे. वे न इसपर प्रतिबंध लगा पाए और न ही प्रभावी ढंग से रोक पाए.

रिपोर्ट के मुताबिक, 60 देश फोर्स्ड लेबर को रोकने में नाकाम रहे. इनमें भारत के अलावा पाकिस्तान, चीन, बांग्लादेश, नेपाल, ऑस्ट्रलिया, यूनाइटेड किंगडम, UAE, जापान, सऊदी अरब जैसे कई देश शामिल हैं. अमेरिका के मुताबिक, उसे इसलिए दिक्कत क्योंकि जबरन मजदूरी के दम पर ये देश सस्ते सामान का जुगाड़ कर लेते हैं, जबकि अगर अमेरिका दूसरे देशों में अपना सामान बेचेगा, तो उसका माल महंगा बिकेगा.

USTR ने क्या कहा? 

एजेंसी ने बताया कि जिन देशों में फोर्स्ड लेबर पहले ही बैन है, लेकिन फिर भी ये देश जबरन मजबूरी से बने सामानों के आयात पर रोक नहीं लगा पाए, उन्हें 10 फीसदी ज्यादा टैरिफ देना चाहिए. इसके अलावा जो देश इन मानदंडों को पूरा नहीं करते उनके लिए 12.5 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ प्रस्तावित किया गया है. एजेंसी ने कपड़ों के आयात के लिए भी एक सुझाव दिया है. वो ये कि कुछ देशों से सेक्शन 301 के तहत केवल चुनिंदा सामान को ही कम टैरिफ दर पर अमेरिकी मार्केट में लाने की इजाजत दी जाए.

USTR ने कहा,

जिन देशों ने जबरन मजदूरी वाले सामान पर बैन लगाया है, या कुछ हद तक कोई सिस्टम लागू किया है, उन पर 10 फीसदी एक्स्ट्रा टैरिफ लगाया जा सकता है.

बाकी सभी देशों (जिसमें भारत भी शामिल है) पर 12.5 फीसदी टैरिफ अलग से लगाने का प्रस्ताव है.

USTR ने तर्क दिया कि अमेरिका दुनिया में जबरन मजदूरी को ख़त्म करना चाहता है. लेकिन ऐसे में इन देशों की वजह से ये मुमकिन नहीं हो पा रहा है. जो देश जबरन मजदूरी को ख़त्म करने की दिशा में काम कर रहे हैं, उनकी कोशिशें भी बेकार जा रही हैं.लोअर-कॉस्ट प्रोडक्शन की वजह से मार्केट का संतुलन बिगड़ रहा है और अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन हो रहा है.

ये भी पढ़ें: टैरिफ पर कहीं पलट न जाएं ट्रंप? ट्रेड डील पर उनके दावों ने बढ़ाईं धड़कनें

सेक्शन 301 क्या है? 

US ट्रेड एक्ट 1974 की ‘धारा 301’ USTR एजेंसी को ये हक़ देती है कि वो ट्रेड प्रैक्टिस और विदेश सरकारों की ट्रेड पॉलिसी की जांच कर सकता है. इसका मकसद ये पता लगाना होता है कि ट्रेड के दौरान कहीं कुछ गलत या भेदभाव तो नहीं हो रहा है.

अगर जांच में एजेंसी ने साबित कर दिया कि ट्रेड के दौरान कुछ गड़बड़ी पाई गई है तो इस धारा के तहत अमेरिकी कॉमर्स मंत्रालय एक्शन ले सकता है. इसमें टैरिफ बढ़ाने से लेकर प्रतिबंध लगाने तक के एक्शन शामिल हैं.  

वीडियो: राजधानी: अमित शाह ने राहुल गांधी को US ट्रेड डील पर क्या चुनौती दी है?

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