वैज्ञानिक का बड़ा आरोप- ISRO हेडक्वार्टर में मुझे ज़हर देकर मारने की कोशिश की गई
वैज्ञानिक का आरोप है कि उन पर कई जानलेवा हमले किए जा चुके हैं.
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इसरो वैज्ञानिक तपन ने फेसबुक पोस्ट कर दावा किया है कि उन्हें कई ज़हर देकर मारने की कोशिश की गई. (तस्वीर: FB | tapan.misra.9)
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तपन मिश्रा. वैज्ञानिक हैं. ISRO के ऑफिस ऑफ इनोवेशंस मैनेजमेंट के प्रमुख रहे हैं. ISRO के स्पेस ऐप्लिकेशन सेंटर के डायरेक्टर रहे. अब उन्होंने फेसबुक पोस्ट
के जरिए एक चौंकाने वाला दावा किया है. उन्होंने बताया कि उन्हें खाने में ज़हर देकर मारने की कोशिश की गई थी. जहर इतना खतरनाक था कि दो साल तक वो उसके असर से जूझते रहे.
तपन मिश्रा ने फेसबुक पर लिखा कि इसरो में रहते हुए विक्रम साराभाई, एस श्रीनिवासन की संदिग्ध मौतों के बारे में सुना था. नम्बीनारायणन का 1994 वाला केस सब जानते हैं. लेकिन मुझे नहीं मालूम था कि कभी मैं भी इसका भुक्तभोगी बनूंगा. लेकिन मुझे नहीं मालूम था कि कभी मैं भी इसका भुक्तभोगी बनूंगा. उन्होंने लिखा कि उन्हें मई 2017 में आर्सेनिक ज़हर दिया गया, जिसके चलते वो दो साल तक बीमार रहे. वहीं सितंबर, 2020 में भी उन्हें आर्सेनिक जहर दिया गया जिसके चलते उनकी हड्डियों में दर्द होने लगा और उनकी त्वचा छिलने लगी.
उन्होंने लिखा,

इसरो वैज्ञानिक तपन के मेडिकल डाक्यूमेंट. (तस्वीर: FB | tapan.misra.9)
तपन मिश्रा ने अपने ऊपर हमले को लेकर अलर्ट करने के लिए अपने एक डायरेक्टर दोस्त और केंद्रीय गृह मंत्रालय के सुरक्षा एजेंसी से जुड़े लोगों का आभार जताया. साथ लिखा कि अगर सुरक्षा एजेंसी के लोग उनके साथ नहीं होते तो वो इलाज के लिए अलग-अलग शहर नहीं जा पाते. उनके ऑर्गन्स काम करना बंद कर देते और उनकी मौत हो जाती. किस तरह दिया गया आर्सेनिक ज़हर? तपन मिश्रा ने लिखा,
इस हमले को जासूसी हमला बताते हुए तपन मिश्रा ने इसे देश और सुरक्षा तंत्र के लिए शर्मनाक बताया. उन्होंने लिखा कि इस पूरे वाकये में उनके कई साथियों ने उन्हें छोड़ दिया. उनसे दूर जाने लगे. फेसबुक पोस्ट में उन्होंने किरण कुमार, कस्तूरीरंगन और माधवन नायर के नाम लिखे. 'चंद्रयान 2 के लॉन्च से दूर रखने की कोशिश की गई' तपन का आरोप है कि उन पर बाद में भी हमले हुए. और कई धमकियां मिलीं. सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता से 3 मई 2018 को एक लैब विस्फोट में बचाया गया. उन्होंने लिखा,
इसरो वैज्ञानिक तपन की मेडिकल रिपोर्ट्स. (तस्वीर: FB | tapan.misra.9)
'ऑफर ठुकराया तो करियर खत्म हो गया' तपन मिश्रा ने आरोप लगाया कि 19 जुलाई, 2019 को टॉप अमेरिकी यूनिवर्सिटी के भारतीय प्रोफेसर उनके ऑफिस आए. चुप रहने के बदले उनके IIT खड़गपुर से ग्रेजुएट बेटे को टॉप कॉलेज में दाखिला देने का ऑफर दिया. मैंने इनकार किया तो वो चले गए. लेकिन मेरा 30 साल का करियर भी खत्म कर दिया. उसी दोपहर मुझे SAC के डायरेक्टर पद से हटाकर सभी जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया गया. 'घर में लगातार आने लगे थे जहरीले सांप' तपन मिश्रा का आरोप है कि 23-24 जनवरी, 2020 को उनके ऑफिस के एक डॉक्टर्ड वीडियो के जरिए उनकी छवि खराब करने की कोशिश की गई. उन्होंने बताया कि दो साल से उनके क्वार्टर में कुछ-कुछ दिनों में कोबरा और करैत जैसे जहरीले सांप निकल आते हैं. इन्हें उनकी चार बिल्लियों और सुरक्षा कर्मचारियों की मदद से पकड़कर मारा गया. उन्होंने लिखा कि उनके कम्पाउंड में तीन महीने पहले एक गुप्त सुरंग भी दिखी थी, उसे बंद करने पर सांपों का आना बंद हो गया. तपन मिश्रा ने शक जाहिर किया कि उनके मानसिक रूप से विकलांग बेटे को भी संभवतः ज़हर दिया गया है. आखिर में तपन मिश्रा ने देश के सुरक्षा तंत्र पर भरोसा जताते हुए कहा कि हमलावर बहुत खतरनाक हैं. वो हमारे सिस्टम में घुसे हुए हैं. ऐसे में इस तरह की घटनाओं से बचने के लिए जरूरी कदम उठाने होंगे.
के जरिए एक चौंकाने वाला दावा किया है. उन्होंने बताया कि उन्हें खाने में ज़हर देकर मारने की कोशिश की गई थी. जहर इतना खतरनाक था कि दो साल तक वो उसके असर से जूझते रहे.
तपन मिश्रा ने फेसबुक पर लिखा कि इसरो में रहते हुए विक्रम साराभाई, एस श्रीनिवासन की संदिग्ध मौतों के बारे में सुना था. नम्बीनारायणन का 1994 वाला केस सब जानते हैं. लेकिन मुझे नहीं मालूम था कि कभी मैं भी इसका भुक्तभोगी बनूंगा. लेकिन मुझे नहीं मालूम था कि कभी मैं भी इसका भुक्तभोगी बनूंगा. उन्होंने लिखा कि उन्हें मई 2017 में आर्सेनिक ज़हर दिया गया, जिसके चलते वो दो साल तक बीमार रहे. वहीं सितंबर, 2020 में भी उन्हें आर्सेनिक जहर दिया गया जिसके चलते उनकी हड्डियों में दर्द होने लगा और उनकी त्वचा छिलने लगी.
उन्होंने लिखा,
मुझे 23 मई, 2017 को बेंगलुरु के इसरो हेडक्वार्टर में प्रमोशन का इंटरव्यू देना था. इस दिन मुझे घातक आर्सेनिक ट्रायोक्साइड ज़हर दिया गया. शायद डोसा के साथ चटनी में यह मिला के. इसके बाद अगले दो साल तक मेरी बॉडी से ब्लीडिंग होती रही, 30-40 फीसद खून बह गया. मैं बमुश्किल बेंगलुरु से वापस अहमदाबाद वापस आ सका और वहां के कैडिला हॉस्पिटल ले जाया गया. इसके बाद मुझे सांस लेने में दिक्कतें होनी लगी. त्वचा फटने और छिलने लगी. नाखून गिरने लगे. भयानक न्यूरोलॉजिकल दिक्कतें आने लगीं. हड्डियों में दर्द. एक संदिग्ध हार्ट अटैक. त्वचा और इंटरनल ऑर्गन्स की हर परत पर आर्सेनिक जमा होने लगा. फंगल इन्फेक्शन की दिक्कतें आने लगी.उन्होंने आगे बताया कि दो साल तक मेरा इलाज़ ज़ाइडस कैडिला, टीएमएच मुंबई, एम्स दिल्ली में ज़ारी रहा. नामी फोरेंसिक विशेषज्ञ डॉक्टर सुधीर गुप्ता ने मुझे बताया कि उन्होंने अपने पूरे करियर में पहली बार हत्या के लिए दी गए मॉलेक्यूलर As203 ख़ुराक से जिंदा बचे आदमी को देखा है.

इसरो वैज्ञानिक तपन के मेडिकल डाक्यूमेंट. (तस्वीर: FB | tapan.misra.9)
तपन मिश्रा ने अपने ऊपर हमले को लेकर अलर्ट करने के लिए अपने एक डायरेक्टर दोस्त और केंद्रीय गृह मंत्रालय के सुरक्षा एजेंसी से जुड़े लोगों का आभार जताया. साथ लिखा कि अगर सुरक्षा एजेंसी के लोग उनके साथ नहीं होते तो वो इलाज के लिए अलग-अलग शहर नहीं जा पाते. उनके ऑर्गन्स काम करना बंद कर देते और उनकी मौत हो जाती. किस तरह दिया गया आर्सेनिक ज़हर? तपन मिश्रा ने लिखा,
ये ज़हर भारी भोजन के बाद मॉलेक्यूलर लेवल सस्पेंशन के रूप में दिया जाता है. यह एक बेरंग, गंधरहित और बेस्वाद केमिकल है. ऐसे में इस पर संदेह भी नहीं किया जा सकता. यह पेट में जाते हुए RBC को जल्दी और बड़े पैमाने पर मारता है ताकि नसें दब जाएं. इससे 2-3 घंटे के भीतर दिल का दौरा पड़ता है. पीड़ित की मृत्यु को आसानी से दिल का दौरा पड़ने से मौत बताया जा सकता है.उन्होंने लिखा कि ये संयोग ही था कि मैंने उस दिन लंच नहीं किया. आर्सेनिक सीधे कोलोन में गया और खून के जरिए बाहर निकल गया. लेकिन बचे हुए आर्सेनिक ने मुझे इतना नुकसान पहुंचाया कि बस मैं ही जानता हूं. मैंने अपने मनोबल को हाई रखा ताकि ज़हर से लड़ा जा सके.
इस हमले को जासूसी हमला बताते हुए तपन मिश्रा ने इसे देश और सुरक्षा तंत्र के लिए शर्मनाक बताया. उन्होंने लिखा कि इस पूरे वाकये में उनके कई साथियों ने उन्हें छोड़ दिया. उनसे दूर जाने लगे. फेसबुक पोस्ट में उन्होंने किरण कुमार, कस्तूरीरंगन और माधवन नायर के नाम लिखे. 'चंद्रयान 2 के लॉन्च से दूर रखने की कोशिश की गई' तपन का आरोप है कि उन पर बाद में भी हमले हुए. और कई धमकियां मिलीं. सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता से 3 मई 2018 को एक लैब विस्फोट में बचाया गया. उन्होंने लिखा,
12 जुलाई 2019 को फिर से मुझे मारने की कोशिश की गई. कोई निशान न छोड़ने वाला शायद हाइड्रोजन साइनाइड गैसीय ज़हर दिया गया. मैं अपना सेंस और मेमरी खोने लगा. मैं अपने पीएसओ की एनएसजी ट्रेनिंग की वजह से बच गया. मुझे तुरंत हॉस्पिटल ट्रांसफर किया गया. लगातार ऑक्सीजन दिया गया. मैं कई दिनों तक आईसीयू में रहा. ऑक्सीजन की कमी का इलाज़ मेरा आज तक जारी है. गौर करने वाली बात ये है कि यह तब हुआ, जब चंद्रयान 2 के लॉन्च होने में 2 दिन बचे थे. शायद मुझे लॉन्च वाले मौके से दूर रखने का इरादा था.

इसरो वैज्ञानिक तपन की मेडिकल रिपोर्ट्स. (तस्वीर: FB | tapan.misra.9)
'ऑफर ठुकराया तो करियर खत्म हो गया' तपन मिश्रा ने आरोप लगाया कि 19 जुलाई, 2019 को टॉप अमेरिकी यूनिवर्सिटी के भारतीय प्रोफेसर उनके ऑफिस आए. चुप रहने के बदले उनके IIT खड़गपुर से ग्रेजुएट बेटे को टॉप कॉलेज में दाखिला देने का ऑफर दिया. मैंने इनकार किया तो वो चले गए. लेकिन मेरा 30 साल का करियर भी खत्म कर दिया. उसी दोपहर मुझे SAC के डायरेक्टर पद से हटाकर सभी जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया गया. 'घर में लगातार आने लगे थे जहरीले सांप' तपन मिश्रा का आरोप है कि 23-24 जनवरी, 2020 को उनके ऑफिस के एक डॉक्टर्ड वीडियो के जरिए उनकी छवि खराब करने की कोशिश की गई. उन्होंने बताया कि दो साल से उनके क्वार्टर में कुछ-कुछ दिनों में कोबरा और करैत जैसे जहरीले सांप निकल आते हैं. इन्हें उनकी चार बिल्लियों और सुरक्षा कर्मचारियों की मदद से पकड़कर मारा गया. उन्होंने लिखा कि उनके कम्पाउंड में तीन महीने पहले एक गुप्त सुरंग भी दिखी थी, उसे बंद करने पर सांपों का आना बंद हो गया. तपन मिश्रा ने शक जाहिर किया कि उनके मानसिक रूप से विकलांग बेटे को भी संभवतः ज़हर दिया गया है. आखिर में तपन मिश्रा ने देश के सुरक्षा तंत्र पर भरोसा जताते हुए कहा कि हमलावर बहुत खतरनाक हैं. वो हमारे सिस्टम में घुसे हुए हैं. ऐसे में इस तरह की घटनाओं से बचने के लिए जरूरी कदम उठाने होंगे.

