'बहुत हुई बमबारी', जंग के बीच ट्रंप ने ऐसा झटका दिया, हक्का-बक्का रह गए नेतन्याहू
Benjamin Natanyahu और उनकी टीम को Donald Trump की Lebanon पर की गई टिप्पणियों के बारे में मीडिया से पता चला, और वे इससे पूरी तरह से हैरान रह गए.

ईरान-अमेरिका के बीच सीजफायर के बाद भी लेबनान पर हमले जारी थे. इजरायल ने हिज़बुल्लाह के ठिकानों पर हमले सीजफायर के बाद भी नहीं रोके. इन हमलों में आम लोगों की भी मौत हुई, जिनका जंग से कोई वास्ता नहीं था. इसी बीच ईरान के खिलाफ जंग में इजरायल के मजबूत साझेदार रहे अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के सुर बदल गए हैं. ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि अब से लेबनान में हमलों पर 'प्रतिबंध' है. अब इजरायल अमेरिका से इस पोस्ट का मतलब पूछ रहा है.
ट्रंप की इस ट्रुथ सोशल पोस्ट का मतलब था कि इजरायल को हमले रोकने होंगे. ये पोस्ट बिल्कुल एक आदेश की तरह था कि इजरायल के पास अमेरिका की बात मानने के अलावा और कोई विकल्प नहीं है. अमेरिका से दोस्ती के बावजूद ऐसा होना निश्चित तौर पर बेंजामिन नेतन्याहू को असहज कर रहा है. Axios की रिपोर्ट के मुताबिक इजरायल ने व्हाइट हाउस से प्रेसिडेंट की पोस्ट को लेकर जानकारी मांगी है. सूत्रों ने बताया कि जब नेतन्याहू को उस पोस्ट के बारे में पता चला तो वह हक्के-बक्के रह गए और चिंतित हो उठे.

ट्रंप ने 16 अप्रैल को ऐलान किया था कि इजरायल और लेबनान 10 दिन के सीजफायर पर सहमत हो गए हैं. अमेरिका कई दिनों से इस तरह के सीजफायर के लिए जोर दे रहा था. साथ ही ईरान के साथ एक शांति समझौते पर भी काम कर रहा था. समझौते के अनुसार, इजरायल के पास यह अधिकार होगा कि वह संघर्ष-विराम के दौरान भी आत्मरक्षा में किसी भी समय, प्लान्ड या जारी हमलों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई कर सकता है. उन्होंने ट्रुथ पर लिखा,
USA को हमारे शानदार B2 बॉम्बर्स से पैदा हुई सारी न्यूक्लियर "धूल" मिलेगी. इस सौदे में किसी भी तरह से, किसी भी रूप में पैसों का कोई लेन-देन नहीं होगा. यह सौदा किसी भी तरह से लेबनान से भी जुड़ा हुआ नहीं है, लेकिन USA अलग से लेबनान के साथ काम करेगा और हिज़्बुल्लाह की स्थिति से उचित तरीके से निपटेगा. इजरायल अब लेबनान पर बमबारी नहीं करेगा. USA ने उन्हें ऐसा करने से मना कर दिया है. बस अब बहुत हो चुका.
इजरायल ने यह वादा किया कि वह लेबनानी ठिकानों के खिलाफ, जिनमें नागरिक, सैन्य और अन्य सरकारी ठिकाने शामिल हैं, कोई भी आक्रामक सैन्य कार्रवाई नहीं करेगा. यह सीजफायर नेतन्याहू के लिए राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील है. उनकी सरकार ने इस बात पर जोर दिया है कि अगर जरूरी हुआ तो हिज़्बुल्लाह पर हमला करने से उसे कोई रोक नहीं सकता.
इजरायल की असहजता का कारण ये भी था कि US ने ये बयान जारी करने से पहले इजरायल को कुछ नहीं बताया लेकिन ट्रंप तो ट्रंप हैं. उन्होंने ट्रुथ पर लिख दिया. नेतन्याहू और उनकी टीम को ट्रंप की लेबनान पर की गई टिप्पणियों के बारे में मीडिया से पता चला और वे इससे पूरी तरह से हैरान रह गए. वहीं वॉशिंगटन में इजरायल के राजदूत येहिएल लीटर समेत अन्य सहयोगी यह समझने की कोशिश में जुट गए कि क्या अमेरिका ने अपनी नीति में कोई बदलाव किया है?
इजरायली अधिकारियों ने व्हाइट हाउस से इस पर स्पष्टीकरण मांगा और जोर देकर कहा कि ट्रंप की टिप्पणी उस समझौते के विपरीत है. जब Axios ने व्हाइट हाउस से इस पर टिप्पणी मांगी तो एक अमेरिकी अधिकारी ने ट्रंप की टिप्पणियों पर स्पष्टीकरण दिया. अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि लेबनान और इजरायल के बीच राष्ट्रपति के सीजफायर समझौते में यह साफ़ तौर पर कहा गया है कि इजरायल लेबनानी ठिकानों के खिलाफ कोई भी आक्रामक सैन्य कार्रवाई नहीं करेगा. लेकिन संघर्ष-विराम के दौरान भी आत्मरक्षा में किसी भी समय, प्लान्ड या जारी हमलों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई कर सकता है.
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