इस बार की 26 जनवरी, देशवालों को एक और खुशी दे गई. ओडिशा की राजधानी भुवनेश्नवरमें एक ट्रांसजेंडर महिला ने ब्याह रचाया. ख़ास बात है कि ये एक अरेंज्ड मैरिज थी.और शादी का प्रपोजल खुद लड़के के परिवार की तरफ से आया था. 15 अप्रैल 2014 कोसुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि ट्रांसजेंडर लोगों के लिए अब से 'थर्डजेंडर' की कैटेगरी होगी. उन्हें किसी भी तरह के पहचान पत्र में, मर्द या औरत के रूपमें खुद को दर्ज नहीं कराना पड़ेगा.2014 के लोकसभा चुनावों में देश भर से 28 हजार ट्रांसजेंडरों ने थर्ड जेंडर कीपहचान लेकर वोट भी दिया.इसके पहले ट्रांसजेंडरों को अपनी पहचान लोगों के सामने रखने में झिझक होती थीक्योंकि समाज के आम लोगों में ज्ञान की कमी थी. पहले ट्रांसजेडर शादियां करते भी थेतो चोरी-छुपे. अब इस शादी में दुल्हन मेघा के पास शादी का प्रस्ताव आना ये दिखाताहै कि हम एक समाज के रूप में बेहतर हो रहे हैं.दुल्हन - मेघा दूल्हा - वासुदेवइमेजः ANI, ट्विटरये शादी पूरे हिंदू रीति- रिवाजों से हुई. जश्न मनाने के लिए सारे रिश्तेदार मौजूदथे. बारात में मर्द, औरत, ट्रांसजेंडर सब साथ में ही मटक रहे थे. भुवनेश्वर के मेयरअनंत नारायण जेना भी जोड़े को आशीर्वाद देने आए हुए थे.शादी में सबकी नजरें खूबसूरत दुल्हन मेघा पर ही थीं. मेघा ने ANI से बात करते हुएकहा, "लोग सोचते हैं कि ट्रांसजेंडर शादी नहीं करते और वे बच्चे पैदा नहीं कर सकते,लेकिन मैं उन्हें गलत साबित करूंगी. हम भी ऐसी महिलाएं हैं जो सामान्य जीवन जीनाचाहती हैं."https://www.youtube.com/watch?v=KEubc4Ikzxk थर्ड जेंडर के बारे में जानिएट्रांसजेंडर वे होते हैं जिनकी पैदाइश के वक़्त मर्द या औरत का फर्क न समझ आए. बड़ेहोकर इनकी पहचान बनती है - ट्रांसजेंडर मर्द या ट्रांसजेंडर औरत.ट्रांसजेंडर औरतेंजिन पर पैदाइशी मर्द का ठप्पा होता है और वो जवान होते वक्त खुद को लड़की जैसामहसूस करते हैं. अपने अंदर मर्दों वाले हार्मोन जैसे कि टेस्टोस्टोरॉन हटवाकर यासर्जरी से मर्दाना अंग हटवाकर वो औरतों वाले सारी खूबियां खुद के अंदर ले आते हैं.सर्जरी में मर्दाना जेनेशियल को वैजाइना में बदल दिया जाता है. बच्चे पैदा करनेवाले अंग, यूट्रस, ओवेरी को ट्रांसप्लांट कराना पड़ता है. हालांकि मेडिकल साइंस मेंजनाना अंग के ट्रांसप्लांट में अभी भी बहुत रिस्क गिनाए जाते हैं. ट्रांसजेंडरऔरतों के पास अपना बच्चा पैदा करने के लिए सरोगेसी अच्छा और सुरक्षित विकल्प है.ट्रांसजेंडर मर्दपैदा होने पर इन्हें लड़की कहकर बुलाया जाता है लेकिन बड़ा होते होते व्यक्तित्वलड़कों जैसा होने लगता है. इन्हें लड़कियों जैसा रहन-सहन रास नहीं आता है. वो मेडिकल ट्रीटमेंट से खुद में मर्दाने सेक्शुअल और रिप्रोक्डिव ऑर्गन लगवा लेतेहैं. वैसे आमतौर पर इन ट्रीटमेंट में टेस्टिकल्स लगाना कठिन काम है.जब मुंबई ने देखी पहली 'खुल्लमखुल्ला' ट्रांसजेंडर शादीइमेजः FACEBOOK/AHER ABHEENALGBTQ समुदाय के हक के लिए काम करने वाली ट्रांसजेंडर माधुरी सरोद ने 28 दिसंबर2016 को मुंबई में अपना हमसफर चुन लिया. इस शादी ने ट्रांजेंडरों के सहज जीवन कारिबन काट दिया. माधुरी और उनके पार्टनर जय कुमार शर्मा की जान-पहचान फेसबुक से हुईथी. पांच साल साथ में काम करते, बोलते-खिलखिलाते 28 दिसंबर को एक मंदिर में शादी करली. माधुरी की कोशिश अब ये है कि उनकी शादी का सर्टिफिकेट उन्हें एक ट्रांसजेंडरशादी के रूप में ही मिले.माधुरी इसके लिए लड़ने को तैयार हैं और जरूरत पड़ी तो अदालत के चक्कर लगाने की भी.उनका कहना है कि अगर हमें ट्रांसजेंडर के रूप में पहचान मिल सकती है तो हमारी शादीएक ट्रांसजेंडर शादी क्यों नहीं कहला सकती.--------------------------------------------------------------------------------ये भी पढ़ेंःद डेनिश गर्ल: 4 सर्जरी करवाईं, ताकि मर्दाने बदन से मुक्ति मिलेइन हिंदी तस्वीरों से समझ लो 'गे' और 'लेस्बियन' कौन होते हैंLGBTQ 1: अब दोस्त को 'गांडू' नहीं कहताये प्राइड है, यहां लड़कों का लिपस्टिक लगाना 'शर्मनाक' नहीं होतासमाज को लगता है सेक्स सिर्फ लड़के-लड़की के बीच हो सकता है